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मीरा हो गयी मगन ऐसी लागी लगन (Meera Ho Gayi Magan Aisi Laagi Lagan Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

64 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मीरा की भक्ति: प्रेम और त्याग का वर्णन

यह भजन मीरा की असीम भक्ति को प्रदर्शित करता है, जो भगवान श्री कृष्ण के प्रति उनके प्रिय प्रेम को दर्शाता है।

 मीरा हो गयी मगन ऐसी लागी लगन (Meera Ho Gayi Magan Aisi Laagi Lagan Lyrics in Hindi) :-है आँख वो जो श्याम का दर्शन किया करेहै शीश जो प्रभु चरण में वंदन किया करे ।बेकार वो मुख है जो व्यर्थ बातों मेंमुख है वो जो हरी नाम का सुमिरन किया करे ॥हीरे मोती से नहीं शोभा है हाथ कीहै हाथ जो भगवान् का पूजन किया करे ।मर के भी अमर नाम है उस जीव का जग मेंप्रभु प्रेम में बलिदान जो जीवन किया करे ॥ऐसी लागी लगन मीरा हो गयी मगन ।वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी ॥महलों में पली बन के जोगन चली ।मीरा रानी दीवानी कहाने लगी ॥कोई रोके नहीं कोई टोके नहींमीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी ।बैठी संतो के संग रंगी मोहन के रंगमीरा प्रेमी प्रीतम को मनाने लगी ।वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी ॥राणा ने विष दिया मानो अमृत पियामीरा सागर में सरिता समाने लगी ।दुःख लाखों सहे मुख से गोविन्द कहेमीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी ।वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में मीरा बाई की गहन भक्ति और भगवान श्री कृष्ण के प्रति उनके प्रेम को दर्शाया गया है। पहले चरण में यह कहा गया है कि 'है आँख वो जो श्याम का दर्शन किया करे', यह दर्शाता है कि मीरा की आँखें केवल भगवान के रूप को देखने के लिए तरसती हैं। जब वह भगवान के चरणों में शीश नवाती हैं, तो उनका यह कार्य मानवता के लिए एक प्रेरणा बन जाता है। मीरा का यह कहना कि 'बेकार वो मुख है जो व्यर्थ बातों में' यह इस बात की पुष्टि करता है कि केवल भगवान के नाम का जप या उनके गुणगान में ही जीवन की सार्थकता है। इसके बाद, मीरा के असीम प्रेम का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि 'मर के भी अमर नाम है उस जीव का जग में', जिसका तात्पर्य है कि सम्पूर्ण जीवन में जो व्यक्ति भगवान की भक्ति के लिए समर्पित रहता है, वह वास्तव में कभी नहीं मरता। यहीं यह भजन मीरा के प्रेम में मग्न होने की भावना को उजागर करता है, जो उन्हें महान बनाता है।

मीरा के इस भजन में एक अद्वितीय प्रेम का बखान किया गया है। उन्होंने सभी सांसारिक सुख-दुख को छोड़कर भगवान कृष्ण के प्रेम की खोज की है। 'ऐसी लागी लगन मीरा हो गयी मगन' यह दर्शाता है कि उनके दिल में भगवान के प्रति इतना प्रेम है कि वे हर समय उसी में खोई रहती हैं। जब मीरा हर एक गली में 'हरी गुण गाने लगी', तब यह दिखाता है कि भक्ति केवल मंदिरों और पूजा स्थलों तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसे हर जगह फैलाना चाहिए। मीरा का कहना है कि 'कोई रोके नहीं कोई टोके नहीं' यह दर्शाता है कि जब हम सच्चे मन से भगवान की भक्ति करते हैं, तब सारी बाधाएँ मिट जाती हैं और सच्चा प्रेम हमें स्वतंत्रता प्रदान करता है। यह भजन न केवल मीरा की कहानियों का वर्णन करता है, बल्कि यह हर भक्त के दिल में उसी प्रेम की भावना को भी जागृत करता है।

मीरा का यह भजन भक्ति पथ की सच्चाई दर्शाता है। यहां 'हाथ जो भगवान का पूजन किया करे' का तात्पर्य है कि सच्चे भक्त अपनी पूरी शक्ति और समर्पण के साथ भगवान की सेवा करते हैं। यहाँ हमें यह भी समझ आता है कि भक्ति केवल एक बाहरी क्रिया नहीं है बल्कि यह एक अंतरात्मा की गहराई से जुड़ी हुई भावना है। जब मीरा कहती हैं 'दुःख लाखों सहे मुख से गोविन्द कहे', तो यह दर्शाता है कि भक्ति का मार्ग आसान नहीं है, पर सच्चे प्रेम में सभी कष्ट सहने की क्षमता होती है। इसका भावार्थ है कि भक्ति के मार्ग पर कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन जब भक्त इसे पूर्ण समर्पण से करते हैं, तो उनको अनंत सुख की प्राप्ति होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

मीरा बाई की भक्ति भारतीय भारतीय संस्कृति में एक अनूठी धरोहर है, जिसे रामायण और महाभारत में भी महत्वपूर्ण स्थान मिला है। उन्हें भगवान श्री कृष्ण के प्रति अपने अपार प्रेम के लिए जाना जाता है, जो उन्हें अतिरिक्त दीवानगी में ले गया। उनके भजनों और रचनाओं को सुनकर भक्तगण आत्मिक शांति और आनन्द की अनुभूति करते हैं। हिंदी साहित्य में भी मीरा बाई की कथा को केंद्रीय स्थान मिलता है, और इसे पवित्र ग्रंथों जैसे भागवत पुराण में विस्तृत रूप से वर्णित किया गया है। मीरा बाई की भक्ति का यह भजन वास्तव में उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा है जो प्रेम और श्रद्धा के साथ भगवान के चरणों में समर्पित होना चाहते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति, आंतरिक स्फूर्ति और आत्मिक ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक होता है। इसका नियमित पाठ करने से मन के दुःख और तनाव को कम किया जा सकता है, जो व्यक्ति को संतोष और सुख की अनुभूति कराता है। भक्ति की इस भावना को साकार करना, व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति में भी सहायक होता है। इससे व्यर्थता और मोह-माया के बंधनों से मुक्ति पाने में मदद मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

मीरा के इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना अति लाभकारी रहता है। इस दौरान, भक्त को एकांत में बैठकर ध्यान लगाना चाहिए, और दीया जलाकर भगवान का स्मरण करते हुए भजन का गान करना चाहिए। समर्पण भाव से भक्ति करते हुए भक्त को अपने मन की एकाग्रता बनानी चाहिए, ताकि भजन की ऊर्जा का प्रभाव महसूस किया जा सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मीरा बाई की भक्ति का क्या महत्व है?

मीरा बाई की भक्ति भगवान कृष्ण के प्रति असीम प्रेम की प्रतीक है, जो संसारिक मोह-माया को पार करके आत्मिकता की ओर ले जाती है। उनके भजन भक्ति, प्रेम और त्याग का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

इस भजन का पाठ कब करना चाहिए?

यह भजन सुबह या शाम की पूजा के समय किया जा सकता है, जब मन एकाग्र हो और भगवान की भक्ति का भाव पूरी तरह समर्पित हो।

क्या मीरा के भजन सुनने से मानसिक शांति मिलती है?

हाँ, मीरा के भजन सुनने और पाठ करने से मन में शांति, संतोष और प्रेम की अनुभूति होती है। यह व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से भी मज़बूत बनाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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