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Krishna Bhajan

यशोदा तेरे कान्हा ने बड़ा ही उद्धम मचाया है लिरिक्स (yashoda Tere kanha ne Bada Hi Uddham Machaya Hai lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan - Bhaktilok

67 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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यशोदा और कान्हा: भक्तियोग की मधुर कथा

इस भजन के माध्यम से श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करें और संपूर्ण श्रद्धा से गाएं।

यशोदा तेरे कान्हा ने बड़ा ही उद्धम मचाया है मेरे ही घर में आ करके मेरा ही माखन चुराया है यशोदा तेरे कान्हा ने ...... गई थी मथुरा के बाजार ओ मैया माखन बेचन मैतेरे ही कान्हा ने मोरी गगरिया को कंकड़ मारा है यशोदा तेरे कान्हा ने ...... गई थी यमुना के उस पार ओ मैया पनिया भरन को मैतेरे ही कान्हा ने मोरी गगरिया को कंकड़ मारा है यशोदा तेरे कान्हा ने ...... गई थी कुंज गलियन मै ओ मैया रास खेलन मै तेरे ही कान्हा ने मोरी धीरे से बैया मरोड़ी है यशोदा तेरे कान्हा ने ......

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में यशोदा माता और उनके प्रिय पुत्र कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया है। यशोदा को अपने कान्हा की शरारतों के बारे में बताते हुए, यह भजन उनसे प्रार्थना करता है कि कान्हा ने कितनी शरारतें की हैं। 'मेरे ही घर में आ करके मेरा ही माखन चुराया है' जैसी पंक्तियाँ यह दर्शाती हैं कि कान्हा कैसे अपने नटखट व्यवहार से सबका दिल जीत लेते थे, खासकर अपनी माता का। भजन में यह साफ है कि यशोदा एक सामान्य माँ हैं जो अपने पुत्र के प्रति गहरी स्नेह और चिंता रखती हैं। उनकी माता के रूप में चिंता और कान्हा की शरारतों का एक विशेष संबंध है, जो भक्ति और मातृत्व का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।

कृष्ण के खेलने और उनकी लीला के माध्यम से भक्तों में आनंद और प्रेम का संचार होता है। यशोदा की भावनाएँ इस भजन में सरल, सच्ची और गहरी हैं। उन्हें विश्वास है कि कान्हा चाहे कितनी भी शरारतें करें, उनका प्यार और भाईत्व उन्हें हमेशा देखने और स्वीकारने में सक्षम है। यमुना के पास पनिया भरने तथा मथुरा के बाजार में घूमने का उल्लेख इस बात का संकेत है कि न केवल यशोदा, बल्कि सम्पूर्ण गोकुल और मथुरा एक प्रेमपूर्ण वातावरण में बंधे हुए हैं, जहाँ भगवान श्री कृष्ण का खेलना हर एक परिवार की खुशी है। इस प्रकार यह भजन प्रेम, स्नेह और मिठास से भरे पारिवारिक जीवन का एक संदर्भ प्रस्तुत करता है।

इस भजन का एक मुख्य तत्व भक्ति मार्ग है, जहाँ भक्त प्रेम और स्नेह के साथ श्री कृष्ण की लीलाओं का अनुभव करता है। यशोदा माता की निस्वार्थ प्रेम कहानी इस प्रकार ध्यान का एक माध्यम है, जिससे हम अपने अंतर्मन की गहराइयों में जाकर स्वामी के समीप पहुँच सकते हैं। भक्ति के मार्ग में केवल कृष्ण का भक्ति भाव ही नहीं, बल्कि पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ माता यशोदा का प्रेम भी दर्शाया गया है। इस तरह से, यह भजन हमें बताता है कि भक्ति की राह में हमें निरन्तर अपने ईश्वर की लीलाओं का ध्यान करना चाहिए।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति के रामायण, महाभारत और पुराणों में वर्णित भगवान कृष्ण की लीलाओं को संजोता है। भक्तिमार्ग में यह संकेत है कि भक्ति केवल देवता की पूजा या उपासना नहीं है, बल्कि अपने हृदय से देवता के साथ स्नेह और जुड़ाव महसूस करना है। यशोदा और कृष्ण के रिश्ते को देखकर हमें यह समझने में मदद मिलती है कि भक्ति, मातृत्व, और प्रेम एक अलौकिक स्तर पर कैसे एक साथ जुड़ते हैं। इस भजन से हमें यह भी सिखने को मिलता है कि हमें ईश्वर की शरारतों को किस प्रकार स्वीकार करना चाहिए।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का पाठ करने से भक्तों के मन और मानसिक स्थिति में स्थिरता आती है। न केवल यह भजन मानसिक शांति और प्रसन्नता लाता है, बल्कि भक्ति भाव की अनुभूति भी करता है। नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से व्यक्ति ईश्वर के प्रति और अधिक स्नेह और प्रेम महसूस करता है, जो उसकी आध्यात्मिक प्रगति में सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय या शाम को करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान दीपक जलाना, फूलों की माला अर्पित करना और प्रसाद के रूप में माखन का भोग लगाना विशेष फलदायी होता है। इस भजन को गाते समय शांत मन, सकारात्मक विचारों और प्रेम भरे हृदय के साथ भगवान कृष्ण की लीलाओं पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन में यशोदा माता और कृष्ण की प्रेमपूर्ण लीलाओं का वर्णन है, जिसमें मातृत्व की भावनाएं और कृष्ण की शरारतें प्रमुख हैं।

कृष्ण के प्रति भक्ति कैसे विकसित करें?

भक्ति का अर्थ है प्रेम और ध्यान। नियमित रूप से भजन गाने से भक्तों का कृष्ण के प्रति प्यार और स्नेह बढ़ता है।

क्या इस भजन का पाठ विशेष अवसरों पर करना चाहिए?

हां, विशेष अवसरों जैसे जन्माष्टमी और अन्य त्योहारों पर इस भजन का पाठ विशेष रूप से लाभकारी होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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