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भक्ति रस काव्य व भजन

तुमने लाखों की किस्मत सँवारी अब संवरने की बारी हमारी लिरिक्स (Tumne Lakho Ki Kismat Sanwari Ab Sanwarane Ki Baari Hamari Lyrics in Hindi) - Khatu Shyam Bhajan - Bhaktilok

51 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम की कृपा: भाग्य का संवरना

इस भजन में भक्तों की श्याम के प्रति अगाध श्रद्धा और विश्वास व्यक्त होता है।

तुमने लाखों की किस्मत सँवारी अब संवरने की बारी हमारी तेरी चौखट पे जो भी झुका है उसको दुनिया ने सर पे रखा है तेरे रुतबे का क्या क्या सबब दे इतनी ताकत नहीं है हमारी तुमने लाखो की किस्मत सँवारी अब संवरने की बारी हमारी। आस तेरी भरोसा तुम्ही पर है श्याम तू ही मोहन कन्हैया तू ही तो है राम दर पे आए बैगाने दीवाने बड़े भर दो झोली खड़े है भगत ये तेरे जब तलक तू सवारे ना बिगड़ी तेरे दर से ना जाए सवाली तुमने लाखो की किस्मत सँवारी अब संवरने की बारी हमारी। हम सुधरना भी चाहे कहो क्या करे तेरी मोह माया से बोल कितना लड़े हम है नर तेरे जैसे नारायण नहीं तुम अगर साथ दो होगी तेरी कहीं रज़ा तेरी में हम तो है राज़ी श्याम करना ना हमसे नाराजी तुमने लाखो की किस्मत सँवारी अब संवरने की बारी हमारी। तू जो चाहे तो बहरा भी सुनने लगे लूला लंगड़ा पहाड़ों पे चढ़ने लगे ज़िन्दगी मौत सबकुछ तेरे हाथ है तुम अगर साथ हो तो फिर क्या बात है तेरे रहमो करम पे पड़े है जाने कब होगी रहमत तुम्हारी तुमने लाखो की किस्मत सँवारी अब संवरने की बारी हमारी। तुम हो दानी तो हम है भिखारी तेरे तुम हो ठाकुर तो हम है पुजारी तेरे ‘जया’ भक्तो से क्यों इतना कतराते हो ऐसा क्या माँगा देने में घबराते हो खुदगर्जों ने अर्जी सुना दी अब कृपा की है मर्जी तुम्हारी तुमने लाखो की किस्मत सँवारी अब संवरने की बारी हमारी। तुमने लाखों की किस्मत सँवारी अब संवरने की बारी हमारी तेरी चौखट पे जो भी झुका है उसको दुनिया ने सर पे रखा है तेरे रुतबे का क्या क्या सबब दे इतनी ताकत नहीं है हमारी तुमने लाखो की किस्मत सँवारी अब संवरने की बारी हमारी ||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय श्री श्याम की कृपा और भाग्य के परिवर्तन की आशा है। पहले अंतरे में, भक्ति के माध्यम से भक्त यह स्वीकार करते हैं कि उन्होंने लाखों लोगों की किस्मत को संवारने में मदद की है और अब उनकी बारी है। यह दर्शाता है कि कैसे भगवान की शक्ति केवल भक्ति से भक्तों को स्थायी परिवर्तन प्रदान कर सकती है। भक्त का भरोसा है कि जब भी कोई व्यक्ति श्याम की चौखट पर झुकता है, तब उसे संसार में मान-सम्मान और सुरक्षा प्राप्त होती है। इस भाव में भक्ति की गहराई और भगवान की दी गई कृपा की भावना है।

दूसरे अंतरे में, भक्त श्याम के प्रति अपनी निर्भरता और विश्वास प्रकट करते हैं। यहाँ श्याम को कन्हैया, राम और मोहन के रूप में व्यक्त किया गया है, जो विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का समावेश करते हैं। भक्त यह स्वीकार करते हैं कि वे सामान्य मनुष्य हैं और उनकी हर समस्या का समाधान सिर्फ श्याम की उपस्थिति में ही संभव है। भावार्थ यह है कि जब भक्त खुद को श्याम के चरणों में समर्पित कर देते हैं, तो उनकी समस्याएँ और कठिनाइयाँ स्वयं ही समाप्त हो जाती हैं, और वे श्याम की कृपा के पात्र बनते हैं।

इस भजन में भक्ति मार्ग का सार आक्षेप किया गया है। इसमें स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि केवल भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण से ही भक्त जीवन की कठोरताओं को पार कर सकता है। भक्ति में जो शक्ति है, उसे भक्ति मार्ग के सिद्धांत के रूप में देखा जाता है। यहाँ भक्ति की तैयारी, संयम, और सेवा के तत्वों की आवश्यकता के बारे में बताया गया है, जिससे भक्त को आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। श्याम के प्रति प्रेम अद्वितीय है और उसी प्रेम के कारण भक्त जीवन के विभिन्न उतार-चढ़ाव को सहन कर पाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन श्री श्याम की विरासत और भक्तों की भक्ति को दर्शाता है। श्याम का व्यक्तित्व भारतीय पौराणिक कथाओं में विशेष स्थान रखता है, जहाँ उन्हें भाग्य देने वाले, समस्याओं का समाधान करने वाले भगवान के रूप में पूजा जाता है। पुराणों में भी यह वर्णित है कि जब श्रद्धा और विश्वास के साथ किसी से प्रार्थना की जाती है, तो भगवान की कृपा हमेशा अवश्य ही प्राप्त होती है। यह भजन उन भक्तों के लिए आदर्श है जो मुसीबतों में भगवान की मदद की तलाश कर रहे हैं और उनका ध्यान भक्ति के मार्ग पर केन्द्रित है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य, और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव होता है। भक्तों को श्याम की कृपा से जीवन की समस्याओं से मुक्ति मिलती है और उनका मनोबल उच्च रहता है। इसके साथ ही, यह भजन भावनात्मक बल प्रदान करता है, जिससे भक्त कठिनाईयों में भी स्थिर रह सकते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना श्रेष्ठ माना जाता है। पूजा स्थल को शुद्ध करें, दीप जलाएं और प्रसाद अर्पित करें। ध्यान रखें कि आपका मन भगवान में स्थित हो, और आप प्रेम और भक्ति के साथ भजन का सामर्थ्य महसूस करें। सही मुद्रा में बैठकर इस भजन का पाठ करें, और पूरी श्रद्धा के साथ अपने मन की बात भगवान तक पहुँचाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या यह भजन किसी विशेष पर्व पर गाया जाता है?

यह भजन सामान्यतः किसी भी धार्मिक अनुशासन या पर्व पर गाया जा सकता है, परंतु विशेषकर श्याम नवमी पर इसे विशेष श्रद्धा के साथ गाया जाता है।

क्या इस भजन का अर्थ केवल भक्ति है?

इस भजन का अर्थ भक्ति के साथ-साथ भगवान पर विश्वास और अपने जीवन की समस्याओं का समाधान भी है। भक्तों के लिए यह विश्वास जगाता है कि भगवान सदा उनकी सहायता हेतु तैयार है।

इस भजन का पाठ करने का सही तरीका क्या है?

इस भजन का पाठ करते समय मन को स्थिर रखें, ध्यान केंद्रित करें और श्रद्धा के साथ इसे गाएँ। शांति और प्रेम से इसे पढ़ना चाहिए ताकि इसका प्रभाव अधिकतम हो सके।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 20 Aug 2026

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