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भक्ति रस काव्य व भजन

म्हारा सांवरिया सरकार खाटूवाले लखदातार(Mhara Sanwariya Sarkar Lyrics in Hindi) | Surendra Jangid - Bhaktilok

78 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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खाटू का लखदातार: भक्ति का अद्वितीय स्तोत्र

इस भजन में श्री श्याम के प्रति अनन्य भक्ति एवं श्रद्धा का आज्ञापन किया गया है।

म्हारा सांवरिया सरकार खाटूवाले लखदातार दाता मैं थां सु काई माँगा जबसे हैं मैंने बाबा तुमको है पाया तुमने ही मुझको बाबा गले से लगाया मैं तो हूँ तेरा कर्ज़दार कैसे उतारू सरकार दाता मैं थां सु काई माँगा मेरी ही दुनिया बाबा तुझमे कहीं है तेरे बिना मेरा कुछ भी नहीं है ये तो मेरी पहचान मेरा खाटूवाला श्याम दाता मैं थां सु काई माँगा टूटी सांसें बाबा तुमने चलाई बिगड़े हालात बाबा रास रचाई मेरे मन की सारी बात, तुमने पढ़ ली रातों रात दाता मैं थां सु काई माँगा तू मुझको प्राणो से भी प्यारा मैंने सब कुछ तुझ पर वारा सबके स्वामी लखदातार मेरे मात पिता सरकार दाता मैं थां सु काई माँगा

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन श्री श्याम के प्रति गहरी भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है। गीत की पहली पंक्ति में 'म्हारा सांवरिया सरकार खाटूवाले लखदातार' कहकर भक्त अपने आराध्य का नाम लेते हुए उनकी कृपा की कामना करता है। भक्त कहता है कि जबसे उसने बाबा की भक्ति को अपनाया है, तबसे उसका जीवन बदल गया है। गीत में यह बात स्पष्ट की गई है कि 'मेरी ही दुनिया बाबा तुझमे कहीं है', जो दर्शाती है कि भक्त अपने जीवन का आधार अपने आराध्य में पाता है। यहाँ यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि भक्त का तंत्र, अभिव्यक्ति और अटूट विश्वास उस संबंध की गहराई को दर्शाता है, जिसमें वह भक्ति के माध्यम से कृपा की याचना करता है।

भजन की दूसरी पंक्ति 'टूटी सांसें बाबा तुमने चलाई' में भक्त अपने आराध्य का आभार व्यक्त करता है और इस तथ्य को उजागर करता है कि उनकी कृपा से ही कठिनाइयों में भी सफलता प्राप्त होती है। भक्त यह भी बताता है कि 'बिगड़े हालात बाबा रास रचाई', जिसमें यह संकेत मिलता है कि भगवान संकटों से मुक्ति देते हैं। यहाँ पर भक्त की भावना, उनके प्रति निर्भरता और प्रेम भी स्पष्ट है। इस भजन में जो गहरी भावना है, वह भक्त के हृदय की गहराई से निकलती है, जहाँ दिव्य प्रेम के प्रति भक्ति की अभिव्यक्ति होती है।

यह भजन भक्ति मार्ग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस पथ में भक्ति का उत्सव मनाने और भक्ति को निहारने का एक अद्भुत आह्वान है। इसमें भक्त का ध्यान केवल आराधक और आराध्य पर होता है, जो भक्ति की मूल भावना है। भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा न केवल अध्यात्मिक विकास को प्रेरित करती है, बल्कि मानसिक शांति और आनंद की स्थिति भी प्राप्त कराती है। 'दाता मैं थां सु काई माँगा' पंक्ति से भक्त का समर्पण स्पष्ट होता है, जिसमें वह केवल भगवान से दया और कृपा की ही प्रार्थना करता है। यह भजन तुलसीदास जी की भक्ति की परंपरा को भी जीवित करता है, जहाँ श्रद्धा का आदान-प्रदान होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का धार्मिक संदर्भ भक्ति आंदोलन से जुड़ा हुआ है, जहाँ भक्तों ने ईश्वर के प्रति अभ्यार्पण का अभ्यास किया। 'खाटूवाला' कृष्ण का एक स्वरूप है, जो भक्ति पथ पर चलने वालों को सर्वाधिक प्रिय है। धार्मिक ग्रंथों में श्री कृष्ण के विभिन्न रूपों की महिमा का वर्णन मिलता है। यह भजन पुंडरीकाकर्षण से लेकर कृष्ण के लीलाओं तक, सबका रूपक प्रस्तुत करता है, जिसे भक्तों ने अपनी आध्यात्मिक यात्रा में विशेष स्थान दिया है। वास्तव में, यह भजन उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो श्री श्याम की कृपा में विश्वास रखते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित उच्चारण करने से मानसिक तनाव में कमी आती है और आध्यात्मिक स्थिति में सुधार होता है। भक्तों को यह भजन सुनकर ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है। इसे गाने से आत्मा को शांति और संतोष प्राप्त होता है, जो व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है। इस भजन के द्वारा पूरे दिन की ऊर्जा को एकत्रित किया जा सकता है, जिससे जीवन की सभी बाधाओं को पार करने में मदद मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना सर्वश्रेष्ठ होता है। पूजा स्थल पर एक दीप जलाएं, और भगवान की तस्वीर के समक्ष ध्यान मुद्रा में बैठकर श्रद्धा से इस भजन का पाठ करें। मन को एकाग्र करते हुए परमेश्वर से प्रार्थना करें और समर्पण की भावना के साथ भजन गाएं। यह भाव सर्वोत्तम परिणामों को देने में सहायक होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य भक्त की श्रद्धा और लखदातार भगवान के प्रति अटूट प्रेम को प्रकट करना है। इसमें भक्त अपनी भक्ति में लीन होकर कृपा की याचना करता है।

'खाटूवाला' का संदर्भ क्या है?

'खाटूवाला' श्री कृष्ण के उस स्वरूप को संदर्भित करता है, जो भक्तों के लिए सुरक्षा, प्रेम और स्नेह का स्रोत है। यह नाम उस स्थान से जुड़ा है जो कृष्ण का प्रमुख स्थल है।

इस भजन का पाठ करने से क्या लाभ होता है?

इस भजन का निरंतर पाठ आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ मानसिक शांति और संतोष प्रदान करता है। यह चिंता को कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक होता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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