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भक्ति रस काव्य व भजन

जा रहे हो तो जाओ ब्रिज छोड़ कर (Jaa Rahe Ho To Jao Braj Chod Kar Lyrics in Hindi) - by Sona Jadhav Shyam Bhajan - Bhaktilok

157 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कन्हैया प्रेम में बहे भक्तों का संगम

इस भजन के माध्यम से हमें श्री कन्हैया के अपार प्रेम का अनुभव होता है।

जा रहे हो तो जाओ ब्रिज छोड़ कर सबका दिल तोड़ कर प्रेम ब्रिज सा कन्हैया नहीं पाओ गे छोड़ कर सबका दिल तोड़ कर..... ये लताये कदम की ये ढ़ालियाँ तेरे बचपन की साथी सांवरियां कुञ्ज गलियां कहानी तेरी गा रही ऐसी गलियाँ कन्हियाँ नहीं पाओ गे जा रहे हो तो जाओ ब्रिज छोड़ कर सबका दिल तोड़ कर..... ले ग्वालो को घर में आना तेरा घर के छीके से माखन चुराना तेरा स्वाद माखन का जैसा ब्रिज में मिला स्वाद ऐसा कन्हियाँ नहीं पाओ गए जा रहे हो तो जाओ ब्रिज छोड़ कर सबका दिल तोड़ कर..... कितनी पौड़ी गगरिया पनघट पर चीर किसके बचे श्याम प्यारे कहो तेरे उधमों को जिसने हस के सहा ऐसे प्रेमी कन्हैया नहीं पाओ गे जा रहे हो तो जाओ ब्रिज छोड़ कर सबका दिल तोड़ कर..... प्रेम कर के दीवाना बना के हमे छोड़ जाते है किसके सहारे कहो नंदू मुरली के जैसे दीवाने हुए ऐसे पागल कन्हैया नहीं पाओ गए जा रहे हो तो जाओ ब्रिज छोड़ कर सबका दिल तोड़ कर.....

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में कन्हैया के प्रति प्रेम और उनकी अद्वितीय व्यक्तित्व की चर्चा की गई है। 'जा रहे हो तो जाओ ब्रिज छोड़ कर सबका दिल तोड़ कर' की पंक्ति हमें यह समझाती है कि जो व्यक्ति ब्रज छोड़कर जा रहा है, वह कन्हैया के प्रेम से दूर जा रहा है। कन्हैया की उपासना में एक गहरा भाव है, जहां भक्त को उनके साथ बिताए गए अंशों की याद आती है। 'ये लताये कदम की ये ढ़ालियाँ' कन्हैया के बचपन और उनकी शरारतों को दर्शाती हैं, जो ब्रज में एक अद्वितीय प्रेम का स्थायित्व बनाती हैं। यहाँ कबीरदास की स्थिति को भी स्पष्ट किया गया है। इस भजन का उद्देश्य भक्त को उनके प्रेम का अनुभव कराना है, जो उनकी लीलाओं के रूप में प्रकट होता है।

भजन के भावार्थ में हमें कन्हैया के प्रति भक्ति और प्रेम की गहराई का अनुभव होता है। यह दर्शाता है कि कृष्ण केवल एक भगवान नहीं हैं, बल्कि एक सखा और प्रेमी हैं। उनके बिना, जीवन में कोई सच्चा सुख नहीं है। 'घर के छीके से माखन चुराना' हमें कन्हैया की बाल लीलाओं की ओर ले जाता है, जिसमें उनकी अदाओं और शरारतों का जादू छिपा हुआ है। भक्त के मन में उनके प्रति एक अनन्य प्रेम की भावना भर देते हैं, जहां वह उनके बिना किसी भी प्रकार की तृप्ति नहीं पाते। 'प्रेम कर के दीवाना बना के' का भाव हमें इस बात की साक्षी कराता है कि कन्हैया का प्रेम लोगों को पागल बना देता है।

भक्ति मार्ग की एक गहरी भावना इस भजन में छिपी हुई है। भक्तिमार्ग का मुख्य आधार प्रेम है, जहाँ भक्त कृष्ण के प्रति अपार प्रेम प्रकट करते हैं। भजन में यह स्पष्ट है कि ब्रज का माटी और वहां की गलियों में बसी लीलाएँ भक्त को एक अद्वितीय अनुभव देती हैं। 'ऐसे पागल कन्हैया नहीं पाओ गए' की पंक्ति हमें यह सिखाती है कि केवल भक्ति से ही हम उस प्रेम को प्राप्त कर सकते हैं। यह भजन हमें आंतरिक शांति, प्रेम, और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व वैष्णव पंथ में अत्यधिक है, जहाँ कृष्ण की प्रेम लीला का वर्णन किया गया है। ब्रज भूमि का संबंध श्रीमद्भागवत, महाभारत और पुराणों से है, जहाँ कृष्ण की लीलाएँ और उनके प्रति प्रेम पर जोर दिया गया है। इस भजन में प्रेम के उस स्वरूप का चित्रण होता है, जिसे भक्ति साहित्यों में वर्णित किया गया है। यह भजन भक्तों को याद दिलाता है कि जीवन में सच्चा सुख केवल कृष्ण के प्रेम में ही है, ब्रज की लीलाओं में ही है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मन को शांति मिलती है, मानसिक तनाव कम होता है और दिल में प्रेम की भावना बढ़ती है। यह भजन भक्तों को आंतरिक सच्चाई से जुड़ने, अपने जीवन में सकारात्मकता लाने में मदद करता है। नियमित रूप से इस भजन का उच्चारण करने से आध्यात्मिक प्रगति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम को करना सबसे उत्तम होता है। विशेषकर राधा कृष्ण की पूजा के समय दीप जलाकर, माला फेरते हुए उच्चारण किये जाते हैं। इस समय भक्तों को मन को शुद्ध कर, ध्यान लगाते हुए कन्हैया के प्रति अपने प्रेम को प्रकट करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन का कोई विशेष इतिहास है?

हाँ, यह भजन भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं से प्रेरित है और इसके माध्यम से उनके प्रति असीम प्रेम दर्शाया गया है।

भजन का पाठ कब करें?

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय किया जा सकता है। यह समय ध्यान और साधना के लिए सर्वोत्तम होता है।

इस भजन का मानसिक लाभ क्या है?

इस भजन का पाठ करते समय मन को शांति और सकारात्मकता मिलती है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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