मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
मैं वृन्दावन नचदी फिरां (Main Vrindavan nachdi phiran Lyrics in Hindi) -
मैं वृन्दावन में नाचूंगी
प्यार से, प्यार से, प्यार से,
प्यार से, झांझ पैर,
मैंने वृन्दावन में नृत्य किया
हो, नचदी फिरन*, मैं हूं टप्पदी फिरन ॥
हो पा पा, प्रेम वली, झंझर पेरेई.......
प्रेम वलि झांझर, टूटे कभी न ल
श्याम, पिया मेरा, रूसे कड़ी ना ॥
हो कड़ी रूस, हो कड़ी रूस,
हो कड़ी रूसे, और मैं जश्न मनाऊंगा,
मैं वृन्दावन में नाचता हूँ,
आखिर प्रेम वाली.........
राधा जी है प्रेम का सागर l
श्याम, सुन्दर मेरे, नटवर नागर ll
एहानान, दोनों मैं से, हो एहानान, दोनों मैं से,
इन दोनों से मैं, बारी-बारी से, जाता हूँ,
मैं वृन्दावन में नाचता हूँ,
आखिर प्रेम वाली…….
अहा, वृन्दावन, प्रेम की नगरी
यहाँ प्रेम की गंगा बहती है॥
मुझ पर, मुझ पर, मुझ पर,
मैं एक गहरा गोता लगाने जा रहा हूँ।
मैं वृन्दावन में नाचता हूँ,
आखिर प्रेम वाली…….
पैर, घुंघरू में, हाथ खड़े एल
नाचो नाचो सब, पुता धमालन ॥
मैं भी हीरो की तरह, मैं भी हीरो की तरह,
मैं भी वीरों की भाँति गिड़गिड़ाऊँगा
मैं वृन्दावन में नाचता हूँ,
आखिर प्रेम वाली....... .
*** Singer:Didi aarti sharma ji ***
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "मैं वृन्दावन नचदी फिरां (Main Vrindavan nachdi phiran Lyrics in Hindi) - by aarti sharma ji Krishna Bhajan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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