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भक्ति रस काव्य व भजन

माई समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा (Maai Samar Ke Laane Aayi Ho Mori Jagadamba Lyrics in Hindi) - by Rakesh Tiwari Sherawali Bhajan - Bhaktilok

83 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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जगदम्बा की महिमा: शक्ति और सांस्कृतिक एकता

इस भजन के माध्यम से देवी जगदम्बा की आराधना करें, शक्ति और सुख की प्राप्ति हो।

माई समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा माई समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा माई समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा कौन के लाने सजी माई दुर्गा कौन के लाने सजी माई दुर्गा कौन के लाने सजी माई दुर्गा कौन के संगे लाई भवानी ए भवानी हाँ भवानी समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा माई समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा महिषासुर खों सजी माई दुर्गा महिषासुर खों सजी माई दुर्गा महिषासुर खों सजी माई दुर्गा सातों बहनियां आई भवानी ए भवानी हाँ भवानी समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा माई समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा काय पे चढ के आई माई दुर्गा काय पे चढ के आई माई दुर्गा काय पे चढ के आई माई दुर्गा कितने शेर सजाये भवानी ए भवानी हाँ भवानी माई समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा माई समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा भूरा सिंघ पे चढ़ी माई दुर्गा भूरा सिंघ पे चढ़ी माई दुर्गा भूरा सिंघ पे चढ़ी माई दुर्गा कोटन सेन सजाये भवानी माई समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा माई समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा दास लक्ष्मी तोरे गुण गावें दास लक्ष्मी तोरे गुण गावें दास लक्ष्मी तोरे गुण गावे भैरव रहे अंगुराई भवानी ए भवानी हाँ भवानी माई समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा माई समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा मोरी जगदम्बा मोरी जगदम्बा मोरी जगदम्बा माई समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा माई समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय माता दुर्गा की आराधना है, जो जगदम्बा के रूप में पूजी जाती हैं। भजन की शुरुआत में 'माई समर के लाने आई हो मोरी जगदम्बा' कहा गया है, जो माँ के आगमन का प्रतीक है। इस वाक्य के माध्यम से भक्त अपने हृदय में माँ के प्रति एक आस्था प्रकट करते हैं। 'कौन के लाने सजी माई दुर्गा' की व्याख्या हमें बताती है कि माँ दुर्गा का स्वरूप और उनका आभामंडल हमें सुरक्षित रखने के लिए उपस्थित हैं। महिषासुर के साथ उनकी लड़ाई का उल्लेख भक्ति भाव से किया गया है, जो यह दर्शाता है कि देवी असुरों का नाश करती हैं और भक्तों के उत्थान के लिए सदैव तत्पर रहती हैं। यह एक प्रेमपूर्ण एवं शक्तिशाली संवेदनशीलता है, जो आत्म चिंतन के साथ अपनी आस्था को और मजबूत करती है।

यह भजन भावनात्मक एवं आध्यात्मिक उन्नति का एक साधन है। 'भूरा सिंघ पे चढ़ी माई दुर्गा' का जिक्र यह दर्शाता है कि माँ दुर्गा न केवल शक्ति की प्रतीक हैं, बल्कि वे ऊँचाई पर विराजमान हैं। यहाँ भैरव का नाम भी आता है, जो देवी के दृष्टिकोण में उनकी शक्ति की पुष्टि करता है। इस भजन में सात बहनों यानी सामूहिक शक्ति का भी संदर्भ है, जो दिखाता है कि जब हम एकजुट होते हैं, तो हम किसी भी बाधा का सामना कर सकते हैं। इस प्रकार भजन भक्ति के साथ-साथ एकता, सामर्थ्य, और आत्मबल को भी प्रेरित करता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का गहरा संदेश निहित है। देवी माता की आराधना व्यक्तित्व के आंतरिक विकास की ओर हमारा मार्गदर्शन करती है। माता दुर्गा का चरित्र हमारी आत्मा में शक्ति का संचार करता है। देवी की महिमा और भक्ति हमें सिखाती है कि जब हम अपने हृदय में प्रभु के प्रति सच्ची भक्ति रखते हैं, तो सभी कठिनाइयाँ दूर होती हैं। इस भजन का अनुसरण करने से भक्त सहजता से अपने आप को शक्ति और सकारात्मकता से भर देते हैं। यह एक साधक के लिए एक आदर्श है, जो आत्मा के कार्यों की पूजा करके ईश्वर के समीप पहुंचता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

माता दुर्गा की उपासना का आधार पुराणों में मिलता है, विशेषकर देवी भागवत और मार्कण्डेय पुराण में जहाँ माँ दुर्गा की महाकशी के उल्लेख हैं। महिषासुर मर्दिनी के रूप में उन्हें असुरों पर विजय प्राप्त करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है, और उनका नवरात्रि महोत्सव भी उनकी शक्ति का प्रतीक है। यहाँ मातृ शक्ति की उपासना होती है, जो केवल आस्था का माध्यम नहीं, बल्कि सामूहिक बुराइयों का नाश करने का भी प्रतीक है। यह भजन विशेष अवसरों पर गाया जाता है, जैसे नवरात्रि, जहाँ भक्त माँ की कृपा से शारीरिक और मानसिक बल प्राप्त करना चाहते हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का उच्चारण करते समय भक्त मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल प्राप्त करते हैं। नियमित रूप से इसका जाप करने से नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। यह भजन समर्पण और भक्ति का प्रतीक है, जो साधकों को आंतरिक शक्ति प्रदान करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह की प्रार्थना या शाम की आरती के समय किया जा सकता है। उचित समय पर दीया जलाकर और फूल चढ़ाकर देवी का स्मरण करें। शांत मन और सही मुद्रा में बैठकर भजन का पाठ करने से मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभ मिलता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन को किस अवसर पर गाना चाहिए?

यह भजन नवरात्रि सहित विशेष पूजा और अनुष्ठानों में गाया जाना चाहिए, जब श्रद्धा और भक्ति का माहौल होता है।

भजन का अर्थ क्या है?

भजन देवी जगदम्बा के विभिन्न पहलुओं की आराधना करता है, यहाँ शक्ति, सुरक्षा और आशीर्वाद की प्राप्ति का संदेश है।

इस भजन के गाने से क्या लाभ होता है?

इस भजन के उच्चारण से मानसिक स्वास्थ्य, आध्यात्मिक बल और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 18 Aug 2026

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