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श्री नारायण स्तोत्र (Shree Narayan Stotra Lyrics in Hindi) - shri narayan stotram - Bhaktilok

85 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री नारायण स्तोत्र: करुणा और भक्ति का अनुपम स्तोत्र

इस स्तोत्र का पाठ भक्तों को श्री नारायण की अनुकंपा और करुणा से भर देता है।

 श्री नारायण स्तोत्र (Shree Narayan Stotra Lyrics in Hindi) -  नारायण नारायण जय गोविंद हरे ॥नारायण नारायण जय गोपाल हरे ॥  करुणापारावारा वरुणालयगम्भीरा ॥ घननीरदसंकाशा कृतकलिकल्मषनाशा ॥  यमुनातीरविहारा धृतकौस्तुभमणिहारा ॥पीताम्बरपरिधाना सुरकल्याणनिधाना ॥  मंजुलगुंजाभूषा मायामानुषवेषा ॥ राधाऽधरमधुरसिका रजनीकरकुलतिलका ॥  मुरलीगानविनोदा वेदस्तुतभूपादा ॥ बर्हिनिवर्हापीडा नटनाटकफणिक्रीडा ॥  वारिजभूषाभरणा राजिवरुक्मिणिरमणा ॥ जलरुहदलनिभनेत्रा जगदारम्भकसूत्रा ॥  पातकरजनीसंहर करुणालय मामुद्धर ॥ अधबकक्षयकंसारे केशव कृष्ण मुरारे ॥  हाटकनिभपीताम्बर अभयं कुरु मे मावर ॥ दशरथराजकुमारा दानवमदस्रंहारा ॥ गोवर्धनगिरिरमणा गोपीमानसहरणा ॥शरयूतीरविहारासज्जनऋषिमन्दारा ॥  विश्वामित्रमखत्रा विविधपरासुचरित्रा ॥ ध्वजवज्रांकुशपादा धरणीसुतस्रहमोदा ॥  जनकसुताप्रतिपाला जय जय संसृतिलीला ॥ दशरथवाग्घृतिभारा दण्डकवनसंचारा ॥  मुष्टिकचाणूरसंहारा मुनिमानसविहारा ॥ वालिविनिग्रहशौर्या वरसुग्रीवहितार्या ॥  मां मुरलीकर धीवर पालय पालय श्रीधर ॥ जलनिधिबन्धनधीरा रावणकण्ठविदारा ॥  ताटीमददलनाढ्या नटगुणविविधधनाढ्या ॥ गौतमपत्नीपूजन करुणाघनावलोकन ॥  स्रम्भ्रमसीताहारा साकेतपुरविहारा ॥  अचलोद्घृतिञ्चत्कर भक्तानुग्रहतत्पर ॥  नैगमगानविनोदा रक्षःसुतप्रह्लादा ॥  भारतियतिवरशंकर नामामृतमखिलान्तर ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री नारायण स्तोत्र में भगवान नारायण के विभिन्न रूपों और विशेषताओं का वर्णन किया गया है। 'नारायण नारायण जय गोविंद हरे' से गीत की शुरुआत होती है, जहाँ गोविंद और गोपाल के नामों का उल्लेख कर उनके बाल रूप और खेलों का गुणगान किया गया है। इनमें करुणा का अपार सागर, वरुणालय में निवास करने वाले, और घननीरद-संकाश स्वरूप दर्शाए गए हैं। साथ ही 'यमुनातीरविहार' के माध्यम से उनकी लीलाओं और खेलों का वर्णन, उनके सुरम्य स्थानों में परिलक्षित होता है। यह स्तोत्र हमें बताता है कि श्री नारायण न केवल एक देवता हैं, बल्कि एक सच्चे प्रेमी और सहयोगी भी हैं जो सच्चे भक्तों के लिए हर समय उपस्थित रहते हैं।

इस स्तोत्र में हर पंक्ति गहराई से भावनाओं को जगाने वाली है। 'पीताम्बरपरिधाना सुरकल्याणनिधाना' में भगवान की कृपा से भक्तों को समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। 'राधाऽधरमधुरसिका' यह राधा की मधुरता को दर्शाता है, जो भक्ति में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। इस तरह से, यह स्तोत्र भक्तों को सही मार्ग पर चलने और प्रेम के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। 'जलनिधिबन्धनधीरा' से यह स्पष्ट होता है कि भगवान भक्तों की परेशानियों को दूर करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। इस भावार्थ में भक्तों को सुरक्षित और संगठित रखने का संदेश दिया गया है।

भगवान नारायण का यह स्तोत्र भक्ति मार्ग के अमूल्य रत्नों में से एक है। इसमें न केवल भक्ति का महत्व बताया गया है, बल्कि यह भी स्पष्ट किया गया है कि सच्ची भक्ति से ही मनुष्य सभी दुःखों और कष्टों से मुक्त हो सकता है। 'दशरथराजकुमारा' में श्री राम का जिक्र होते ही राम के प्रति भक्ति की गहराई को स्थान मिलता है। भारतीय दर्शन में भक्ति को ज्ञान की ओर ले जाने वाला मार्ग माना जाता है, और इस स्तोत्र के माध्यम से हमें सीधा भक्ति का अनुभव होता है। यह भक्ति श्रद्धा और सच्चाई का प्रतीक है, और यह हमें परम आनंद की ओर ले जाने वाला साधन भी बनता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्री नारायण स्तोत्र का महत्व भारतीय धार्मिक साहित्य में बहुत अधिक है। यह स्तोत्र भागवत पुराण, रामायण और महाभारत में वर्णित नारायण के विभिन्न गुणों को उजागर करता है। यह भक्तों को भगवान के प्रति समर्पण और भक्ति की प्रेरणा देता है। इसके पाठ से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और जीवन में सुख एवं शांति का अनुभव किया जाता है। कई साधक इस स्तोत्र का नियमित पाठ करते हैं, ताकि वे अपनी आत्मा की शुद्धि कर सकें और भगवान के निकटता का अनुभव कर सकें।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। श्री नारायण स्तोत्र का जप और पाठ करने से भक्तों को मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और स्वास्थ्य लाभ होता है। यह स्तोत्र भक्तों को कठिनाईयों से उबारने और उनकी समस्याओं का समाधान करने में सहायक होता है। नियमित पाठ से आत्मविश्वास और सकारात्मकता में वृद्धि होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

श्री नारायण स्तोत्र का पाठ सुबह या संध्या समय करना सबसे बेहतर होता है। मंदिर में दीप जलाकर, पुष्प अर्पित करने से भक्ति और श्रद्धा का अनुभव होता है। उचित आसन में बैठकर ध्यान केन्द्रित कर पाठ करें, जिससे मानसिक केंद्रितता बनी रहे।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री नारायण स्तोत्र का पाठ क्यों करना चाहिए?

श्री नारायण स्तोत्र का पाठ भक्तों को मानसिक शांति, सुख और समृद्धि का अनुभव कराता है। यह साधना से जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।

क्या यह स्तोत्र सभी के लिए उपयुक्त है?

हाँ, यह स्तोत्र सभी भक्तों के लिए उपयुक्त है। कोई भी इसे श्रद्धा और भक्ति भाव से पाठ कर सकता है।

इस स्तोत्र का प्रमुख संदेश क्या है?

इस स्तोत्र का मुख्य संदेश भगवान नारायण की अनुकंपा और करुणा को व्यक्त करना है। यह भक्तों को भक्ति मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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