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भक्ति रस काव्य व भजन

सिर पर मेरे है सदा मात पिता का हाथ (Sir par mere hai sda maat pita ka haath Lyrics in Hindi) - Rakesh Kala Mata Pita Bhajan - Bhaktilok

91 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माता-पिता का आशीर्वाद: भक्ति का मधुर स्वर

यह भजन मात-पिता के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख-शांति प्राप्त होती है।

सिर पर मेरे है सदा मात पिता का हाथ मैं खुश किस्मत हु कितना माँ बाप है मेरे साथ, सिर पर मेरे है सदा मात पिता का हाथ, मैं खुश किस्मत हु कितना माँ बाप है मेरे साथ, मंदिर मंदिर जा कर के भगवान से और मैं क्या मांगू, यही मात पिता मिले जन्म जन्म भगवान से बस मैं ये मांगू, यही करते रहे जीवन में मेरे किरपा की बरसात, सिर पर है मेरे सदा मात पिता का हाथ, कोठी बंगला घोडा गाड़ी सोना चांदी मिल जायगे, चाहे खर्च करो सारी दौलत माँ बाप न मिलने पाएंगे, मैं मात पिता की सेवा करता जाओ दिन रात, सिर पर है मेरे सदा मात पिता का हाथ, ऊँगली पकड़ के मेरी तो मुझको चलना सिखलाया है, मेरे मात पिता ने जीवन का हर भेद मुझे बतलाया है, सिर पर है मेरे सदा मात पिता का हाथ, किया जीवन में उज्याला, काटी दुखो की रात, सिर पर है मेरे सदा मात पिता का हाथ

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में मात-पिता के प्रति अपार श्रद्धा और सम्मान दर्शाया गया है। पहले दो पंक्तियों में गायक अपनी खुशकिस्मती को अभिव्यक्त करता है कि उसके सिर पर सदा मात-पिता का हाथ है। यह स्थायी समर्थन जीवन के हर संघर्ष और चुनौती का सामना करने में मदद करता है। अगर गायक विभिन्न साम्राज्य और धन का वर्णन भी करता है, तो वह सच्चे सुख और संतोष के लिए मात-पिता की उपस्थिति को प्राथमिकता देता है। गायक यह समझता है कि मंदिर जाकर भगवान से जो भी मांगा जाए, वह मात-पिता की तरह ही सर्वोत्तम आशीर्वाद है। भक्ति का यह प्रतिपादन हमें यह सिखाता है कि भक्ति मार्ग में परिवार का महत्त्व और उनके प्रति कृतज्ञता को कितना आवश्यक माना जाता है।

इस भजन का भावार्थ रूप भी अत्यंत गहरा है। मात-पिता का हाथ न केवल शारीरिक सुरक्षा देता है, बल्कि यह मानसिक और भावनात्मक मजबूती भी प्रदान करता है। जब गायक कहता है कि मात-पिता ने उसे चलने की सिखाया, तब यह एक संकेत है कि माता-पिता के मार्गदर्शन से ही व्यक्ति जीवन के विभिन्न चरणों में आगे बढ़ता है। उनके आशीर्वाद के बिना, भले ही भौतिक संसाधनों की कोई कमी नहीं हो, सच्ची खुशी और संतोष नहीं मिल सकता। इस प्रकार, यह भजन समर्पण, प्रेम, और कृतज्ञता का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की गहरी समझ भी निहित है। सच्चा भक्ति मार्ग केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने माता-पिता और सगे-सम्बंधियों के प्रति श्रद्धा और सेवा भी अनिवार्य है। यह भजन यह दर्शाता है कि अभिभावक क्या होते हैं और उनकी भक्ति का महत्व कितना होता है। भगवान की कृपा और माता-पिता का आशीर्वाद जब संगठित होता है, तब व्यक्ति को जीवन में किसी भी परिस्थिति का सामना करने की शक्ति मिलती है। इस प्रकार, गायक भक्ति का एक आला आदर्श प्रस्तुत करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भारतीय संस्कृति में माता-पिता को अत्यधिक महत्त्व दिया गया है, और इसके कई संदर्भों में धार्मिक ग्रंथों से प्रमाणित किया जा सकता है। जैसे कि पवित्र ग्रंथों में कहा गया है कि माता-पिता के चरणों में स्वर्ग है। रामायण में सीता माता और राम की माता का चरित्र इस बात का प्रमाण है कि माता-पिता का महत्व कितना गहरा होता है। इस भजन में भी पिता-माता के प्रति उस दिव्य प्रेम का चित्रण किया गया है जो अनंत काल तक चलता है। इसके माध्यम से हम यह भी समझ सकते हैं कि मातृ- paternal प्रेम का स्थान केवल आध्यात्मिक संबोधन में ही नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक संरचना में भी कितना अटूट है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का उच्चारण करने से मानसिक शांति, आत्मबल और भावनात्मक स्थिरता प्राप्त होती है। माता-पिता के प्रति श्रद्धा रखने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे चित्त और मस्तिष्क में स्पष्टता आती है। इस भजन का नियमित गायन करने से भक्त की भक्ति में गहराई आती है और उसके जीवन में समृद्धि की रेखाएँ खींची जाती हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का उच्चारण सुबह की आरंभ या शाम को सूर्यास्त के समय किया जा सकता है। उचित वातावरण सृजन करने के लिए, एक दीया जलाना और कुछ फूलों या चिरंजीवनी का चढ़ावा देना अच्छा होता है। भक्त को ध्यानपूर्वक बैठना चाहिए और भावुकता के साथ माता-पिता के प्रति प्रेम और सम्मान का ध्यान करना चाहिए। ध्यान लगाते समय सकारात्मक भावनाएं व्यक्त करनी चाहिए ताकि दिल की गहराइयों से प्रार्थना की जा सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश माता-पिता का आशीर्वाद और उनका साथ है, जो जीवन की कठिनाइयों में सहायता करता है। यह भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।

क्या इस भजन का अवलोकन कब और कैसे करना चाहिए?

इस भजन का अवलोकन सुबह या शाम को करना चाहिए। ध्यानपूर्वक बैठकर एक दीया जलाकर माता-पिता की तस्वीर को देखते हुए भजन का गान करना उचित है।

क्या यह भजन स्वयं के लिए श्रद्धा और समर्पण को बढ़ावा देता है?

हाँ, यह भजन माता-पिता के प्रति प्रेम और श्रद्धा को उत्प्रेरित करता है, जो अपने समाज और परिवार के प्रति सम्मान की भावना भी विकसित करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 21 Aug 2026

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