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भक्ति रस काव्य व भजन

जीते जी तो कदर ना जानी अब क्यों श्राद्ध मनावे (Ab Kyun Shraad Manave Lyrics in Hindi) - by Sunil Sarvottam Shyam Bhajan - Bhaktilok

68 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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जीते जी की कदर: श्राद्ध का संदेश

जीते जी की अहमियत को समझाते हुए यह भजन जीवन जीने की सच्ची विधि सिखाता है।

जीते जी तो कदर ना जानी अब क्यों श्राद्ध मनावे ना पूछी हमें रोटी पानी अब पकवान खिलावे, काहे श्राद्ध मनावे जीते जी तो कदर ना जानी..........जब बीमार पड़े हम तूने डाल दिए चारपाई पे काहू ने भी सुध ना ली तेरे बालक और लुगाई ने कभी ना बैठे पास हमारे अब क्यों नीर बहावे, अब क्यों नीर बहावे जीते जी तो कदर ना जानी..........कभी तू हमको चिड़िया माने कभी तू माने कौवा कभी तू हमको चींटी माने कभी तू माने गैया इंसानो की सेवा ना की अब क्यों करे दिखावे, अब क्यों करे दिखावे जीते जी तो कदर ना जानी..........बात पते की सुनले बेटा कह गए गुणी ग्यानी जैसे करम करोगे वैसी बीते ज़िंदगानी पेड़ बबूल का बोयेगा जो आम कहाँ से पावे, आम कहाँ से पावे जीते जी तो कदर ना जानी..........

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'जीते जी तो कदर ना जानी अब क्यों श्राद्ध मनावे' का मुख्य विषय मनुष्य के जीवन में जिए गए समय की कद्र करना है। भजन के पहले बोल में यह स्पष्ट किया गया है कि जब व्यक्ति जीवित होता है, तब उसकी कोई कद्र नहीं करता। जैसे कि, "जीते जी तो कदर ना जानी", यह पंक्ति यह दर्शाती है कि जब इंसान जीवन में होता है, तब उसके प्रति कोई मानवीय संवेदना या आदर नहीं होता। जब कठिनाई में होता है, तब भी परिवार के सदस्य उसकी सुध नहीं लेते। यह भजन श्राद्ध की प्रथा पर सवाल उठाता है, जो मृतक के लिए किये जाने वाले अर्पणों पर निर्भर करता है, जबकि जीवित व्यक्ति की कद्र नहीं की जाती। इससे यह संदेश मिलता है कि जिए हुए व्यक्तियों का सम्मान जीवन में सबसे पहले होना चाहिए।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन जीवन की एक महत्वपूर्ण सच्चाई को प्रदर्शित करता है कि हमें अपने प्रियजनों की अहमियत को पहचानना चाहिए। जब किसी का स्वास्थ्य कमजोर होता है या जब वह संकट में होता है, तब हमारे पास पहुंचने की आवश्यकता होती है। भजन में यह कहा गया है कि "कभी तू हमको चिड़िया माने कभी तू माने कौवा", यह उस बदलते दृष्टिकोण को दिखाता है जिससे हम जीवों को पहचानते हैं। हमें इंसानों की सेवा करने पर जोर देना चाहिए, बजाय इसके कि केवल श्राद्ध के समय लगाव दिखाएँ। इसका भावार्थ जीवन में प्रेम और संवेदनशीलता का होना आवश्यक बनाता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का एक महत्वपूर्ण तत्व दिखाया गया है, जिसमें यह बताया गया है कि जैसे कर्म करेंगे, वैसी ही जिंदगी बिताएंगे। 'जैसे करम करोगे वैसी बीते ज़िंदगानी' यह एक गहरा अर्थ रखता है कि हमारी वर्तमान क्रियाएं हमारी भविष्य की अनुभूतियों का निर्माण करती हैं। यह भक्ति मार्ग का यह तत्व हमें सिखाता है कि हमें अपने जीवन को सही निर्णयों और विचारों से संवारना चाहिए। केवल प्रतीकों और दिखावों में रहकर श्रद्धा दिखाना व्यर्थ है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भारतीय संस्कृति में श्राद्ध की प्रथा का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है; यह पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए किया जाता है। पौराणिक ग्रंथों में, जैसे कि रामायण और महाभारत में, श्राद्ध का उल्लेख किया गया है, जहां यह कहा गया है कि मृतक की आत्मा शांति अनुभूत करती है, और परिवार के सदस्यों को सच्चे श्रद्धा पूर्वक अर्पित श्रद्धांजलि देने की आवश्यकता होती है। हालांकि, भजन 'जीते जी तो कदर ना जानी' इस संदर्भ में एक नई दृष्टि प्रस्तुत करता है, जिससे दर्शक को अपने जीवन में दूसरों की गरिमा और मान्यता को समझने की प्रेरणा मिलती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, आत्मिक स्फूर्ति और सामाजिक संबंधों में सुधार होता है। इसका गुनगुनाना सुनने वाले को प्रेम और सहानुभूति की भावना को जगाता है और उन रिश्तों को मजबूत बनाता है, जिनमें शायद कमी हो। इसके अतिरिक्त, यह भजन हमें आत्म-प्रेरणा देता है कि हमें अपने जीवन में सकारात्मकता और प्रेम को व्यक्त करने की आवश्यकता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सूर्योदय के समय या संध्या वेला में करना श्रेष्ठ होता है। इस दौरान ध्यान लगाने के लिए एक शुद्ध स्थान का चयन करें। सिर के ऊपर एक दीपक जलाएं और मन में श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ भजन का गायन करें। इसे सुनकर श्रद्धा से मन में भावनाएं उत्पन्न करें, जिससे भजन की गहराई का अनुभव करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि हमें जीवित व्यक्ति की कद्र करनी चाहिए और श्राद्ध के समय केवल मौखिक श्रद्धांजलि नहीं, अपितु उनके साथ वास्तविक संबंध होना चाहिए।

क्या इस भजन को नियमित रूप से गाना चाहिए?

हाँ, इस भजन का नियमित गुणगान करना चाहिए, क्योंकि यह आत्मा को शांति और जीवन में सकारात्मकता लाता है। यह रिश्तों को मजबूत करता है।

क्या इस भजन के धार्मिक महत्व है?

इस भजन का धार्मिक महत्व है क्योंकि यह श्राद्ध की प्रथा पर सवाल उठाता है और हमें बताता है कि हमें जीवित व्यक्ति की कद्र करनी चाहिए, जो सच्चा धार्मिक आचरण है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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