मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
साईबाबा नमस्काराष्टक (Saibaba Namaskarashtak lyrics in Hindi) -
अनंता तुला ते कसे रे स्तवावे ।
अनंता तुला ते कसे रे नमावे ॥
अनंत मुखांचा शिणे शेष गाथा ।
नमस्कार साष्टांग श्रीसाईनाथा ॥१॥
स्मरावे मनी त्वत्पदा नित्य भावे ।
उरावे तरी भक्तिसाठी स्वभावे ॥
तरावे जगा तारुनी मायताता ।
नमस्कार साष्टांग श्री साईनाथा ॥२॥
वसे जो सदा दावया संत लीला ।
दिसे अज्ञ लोकापरी जो जनाला ॥
परी अंतरि ज्ञान कैवल्यदाता ।
नमस्कार साष्टांग श्री साईनाथा ॥३॥
बरा लाधला जन्म हां मानवाचा ।
नरा सार्थका साधनीभुत साचा ॥
धरु साईप्रेमा गळाया अहंता ।
नमस्कार साष्टांग श्री साईनाथा ॥४॥
धरावे करी सान अल्पज्ञ बाला ।
करावे आम्हा धन्य चुंबोनि घाला ॥
मुखी घाल प्रेमे खरा ग्रास आता ।
नमस्कार साष्टांग श्री साईनाथा ॥५॥
सुरादिक ज्यांच्या पदा वंदिताति ।
सुरादिक ज्यांचे समानत्व देती ॥
प्रयगादि तीर्थेपदि नम्र होता ।
नमस्कार साष्टांग श्री साईनाथा ॥६॥
तुझ्या ज्या पदा पाहता गोपबाली ।
सदा रंगली चित्स्वरुपि मिळाली ॥
करी रासक्रीड़ा सवे कृष्णनाथा ।
नमस्कार साष्टांग श्री साईनाथा ॥७॥
तुला मागतो मागणे एक द्यावे ।
करा जोडितो दिन अत्यंत भावे ॥
भवि मोहनीराज हा तारी आता ।
नमस्कार साष्टांग श्री साईनाथा ॥८॥
*** Singer - Lata Mangeshkar ***
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
शिरडी के साईं बाबा को समर्पित यह भजन "साईबाबा नमस्काराष्टक (Saibaba Namaskarashtak lyrics in Hindi) - Ananta Tula अनंता तुला ते कसे रे स्तवावे - Bhaktilok" सबका मालिक एक होने के सिद्धांत को प्रतिपादित करता है। साईं बाबा का जीवन काल सादगी, प्रेम, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देता है। इस भजन की सरल पंक्तियां भक्त को सीधे बाबा के दिव्य आशीर्वाद और करुणा से जोड़ती हैं।
भजन का मुख्य भाव श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) का है। साईं बाबा अपने भक्तों को वचन देते हैं कि जो भी उनके द्वार पर आएगा, वह कभी खाली हाथ नहीं जाएगा। बाबा की उदी (भस्म) और उनके वचनों का स्मरण ही इस भजन का सार है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
साईं बाबा के भजनों के संकीर्तन से भक्तों के मन में धर्म-जाति के भेद से ऊपर उठकर प्राणी मात्र के प्रति प्रेम की भावना जागृत होती है। बाबा की पूजा में सादगी और शुद्ध अंतःकरण का विशेष महत्त्व है।
संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। साईं बाबा के भजन से पारिवारिक शांति प्राप्त होती है, मन के द्वेष और कलह दूर होते हैं और साधक में संतोष तथा धैर्य का विकास होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
साईं बाबा की आराधना के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से फलदायी है। साईं बाबा की मूर्ति या चित्र के सम्मुख दीप जलाकर, उदी का तिलक लगाएं और श्रद्धापूर्वक भजन गाएं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
शिरडी साईं बाबा की उपासना के दो मुख्य स्तंभ क्या हैं?
बाबा ने अपने भक्तों को 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) को जीवन का मूल आधार बनाने की शिक्षा दी थी।
साईं भजनों के संकीर्तन के लिए कौन सा दिन उत्तम है?
गुरुवार (गुरु दिवस) का दिन साईं बाबा के पूजन, व्रत और भजन संकीर्तन के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
साईं बाबा की 'उदी' का क्या महत्त्व है?
उदी बाबा की धूनी की पवित्र भस्म है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि उदी धारण करने से शारीरिक बीमारियां और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।
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