आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२४ PM | सूर्यास्त: ०५:४२ AM
भक्ति रस काव्य व भजन

साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ लिरिक्स (Sainath Tere Hazaro Haath Lyrics in Hindi) - Sai Nath Bhajan - Bhaktilok

83 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

साईंनाथ: अनंत कृपा और प्रेम का भजन

साईंनाथ की भक्ति में लीन होकर उनकी अनंत दया को अनुभव करें। हर हृदय को छू लेने वाला यह भजन है।

साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ लिरिक्स (Sainath Tere Hazaro Haath Lyrics in Hindi) - तू ही फकीर तू ही है राजा तू ही है साईं तू ही है बाबा साईनाथ साईनाथ साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ जिस जिस ने तेरा नाम लिया जिस जिस ने तेरा नाम लिया तू हो लिया उसके साथ साईनाथ साईनाथ साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ जिस जिस ने तेरा नाम लिया जिस जिस ने तेरा नाम लिया तू हो लिया उसके साथ साईनाथ साईनाथ साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ तेरा दर है दया का सागर सब मजहब भरते है गागर तेरा दर है है है तेरा दर है दया का सागर सब मजहब भरते है गागर पावन पारस तेरी आग तेरा पत्थर कण कण राग तेरा पत्थर कण कण राग साईनाथ साईनाथ साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ तेरा मंदिर सब का मदीन जो भी आये सीखे जीना आ आ आ आ आ आ आ तेरा मंदिर सब का मदीन जो भी आये सीखे जीना तू चाहे तो टल जाये घात तू ही भोला तू ही नाथ तू ही भोला तू ही नाथ साईनाथ साईनाथ साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ ||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में साईंनाथ के अनंत रूपों का वर्णन किया गया है। साईंनाथ को फकीर, राजा और बाबा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह दर्शाता है कि वह हर किसी को अपने प्रेम और दया से भर देते हैं। जब भक्त उनका नाम लेते हैं, तब उसे उनके साथ जोड़ दिया जाता है। यहाँ यह भी कहा गया है कि 'तेरे हज़ारों हाथ' का भावार्थ यह है कि साईंनाथ के द्वारा भक्ति और पुण्य की क्रिया को सम्पूर्ण रूप से सभी जातियों और धर्मों में फैलाया गया है। 'तेरा दर है दया का सागर' से यह स्पष्ट होता है कि उनके दर पर सभी को समानता की दृष्टि से स्वीकारा जाता है। उनकी कृपा से सभी जाति-धर्म के लोग एक अत्यंत उपयुक्त जीवन जी सकते हैं।

भजन में 'तेरा मंदिर सब का मदीना' कहकर साईंनाथ के दर को सभी का आस्था स्थल बताया गया है। यह भाव भक्तों को प्रेरित करता है कि वे वहाँ आकर प्रेम से जिएँ और एक परस्पर प्रेम भरा समाज बनाएं। साईंनाथ की उपासना में भक्तों को आत्मीयता, प्रेम और करुणा का पाठ पढ़ाया गया है। 'तू ही भोला, तू ही नाथ' का भाव बताता है कि साईंनाथ आत्मा के सच्चे नाथ हैं, जो भोलेपन से भक्तों की समस्याओं का हल कर सकते हैं। वह अपने भक्तों के साथ हमेशा हैं, चाहे स्थिति कैसी भी हो।

इस भजन की गहराइयों में भक्ति मार्ग का अद्वितीय दर्शन है। साईंनाथ की कृपा को सच्चा समझकर जो भक्त उनसे मिलते हैं, उन्हें हर दुख-दर्द से मुक्ति मिलती है। यहाँ भक्ति की सच्चाई का आह्वान है, जहां भक्त को अपने हृदय को खोलकर अपने नाथ की साक्षात्कार कराना आवश्यक है। साईंनाथ का नाम लेने से भक्तों में आत्म-विश्वास और आशा का संचार होता है। यह भजन साईंनाथ की दया, करुणा, और प्रेम को उजागर करता है, जो प्रत्येक जीव के लिए आवश्यक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

साईंनाथ की पूजा का महत्व भारतीय संस्कृति में गहरा है, और यह मान्यता है कि वे सभी जीवों के लिए संजीवनी हैं। साईंनाथ का ध्यान, भय, दुख, और असुविधाओं को कम करता है। साईं बाबा की उपासना का अभिप्राय है आत्मिक शांति, जो हमारे पौराणिक ग्रंथों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। 'साईंनाथ तेरे हज़ारों हाथ' भजन भक्तों को एकता और भाईचारे का संदेश देता है, जो कि भारतीय संस्कृति की नींव है। भक्तों को उनका नाम लेने से संजीवनी मिलती है, जो पौराणिक कथा और उपासना परंपरा में वर्णित है।

संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। इस भजन का अर्थ है आंतरिक शांति और बाहरी सौम्यता प्राप्त करना। इसके अनुशासन से मानसिक तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही, यह भावनात्मक संतुलन बनाए रखता है और भक्तों को साईंनाथ की अनंत कृपा का अनुभव कराता है। निरंतर उच्चारण से जीवन के कठिन समय में उम्मीद और साहस मिलता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सवेरे या संध्या में विशेषत: किया जाता है। पूजा स्थल को स्वच्छ रखा जाए और वहाँ दीया जलाना चाहिए। भक्तों को सच्चे मन से ध्यान केंद्रित करके इस भजन का उच्चारण करने का प्रयास करना चाहिए। इसे गाते समय मन में सकारात्मक भावनाएं रखी जानी चाहिए, जिससे कि साईंनाथ की कृपा अधिकाधिक प्राप्त हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

साईंनाथ के बारे में यह भजन क्यों गाया जाता है?

यह भजन साईंनाथ की विशाल कृपा और अनंत प्रेम का प्रतीक है, जो कि हर भक्त के जीवन में आशीर्वाद और शांति प्रदान करता है।

क्या इस भजन का नियमित पाठ करना चाहिए?

हाँ, इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक संतुलन, शांति, और साईंनाथ की कृपा प्राप्त होती है। यह भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

साईंनाथ की उपासना का सही तरीका क्या है?

साईंनाथ की उपासना में श्रद्धा और भक्ति का होना आवश्यक है। नियमित रूप से उनके भजन का गान, ध्यान और नाम जाप करना उचित है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!