आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२५ PM | सूर्यास्त: ०५:३९ AM
Punjabi Devi Bhajan

श्री राणी सती दादी चालीसा (Shri Rani Sati Dadi Chalisa Lyrics in Hindi) - Rani sati dadi chalisa - Bhaktilok

115 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

श्री राणी सती दादी चालीसा (Shri Rani Sati Dadi Chalisa Lyrics in Hindi) - 


॥ दोहा ॥

श्री गुरु पद पंकज नमन

दुषित भाव सुधार

राणी सती सू विमल यश

बरणौ मति अनुसार

काम क्रोध मद लोभ मै

भरम रह्यो संसार

शरण गहि करूणामई

सुख सम्पति संसार॥


॥ चौपाई ॥

नमो नमो श्री सती भवानी।

जग विख्यात सभी मन मानी ॥


नमो नमो संकट कू हरनी।

मनवांछित पूरण सब करनी ॥


नमो नमो जय जय जगदंबा।

भक्तन काज न होय विलंबा ॥


नमो नमो जय जय जगतारिणी।

सेवक जन के काज सुधारिणी ॥4


दिव्य रूप सिर चूनर सोहे ।

जगमगात कुन्डल मन मोहे ॥


मांग सिंदूर सुकाजर टीकी ।

गजमुक्ता नथ सुंदर नीकी ॥


गल वैजंती माल विराजे ।

सोलहूं साज बदन पे साजे ॥


धन्य भाग गुरसामलजी को ।

महम डोकवा जन्म सती को ॥8


तनधनदास पति वर पाये ।

आनंद मंगल होत सवाये ॥


जालीराम पुत्र वधु होके ।

वंश पवित्र किया कुल दोके ॥


पति देव रण मॉय जुझारे ।

सति रूप हो शत्रु संहारे ॥


पति संग ले सद् गती पाई ।

सुर मन हर्ष सुमन बरसाई ॥12


धन्य भाग उस राणा जी को ।

सुफल हुवा कर दरस सती का ॥


विक्रम तेरह सौ बावन कूं ।

मंगसिर बदी नौमी मंगल कूं ॥


नगर झून्झूनू प्रगटी माता ।

जग विख्यात सुमंगल दाता ॥


दूर देश के यात्री आवै ।

धुप दिप नैवैध्य चढावे ॥16


उछाङ उछाङते है आनंद से ।

पूजा तन मन धन श्रीफल से ॥


जात जङूला रात जगावे ।

बांसल गोत्री सभी मनावे ॥


पूजन पाठ पठन द्विज करते ।

वेद ध्वनि मुख से उच्चरते ॥


नाना भाँति भाँति पकवाना ।

विप्र जनो को न्यूत जिमाना ॥20


श्रद्धा भक्ति सहित हरसाते ।

सेवक मनवांछित फल पाते ॥


जय जय कार करे नर नारी ।

श्री राणी सतीजी की बलिहारी ॥


द्वार कोट नित नौबत बाजे ।

होत सिंगार साज अति साजे ॥


रत्न सिंघासन झलके नीको ।

पलपल छिनछिन ध्यान सती को ॥24


भाद्र कृष्ण मावस दिन लीला ।

भरता मेला रंग रंगीला ॥


भक्त सूजन की सकल भीङ है ।

दरशन के हित नही छीङ है ॥


अटल भुवन मे ज्योति तिहारी ।

तेज पूंज जग मग उजियारी ॥


आदि शक्ति मे मिली ज्योति है ।

देश देश मे भवन भौति है ॥28


नाना विधी से पूजा करते ।

निश दिन ध्यान तिहारो धरते ॥


कष्ट निवारिणी दुख: नासिनी ।

करूणामयी झुन्झुनू वासिनी ॥


प्रथम सती नारायणी नामा ।

द्वादश और हुई इस धामा ॥


तिहूं लोक मे कीरति छाई ।

राणी सतीजी की फिरी दुहाई ॥32


सुबह शाम आरती उतारे ।

नौबत घंटा ध्वनि टंकारे ॥


राग छत्तीसों बाजा बाजे ।

तेरहु मंड सुन्दर अति साजे ॥


त्राहि त्राहि मै शरण आपकी ।

पुरी मन की आस दास की ॥


मुझको एक भरोसो तेरो ।

आन सुधारो मैया कारज मेरो ॥36


पूजा जप तप नेम न जानू ।

निर्मल महिमा नित्य बखानू ॥


भक्तन की आपत्ति हर लिनी ।

पुत्र पौत्र सम्पत्ति वर दीनी ॥ 40


पढे चालीसा जो शतबारा ।

होय सिद्ध मन माहि विचारा ॥


टिबरिया ली शरण तिहारी।

क्षमा करो सब चूक हमारी ॥


॥ दोहा ॥

दुख आपद विपदा हरण

जन जीवन आधार ।

बिगङी बात सुधारियो

सब अपराध बिसार ॥

॥ मात श्री राणी सतीजी की जय ॥



*** Singer - Tara Devi ***




वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "श्री राणी सती दादी चालीसा (Shri Rani Sati Dadi Chalisa Lyrics in Hindi) - Rani sati dadi chalisa - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!