नन्द घर बजत बधईयाँ (Nand Ghar bajat Badhayi Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan - Bhaktilok
नन्द घर बजत बधईयाँ (Nand Ghar bajat Badhayi Lyrics in Hindi) -
नन्द घर बजत बधईयाँ यशोदा घर सोहर हो
ललना जन्में हैं कृष्ण कन्हैया तीनों ही कुल
तारन हो ये ललना जन्में है कृष्ण कन्हैया
तीनो ही कुल तारन हो ||
बोलवहू नगर से डगरीन नरीया कटावहुं हो
ललना ले आवहुं, सोने के कठौतिया त कान्हा
नहलावहु कन्हईया नहलावहु हो ||
ले आव बांस के सुपलवा कन्हईया निहुछावहु
हो ललना ले आवहु पियर पिताम्बर कन्हईया
पहिनावहु कान्हा पहिनावहु हो ||
ले आवहु सोने के मुकटवा त
मोर पंख लगावल हो ललना लें
आवहु पैर पयजनीयां
तो कान्हा पहिनावहु कन्हइया पहिनावाहु हो ||
कान्हा के पांव पयजनीया तो बड़ा निक लागेला
मनमा के भावेला हो ललना झूम झूम बजे
पयजनियां अजब मन मोहेला हो ||
ठुमकी ठुमकी कान्हा चललन नन्द राजा के
आँगन हो ललना विहसी विहसी मनमा मोहत
यशोदा रानी धन्य भइलन हो ||
ले आवहू सोने के सिंहासन तो कान्हां बैठावहु
कन्हइया बैठावहु हो ललना ले आवहु
सूरही गाय के दूधवा तो कान्हा के पिलावहुं
यशोदा घर बजेला बधईया सखीअ सब सोहर
गावय हो ललना नन्द लुटावत हिरा, मोतिया तो कुल
के तारन अइलन हो ||
► Singer :- Snehlata Jaiswal
► Lyrics :- Snehlata Jaiswal
► Music :- Sur samarajya Studio
► Editor :- Roshan Gupta
► DOP :- Anurodh Gupta
► Video Director :- Ashish Kumar Verma
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "नन्द घर बजत बधईयाँ (Nand Ghar bajat Badhayi Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan by Snehlata Jaiswal - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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