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मेरे सतगुरु जी तुसी मेहर करो लिरिक्स (Mere Satguru Ji Tusi Mehar Karo Lyrics in Hindi) - Sataguru Bhajan - Bhaktilok

199 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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मेरे सतगुरु जी तुसी मेहर करो लिरिक्स (Mere Satguru Ji Tusi Mehar Karo Lyrics in Hindi) - Sataguru Bhajan:-

मेरे सतगुरु जी तुसी मेहर करो लिरिक्स (Mere Satguru Ji Tusi Mehar Karo Lyrics in Hindi) - Sataguru Bhajan - Bhaktilok

मेरे सतगुरु जी तुसी मेहर करो लिरिक्स (Mere Satguru Ji Tusi Mehar Karo Lyrics in Hindi) - 


मेरे सतगुरु जी तुसी मेहर करो

मैं दर तेरे ते आई हुई या

मेरे कर्मा वल ना वेख्यो जी

मैं कर्मा तो शरमाईं हुई या

मेरे सतगुरु जी तुसी मेहर करो

मैं दर तेरे ते आई हुई या ||


जो दर तेरे ते आजांदा

ओह असल खजाने पा जांदा

मैंनू वी खाली मोड़ी ना

मैं वी दर ते आस लगाई हुई या

मेरे कर्मा वल ना वेख्यो जी

मैं कर्मा तो शरमाईं हुई या ||


तुसी तारणहार कहोंदे हो

डूबेया नु बन्ने लोंदे हो

मेरा वी वेडा पार करो

मैं वी दुःखीयरण आई हुई या

मेरे सतगुरु जी तुसी मेहर करो

मैं दर तेरे ते आई हुई या ||


सब संगी साथी छोड़ गये

सब रिश्ते नाते तोड़ गए

तू वी किदरे ठुकरावीं ना

ए सोच के मैं घबराईं हुई या

मेरे कर्मा वल ना वेख्यो जी

मैं कर्मा तो शरमाईं हुई या ||


मेरे सतगुरु जी तुसी मेहर करो

मैं दर तेरे ते आई हुई या

मेरे कर्मा वल ना वेख्यो जी

मैं कर्मा तो शरमाईं हुई या

मेरे सतगुरु जी तुसी मेहर करो

मैं दर तेरे ते आई हुई या ||


🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

शिरडी के साईं बाबा को समर्पित यह भजन "मेरे सतगुरु जी तुसी मेहर करो लिरिक्स (Mere Satguru Ji Tusi Mehar Karo Lyrics in Hindi) - Sataguru Bhajan - Bhaktilok" सबका मालिक एक होने के सिद्धांत को प्रतिपादित करता है। साईं बाबा का जीवन काल सादगी, प्रेम, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देता है। इस भजन की सरल पंक्तियां भक्त को सीधे बाबा के दिव्य आशीर्वाद और करुणा से जोड़ती हैं।

भजन का मुख्य भाव श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) का है। साईं बाबा अपने भक्तों को वचन देते हैं कि जो भी उनके द्वार पर आएगा, वह कभी खाली हाथ नहीं जाएगा। बाबा की उदी (भस्म) और उनके वचनों का स्मरण ही इस भजन का सार है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

साईं बाबा के भजनों के संकीर्तन से भक्तों के मन में धर्म-जाति के भेद से ऊपर उठकर प्राणी मात्र के प्रति प्रेम की भावना जागृत होती है। बाबा की पूजा में सादगी और शुद्ध अंतःकरण का विशेष महत्त्व है।

संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। साईं बाबा के भजन से पारिवारिक शांति प्राप्त होती है, मन के द्वेष और कलह दूर होते हैं और साधक में संतोष तथा धैर्य का विकास होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

साईं बाबा की आराधना के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से फलदायी है। साईं बाबा की मूर्ति या चित्र के सम्मुख दीप जलाकर, उदी का तिलक लगाएं और श्रद्धापूर्वक भजन गाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शिरडी साईं बाबा की उपासना के दो मुख्य स्तंभ क्या हैं?

बाबा ने अपने भक्तों को 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) को जीवन का मूल आधार बनाने की शिक्षा दी थी।

साईं भजनों के संकीर्तन के लिए कौन सा दिन उत्तम है?

गुरुवार (गुरु दिवस) का दिन साईं बाबा के पूजन, व्रत और भजन संकीर्तन के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

साईं बाबा की 'उदी' का क्या महत्त्व है?

उदी बाबा की धूनी की पवित्र भस्म है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि उदी धारण करने से शारीरिक बीमारियां और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

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