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Krishna Bhajan

तेरे तो नैन कजरारे बावला हमको कर डाला (Tere To Nain Kajrare Lyrics in Hindi) - Bawla Mann Krishna Bhajan - Bhaktilok

78 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कृष्ण की छवि: नैन कजरारे की कहानियाँ

इस भजन के माध्यम से श्री कृष्ण के कजरारे नैनों की दिव्यता का अनुभव करें और आंतरिक शांति प्राप्त करें।

तेरे तो नैन कजरारे बावला हमको कर डाला मोर का पंख माथे पर गजब तूने और कर डाला तेरे तो नैन कजरारे..........मुस्कान प्यारी सी जो देखी, देखती रह गई अधर पे मुरली की वो तान छेड़ कर जादू कर डाला तेरे तो नैन कजरारे..........तू छलता तिरछी चितवन से ये चितवन दिल में समाई है ओ दिल भी क्या कहे प्यारे सांवले रुप का मारा तेरे तो नैन कजरारे..........बांकी अदा प्यारी बांकी चाल मतवारी खड़े बांके मेरे बांके बिहारी गले में बांकी ही माला तेरे तो नैन कजरारे..........श्री हरीदास के स्वामी बावला छोड़ सब आया कृपा करो मो को अपनाओ सुनलो नन्द के लाला तेरे तो नैन कजरारे..........

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के केंद्र में भगवान श्री कृष्ण का आकर्षक स्वरूप है, विशेष रूप से उनके 'कजरारे नैन' जो भक्ति और प्रेम के प्रतीक हैं। भजन की पहली पंक्ति में यह व्यक्त किया गया है कि कैसे श्री कृष्ण की दृष्टि भक्तों को अपने जादू से सम्मोहित कर देती है। 'तेरे तो नैन कजरारे' उन आंखों का वर्णन करती हैं जो मोहकता और प्रेम से भरी हुई हैं। इस भजन में, 'मोर का पंख माथे पर' से यह संकेत मिलता है कि श्री कृष्ण का रूपिण्य और भव्यता उनके ब्रज में बसी हरियाली और जीवों जैसे है। यहाँ न केवल राधा का प्रेम दर्शाया गया है, बल्कि कृष्ण के प्रति भक्तों की अनन्य भक्ति को भी प्रतिबिंबित किया गया है।

इस भजन का भावार्थ गहरा है। इसमें भक्ति की उस गहराई को दर्शाया गया है जो एक भक्त को अपने इष्टदेव के प्रति महसूस होती है। 'तू छलता तिरछी चितवन से' से संकेत मिलता है कि भगवान कृष्ण की अदाएं और मुस्कान कितनी अद्भुत हैं। भक्त की मनोदशा को भजन में सुंदरता से व्यक्त किया गया है, जब वह कृष्ण की छवि में खो जाता है। यह भावनात्मक लगाव न केवल कृष्ण के प्रति विश्वास को निरूपित करता है बल्कि भक्त का आत्मसमर्पण भी दर्शाता है। इस प्रकार, भक्त की अनुपम भक्ति मोक्ष की ओर ले जाने वाली है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की सुंदरता दिखाई गई है, जहां भक्त अपनी इच्छाओं को भगवान के चरणों में अर्पित करता है। 'श्री हरीदास के स्वामी' का उल्लेख इस बात को दर्शाता है कि भक्ति एक गुरु के मार्गदर्शन में ही संपूर्ण होती है। भक्ति में एकता, समर्पण और भक्ति का आवश्यक तत्व होता है। यह भजन दर्शाता है कि किस प्रकार भक्त अपने जीवन की कठिनाइयों को तत्क्षण भक्ति के माध्यम से पार कर सकता है। इस भजन के माध्यम से भक्ति का श्रेष्ठता और भगवान का अनुग्रह प्राप्त करने की बात की गई है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भगवान कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और भक्ति का प्रतीक है, जिसमें भक्त का समर्पण और उनके प्रति सहज प्रेम को दर्शाया गया है। उपनिषदों में भगवान कृष्ण को साक्षात् प्रेम, शांति और आनंद का स्रोत माना गया है। यह भजन भक्त को भक्ति की ओर प्रेरित करता है और उनके हृदय में भगवान के प्रति प्रेम जगाता है। इससे भक्त अपने जीवन में सकारात्मकता लाते हैं और अपनी आत्मा को शुद्ध करने में समर्थ होते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जप करने से मानसिक शांति, आत्म-संयम और भक्ति का अनुभव होता है। इसके साथ-साथ यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और भक्त को सकारात्मक विचारों से भरता है। इसे सुनने या गाने से मन की अशांतियों को दूर किया जा सकता है और एक स्थिर चित्त की प्राप्ति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप प्रात: काल या संध्या समय में करना सबसे उपयुक्त होता है। पूजा स्थल पर दीपक जलाकर और पुष्प अर्पित करके इस भजन का संगीतमय जप करें। भजन के दौरान ध्यान केंद्रित करने के लिए वज्रासन में बैठें या सुखासन में। मन को शांत करें और भगवान कृष्ण की छवि का स्मरण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन 'तेरे तो नैन कजरारे' का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश श्री कृष्ण की मोहक दृष्टि और उनके प्रति भक्त का असीम प्रेम है। इसमें भक्त की भावनाएँ व्यक्त की गई हैं, जो कृष्ण के प्रति समर्पित हैं।

कृष्ण की कौन सी विशेषता इस भजन में वर्णित की गई है?

इस भजन में श्री कृष्ण की 'कजरारे नैन' और उनकी सजीव मुस्कान का जिक्र है, जो उनके जादुई आकर्षण को दर्शाता है। इसे भक्तों द्वारा गाया जाता है जब वे कृष्ण के प्रति अपनी गहरी भक्ति व्यक्त करना चाहते हैं।

भजन के नियमित जप का क्या महत्व है?

भजन का नियमित जप मानसिक शांति, दिव्य प्रेम की अनुभूति और भक्ति में गहराई लाने में मदद करता है। इससे भक्त अपने जीवन में सकारात्मकता और आनंद का अनुभव करते हैं, जो आध्यात्मिक प्रगति के लिए आवश्यक है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

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