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Krishna Bhajan

यह तो प्रेम की बात है उधो लिरिक्स (Yah To Prem Ki Baat Hai Uddho Lyrics in Hindi) - बंदगी तेरे बस की नहीं है Krishna Bhajan - Bhaktilok

82 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रेम और भक्ति का संगम - श्री कृष्ण भजन

कृष्ण के प्रेम में भक्ति का आनंद लें, इस भजन को गाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

यह तो प्रेम की बात है उधो, यह तो प्रेम की बात है उधो, ये तेरे बस की नहीं है, जब तू करे नारायण का तुम यही सुमिरन करो, जब तू करे नारायण का तुम यही सुमिरन करो। कृष्ण की बात है उधो, यह तो प्रेम की बात है उधो, ये तेरे बस की नहीं है, जब तू करे नारायण का तुम यही सुमिरन करो। आसमान से तारे गिनूं, गिनूं हर एक तारा तिरा नाम लूँ, आसमान से तारे गिनूं, गिनूं हर एक तारा तिरा नाम लूँ। कृष्ण की बात है उधो, यह तो प्रेम की बात है उधो, ये तेरे बस की नहीं है, जब तू करे नारायण का तुम यही सुमिरन करो।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन 'यह तो प्रेम की बात है उधो' प्रेम और भक्ति के जादुई उत्कर्ष को दर्शाता है। इसमें श्री कृष्ण के प्रति असीम प्रेम एवं उनकी लीलाओं का उल्लेख है। भजन की आरंभिक पंक्तियाँ इस सत्य को उद्घाटित करती हैं कि प्रेम की पराकाष्ठा को समझना और अनुभव करना कोई साधारण बात नहीं है। 'जब तू करे नारायण का तुम यही सुमिरन करो' इस पंक्ति में नारायण की साधना के महत्व का संकेत मिलता है, यह दर्शाते हुए कि हर भक्त का सर्वोत्तम कर्म भगवान का सुमिरन करना है। यह भजन भक्ति मार्ग की सरलता को सम्मिलित करता है, जहाँ भक्त प्रेम में अपने ईश्वर की भक्ति करता है और उनके चरणों में समर्पित रहता है।

भजन में निहित मानवीय भावनाओं का गहरा अनुभव है। प्रेम की बातें करने के लिए वह कृष्ण का स्मरण करते हैं, जो भक्त की आत्मा को सहजता और आनंद से भर देता है। यहाँ प्रेम की बात का मतलब केवल भावनात्मक जुड़ाव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक एकता का भी है। जब भक्त आसमान की विभिन्नताओं को ईश्वर के नाम से जोड़ता है, तो वह एक दिव्य चेतना का अनुभव करता है। यह प्रेम-भावना हर कठिनाई, संदेह और पार्थिव बंधनों को भंग कर देती है, और भक्त को एक नया दृष्टिकोण देती है।

इस भजन का केंद्रभूत तत्व भक्ति मार्ग का अनुसरण है। भक्तिपूर्ण साधना के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति, जैसे ही कृष्ण के नाम का जाप करता है, उसके हृदय में सच्चे प्रेम की स्थिति प्रकट होती है। यह स्पष्ट किया गया है कि भक्ति व्यक्तिपरक नहीं, बल्कि ब्रह्मात्मक है; यह एक व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत अस्तित्व से बाहर निकालती है और उसे ब्रह्म में समाहित करती है। इस दृष्टिकोण से, भक्ति का यह मार्ग जीवात्मा को पूर्णता का अनुभव कराता है, जहाँ उन्हें कृष्ण का अंश होने का अनुभव होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन वेदों, पुराणों और अन्य भारतीय धार्मिक ग्रंथों में मूलभूत प्रेम की उपासना का प्रतीक है। 'कृष्ण' और 'नारायण' के संदर्भ में भक्ति का महत्व उपनिषदों में भी स्पष्ट किया गया है। प्रेम और भक्ति का गहरा संबंध जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने में हमसे सहायता करता है। इस भजन का उल्लेख हमें परमात्मा के प्रति हमारी अनन्य भक्ति की ओर ले जाता है, और यह दर्शाता है कि भक्ति का मार्ग हमारी आंतरिक सूक्ष्मता को प्रकट करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित जाप मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य, और आत्मिक संतुलन में सुधार लाता है। भक्ति की भावना को जगाने वाला यह भजन भक्त के हृदय में सकारात्मक ऊर्जा संचारित करता है, जिससे नकारात्मक विचारों का नाश होता है और मन को स्थिरता मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह और शाम करने की सलाह दी जाती है। पूजा के समय एक दीया जलाना और कृष्ण के प्रति प्रणाम करना चाहिए। बैठने की स्थिति सुखद और ध्यान की मुद्रा में होनी चाहिए, ताकि भक्त अपने मन को संकल्प और अनुराग में डुबो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन कब गाना चाहिए?

इस भजन को सुबह और शाम के समय गाने का विशेष महत्व है, जिससे भक्त को दिनभर की गतिविधियों में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

भजन में प्रेम की बातों का क्या अर्थ है?

भजन में प्रेम की बातें श्री कृष्ण के दिव्य प्रेम और सच्चे भक्त के अनुभव को दर्शाने के लिए हैं, जिसमें ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव निहित है।

भजन के लाभ क्या हैं?

इस भजन का जाप मानसिक तनाव को कम करने, आत्मिक संतुलन बनाने और भक्ति की ऊर्जा को जागृत करने में सहायक होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 20 Aug 2026

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