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वैष्णो माता आरती लिरिक्स (Vaishno Mata Aarti Lyrics in Hindi) - जय वैष्णवी माता Vaishno Devi Ki Aarti - Bhaktilok

48 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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वैष्णो माता की दिव्य आरती: प्रेम और भक्ति का स्वर

बैष्णवी माता की आरती गाने से भक्तों में आस्था और आनंद की अनुभूति होती है। अर्चना करें, मन स्थिति में लाएँ।

 वैष्णो माता आरती लिरिक्स (Vaishno Mata Aarti Lyrics in Hindi) - जय वैष्णवी मातामैया जय वैष्णवी माता ।हाथ जोड़ तेरे आगेआरती मैं गाता ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥शीश पे छत्र विराजेमूरतिया प्यारी ।गंगा बहती चरननज्योति जगे न्यारी ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारेशंकर ध्यान धरे ।सेवक चंवर डुलावतनारद नृत्य करे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥सुन्दर गुफा तुम्हारीमन को अति भावे ।बार-बार देखन कोऐ माँ मन चावे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥भवन पे झण्डे झूलेंघंटा ध्वनि बाजे ।ऊँचा पर्वत तेरामाता प्रिय लागे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥पान सुपारी ध्वजा नारियलभेंट पुष्प मेवा ।दास खड़े चरणों मेंदर्शन दो देवा ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥जो जन निश्चय करकेद्वार तेरे आवे ।उसकी इच्छा पूरणमाता हो जावे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥इतनी स्तुति निश-दिनजो नर भी गावे ।कहते सेवक ध्यानूसुख सम्पत्ति पावे ॥जय वैष्णवी मातामैया जय वैष्णवी माता ।हाथ जोड़ तेरे आगेआरती मैं गाता ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस आरती में वैष्णो माता की महिमा का वर्णन किया गया है और इसमे उनके प्रति असीम श्रद्धा प्रकट की गई है। 'हाथ जोड़ तेरे आगे आरती मैं गाता' इस पद में आरती का संकल्प और दिव्य प्रेम प्रकट होता है। माता को ज्ञान की देवी कहा गया है, जो ब्रह्मा और शिव का ध्यान आकर्षित करती है। वेदों के अध्यन का भी इस आरती में उल्लेख है, जैसी की 'ब्रह्मा वेद पढ़े नित'। यह दर्शाता है कि माता का स्थान सभी देवताओं के साथ ऊँचा है, और उन्हें आराधना की जाती है। साथ ही, माता की उपासना करते समय जो श्रद्धा भाव होता है, वह भक्ति मार्ग की सर्वोच्चता को दर्शाता है।

आरती का एक भाग यह भी कहता है कि माता की गुफा का सौंदर्य मन को भाता है और भक्त मन ही मन माता को देखने की इच्छा करता है। 'सुन्दर गुफा तुम्हारी मन को अति भावे' इस पंक्ति में दर्शाता है कि माता का तीर्थ, उनके आश्रय स्थल में भी अद्वितीयता है, जहाँ हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है। भक्त को विश्वास होता है कि जो कोई माता के दर पर सही श्रद्धा के साथ आता है, उसकी इच्छाएँ अवश्य पूर्ण होती हैं, जैसा कि 'जो जन निश्चय करके द्वार तेरे आवे' पंक्ति में कहा गया है। यह भाव प्रेम और विश्वास का अपूर्व संयोग उत्पन्न करता है।

वैष्णो माता की इस आरती में भक्तों के लिए असंख्य प्रेरणाएँ समाहित हैं। यह बताती है कि भक्ति मार्ग पर चलने से व्यक्ति को मानसिक, आध्यात्मिक, और भौतिक सुख मिलते हैं। 'कहते सेवक ध्यानू सुख सम्पत्ति पावे' के अनुसार, जब भक्त नियमित रूप से माता की स्तुति करते हैं, तो भगवान की कृपा उनके ऊपर अवश्य बरसती है। यह एक सशक्त संकेत है कि धार्मिक परंपरा का पालन करके, मन की सरलता और प्रमाणिकता से सच्चे भाव से पूजा की जानी चाहिए, जिससे आत्मिक शांति और सुख की प्राप्ति हो सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

वैष्णो माता, जो त्रिकुट पर्वत पर स्थित हैं, उनकी उपासना का विशेष महत्व है। हिन्दू धर्म में माता का स्थान सर्वोपरि है और यह आरती इस सच्चाई को और पुख्ता करती है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से माता की आरती गाता है, उसे सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है, यह बात अद्भुत मातृभक्ति को दर्शाती है। पौराणिक कथाओं में माता की उपासना के माध्यम से भक्तों को अनेक दिव्य लाभ प्राप्त होते हैं, और माता का अनुग्रह हर संकट से उबारे जाने का कार्य करता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। वैष्णो माता की आरती का नियमित पाठ मानसिक शांति, समर्पण की भावना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है और भक्त के जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य को स्थापना करता है। मानसिक तनाव का स्तर घटाने और आस्था को प्रबल बनाने में यह आरती अत्यंत प्रभावी सिद्ध होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस आरती का पाठ प्रात:काल या संध्या के समय करना अधिक लाभकारी होता है। पूजा स्थान पर स्वच्छता बनाए रखी जानी चाहिए। दीपक जलाएँ और माता को पुष्प, फल एवं नैवेद्य अर्पित करें। आरती करते समय समर्पण पूर्वक एवं ध्यानपूर्वक कृतज्ञता व्यक्त करें, ताकि अनुकम्पा प्राप्त हो सके। मन में श्रद्धा और भक्ति होनी चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

वैष्णो माता की आरती गाने का सही समय कौन सा है?

वैष्णो माता की आरती का गान प्रात:काल या संध्या के समय किया जाता है। इससे मानसिक शांति मिलती है।

क्या वैष्णो माता की आरती से सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं?

हाँ, भक्त की सच्ची श्रद्धा और समर्पण के साथ की गई आरती से माता हर तरह की इच्छाओं को पूर्ण करती हैं।

आरती करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

आरती के समय मन को शांति में रखना चाहिए, साफ-सफाई का ध्यान रखें, और माता को पुष्प एवं नैवेद्य अर्पित करें।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 27 Aug 2026

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