आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२३ PM | सूर्यास्त: ०५:४४ AM
भक्ति रस काव्य व भजन

कर चले हम फिदा जानो तन साथियों (kar chale ham phida jaano tan saathiyon Lyrics in Hindi) - Desh Bhakti Song by Sanjay Gulati - Bhaktilok

73 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

वतन पर शौर्य की शान: कर चले हम फिदा

यह भजन मातृभूमि के प्रति त्याग और बलिदान की भावना को जागृत करता है।

कर चले हम फिदा जान-ओ-तन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों सांस थमती गई नब्ज़ जमती गई फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया कट गये सर हमारे तो कुछ ग़म नहीं सर हिमालय का हमने न झुकने दिया मरते मरते रहा बांकापन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों ज़िंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर जान देने की रुत रोज़ आती नहीं हुस्न और इश्क़ दोनों को रुसवा करे वो जवानी जो खूँ में नहाती नहीं बाँध लो अपने सर पर कफ़न साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों राह क़ुर्बानियों की न वीरान हो तुम सजाते ही रहना नये क़ाफ़िले फतह का जश्न इस जश्न के बाद है ज़िंदगी मौत से मिल रही है गले आज धरती बनी है दुल्हन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों खींच दो अपने खूँ से ज़मीं पर लकीर इस तरफ़ आने पाये न रावण कोई तोड दो हाथ अगर हाथ उठने लगे छूने पाये न सीता का दामन कोई राम भी तुम तुम्हीं लक्ष्मण साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'कर चले हम फिदा जानो तन साथियों' में शहीदों के बलिदान की भावना को व्यक्त किया गया है। गीत की प्रारंभिक पंक्तियों में यह बताया गया है कि सेनानी अपनी जान व तन की परवाह किए बिना मातृभूमि के लिए कृतसंकल्पित हैं। 'अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों' पंक्ति इस बात का संकेत देती है कि उन्होंने अपने धर्म और धरती के प्रति जो कर्तव्य निभाया, वह अब राष्ट्र के जिम्मे है। यह चेतना हमें बताती है कि सही मायने में देशभक्ति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कार्यों में प्रकट होती है। इस प्रकार के भजनों में शौर्य और बलिदान का अंतर्निहित संदेश हमें प्रेरित करता है कि हमैतिहासिक महत्त्व के क्षणों को पहचानते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें।

गायन के भावार्थ में समाज के संदर्भ में अनुशासन और सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया है। जब 'कट गए सर हमारे तो कुछ ग़म नहीं' का नारा दिया जाता है, तो यह न केवल व्यक्तिगत बलिदान का इंगित करता है, बल्कि यह दर्शाता है कि सत्य और इमानदारी के लिए लडने वाले सच्चे योद्धा किसी भी कठिनाई का सामना कर सकते हैं। 'ज़िंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर जान देने की रुत रोज़ आती नहीं' यह पंक्ति जीवन की अस्थिरता और मृत्यु के प्रति संकल्प का एहसास कराती है। ऐसे समय में जब हमारी मातृभूमि को खतरा होता है, तब हमारी कर्तव्यपरायणता ही हमारी पहचान बनती है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का गहन संदर्भ है, जो सेवा, समर्पण और बलिदान की भावना को दर्शाता है। 'राम भी तुम तुम्हीं लक्ष्मण' वाले चरण में भगवान राम और लक्ष्मण का संदर्भ देश की रक्षा में अग्रणी के रूप में किया गया है। यह हमें यह समझाने का प्रयास करता है कि जब भी हमें संकट का सामना करना पड़े, हम सभी को साथ मिलकर खड़ा होना होगा। यह भजन केवल एक कान्ति के रूप में नहीं, अपितु आत्मा की गहराई से निकलकर देश के प्रति भक्ति और समर्पण की भावना को जगाने का माध्यम है। इसे गाते समय हमें इस भावना का ध्यान रखना चाहिए कि हम अपने कर्तव्यों को निभाने में हमेशा तत्पर रहें।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का धार्मिक संदर्भ हमें भारतीय संस्कृति के वीरता और बलिदान की महिमाओं से जोड़ता है। पुराणों और महाभारत में कहा गया है कि युद्ध में यश और कीर्ति का सदा सम्मान होता है। जब हम 'कर चले हम फिदा' जैसे भजनों का पाठ करते हैं, तो यह भारतीय संस्कृति के इस गहरे दार्शनिक तत्व को प्रदर्शित करता है कि मातृभूमि की रक्षा में शहीद होना सबसे बड़ा कर्तव्य है। इस प्रकार, यह भजन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को श्रद्धांजलि देने का एक अद्भुत तरीका भी है, जो हमें उनके बलिदान को न केवल याद दिलाता है, बल्कि हमें भी उनके नक्शेकदम पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्फूर्ति प्राप्त होती है। यह मन को स्थिर करके शक्ति और साहस प्रदान करता है, जिससे व्यक्ति कठिन परस्थितियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहता है। इसके सुमधुर राग में निहित संगीत रूपी ध्वनि से आत्मा को शांति एवं बल मिलता है। यह भजन समर्पण की गहन भावना को जागृत करता है, जिससे भक्त की भक्ति में गहराई आती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सही सावे में पाठ करना चाहिए, विशेषकर सुबह-सुबह सूर्य उगने से पूर्व। इस समय वातावरण शुद्ध और संजीवनी होता है। जाप करते समय एक दीया जलाना और पुष्पों की अर्चना करना उत्तम रहता है। एक शांत आसन पर बैठकर मन को स्थिर कर भक्तिभाव में रत होकर इस भजन का उच्चारण करना चाहिए। इससे ध्यान स्थिर होता है और भावनाएं सशक्त होती हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश देशभक्ति, शूरवीरता और बलिदान पर आधारित है। यह हमें सिखाता है कि मातृभूमि की रक्षा के लिए जान देना सर्वोत्तम है।

क्या यह भजन सिर्फ वीरता को ही उजागर करता है?

नहीं, यह भजन वीरता के साथ-साथ समाज में एकता और अनुशासन की आवश्यकता पर भी बल देता है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम सभी मिलकर सही दिशा में आगे बढ़ें।

भजन गाने का सही समय क्या है?

इस भजन का जाप सुबह के समय सबसे प्रभावी रहता है, जब मन और वातावरण स्वच्छ और सकारात्मक होते हैं। इसे ध्यानपूर्वक और श्रद्धा भावना से गाना चाहिए।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!