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Shri Shani Dev Arati

दत्ताची आरती(Dattachi Aarati in Hindi) - Bhaktilok

82 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री दत्ताचार्य: त्रिगुणात्मक आराधना का मार्ग

श्री दत्ताचार्य की आरती श्रद्धा से गाते हुए, भक्ति भाव को जागृत करें।

दत्ताची आरती(Dattachi Aarati in Hindi):- त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा ।त्रिगुणी अवतार त्रैलोक्य राणा ।नेती नेती शब्द न ये अनुमाना ॥सुरवर मुनिजन योगी समाधी न ये ध्याना ॥जय देव जय देव जय श्री गुरुद्त्ता ।आरती ओवाळिता हरली भवचिंता ॥सबाह्य अभ्यंतरी तू एक द्त्त ।अभाग्यासी कैची कळेल हि मात ॥पराही परतली तेथे कैचा हेत ।जन्ममरणाचाही पुरलासे अंत ॥दत्त येऊनिया ऊभा ठाकला ।भावे साष्टांगेसी प्रणिपात केला ॥प्रसन्न होऊनि आशीर्वाद दिधला ।जन्ममरणाचा फेरा चुकवीला ॥दत्त दत्त ऐसें लागले ध्यान ।हरपले मन झाले उन्मन ॥मी तू पणाची झाली बोळवण ।एका जनार्दनी श्रीदत्तध्यान ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस आरती में त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ति दत्त का वर्णन किया गया है। श्री दत्ताचार्य को सभी गुणों का उपासक समझा जाता है, जो सृष्टि के रक्षक हैं। 'नेती नेती' का सूत्र हमें यह याद दिलाता है कि भगवान का स्वरूप अगाध है, जिसका कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। आरती में मुनियों और योगियों की महिमा का भी जिक्र है, जो समाधि में स्थित होकर ईश्वर का ध्यान करते हैं। जब हम 'जय देव जय देव' का जाप करते हैं, तो यह प्रार्थना हमें जीवन की चिंताओं से मुक्त करती है। 'सबाह्य अभ्यंतरी तू एक द्त्त' से मर्म समझाया जाता है कि ईश्वर का स्वरूप भीतर और बाहर दोनों ओर एक है।

आरती के संवाद में 'थाकला' शब्द लोगों को यह संदेश देता है कि जब श्री दत्त हमारे सामने होते हैं, तब उनका आशीर्वाद ही हमें जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त कर सकता है। भाव से साष्टांगे प्रणिपात करने का अर्थ है कि भक्त अपने परमेश्वर के सामने झुककर अपनी भक्ति की गहराई को दर्शाता है। यह झुकाव भक्त की सच्ची श्रद्धा का प्रतीक है। ध्यान में 'हरपले मन झाले उन्मन' का भावार्थ है कि भक्त जब दत्त का ध्यान करता है, तब वह तल्लीनता में खो जाता है, इस परम प्रेम के अनुभव से उसका मन क्षणभर के लिए भी सांसारिक बाधाओं को भूल जाता है।

इस आरती में भक्ति मार्ग की गहराई को दर्शाया गया है। श्री दत्ताचार्य को त्रिगुणात्मक रूप में समझकर उनकी पूजा की जाती है। भक्त उस परम सत्य के दरवाजे पर खड़ा होता है जो जन्म मृत्यु की निरंतरता से मुक्त कराता है। 'दत्त दत्त ऐसें लागले ध्यान' इस वाक्यांश में पूजा करने का सही संतुलन और नियमितता का संदेश है। श्री दत्त का भक्ति मार्ग हमारे जीवन को शांति और सुख की ओर ले जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

दत्ताचार्य का उल्लेख अनेक पुराणों में किया गया है। उन्हें अद्वितीय ज्ञान और मोक्ष का दाता माना जाता है। उनके ध्यान में भक्त किसी भी स्थिति में शांति प्राप्त कर सकते हैं। महाभारत में भी दत्ताचार्य का संदर्भ मिलता है, जहाँ वे भक्तों को सही मार्ग दिखाते हैं। आरती के पाठ से भक्त की आत्मा में गहराई से समर्पण की भावना उत्पन्न होती है।

संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। दत्ताची आरती का पाठ मानसिक स्थिरता और आंतरिक शांति प्रदान करता है। इसे गाने से भक्त का मन शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नियमित आरती से न केवल आध्यात्मिक उन्नति होती है, बल्कि जीवन में आने वाली बुराइयों से बचाव भी होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

दत्ताची आरती का पाठ सुबह को सूर्योदय से पहले या शाम के समय करें। इसके लिए चौक पर दीप जलाना, फूलों का चढ़ावा करना और एकाग्रता के साथ बंधनमुक्त होकर ध्यान करना आवश्यक है। मन में भक्ति भाव और श्रद्धा रखते हुए इस आरती का किया गया पाठ अत्यंत फलदायक होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दत्ताची आरती का महत्व क्या है?

दत्ताची आरती भगवान दत्तात्रेय की आराधना से जुड़ी है। इसका पाठ करने से मानसिक शांति, मनोबल और भक्ति में वृद्धि होती है।

क्या दत्ताची आरती का नियमित पाठ करना आवश्यक है?

हाँ, नियमित रूप से दत्ताची आरती का पाठ करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति होती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।

दत्ताची आरती के पाठ के लिए कौन-सी सामग्री की आवश्यकता होती है?

दत्ताची आरती के लिए दीप, फूल, धूप और मीठे स्वाद का भोग अर्पित करना उचित है। साधक को भक्तिभाव से मन लगाकर पाठ करना चाहिए।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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