आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२३ PM | सूर्यास्त: ०५:४४ AM
भक्ति रस काव्य व भजन

यशोदा मां चोरी हो गयी(Yasoda maa chori ho gayi lyrics in hindi)

81 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

यशोदा मां: कृष्ण की बचपन की लीला का भक्ति गीत

यह भजन यशोदा मां की करुणा और श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करता है, जो भक्ति का अनुभव कराता है।

यशोदा मां चोरी हो गयी(Yasoda maa chori ho gayi lyrics in hindi)तर्ज :- दरोगा जी चोरी होगईयशोदा मां चोरी हो गयी,गोरस जमा के मटकी छुपा के - 2झट से मैं सोगईयशोदा मां.....कागज कलम दवात ले,लिखलो रपट हमारी,माखन मेरा चुराया 2तेरा मदन मुरारी,मां को जवाब क्या दूं मैया - 2बरजोरी हो गयी।यशोदा मां.....लिखकर रपट यशोदा,श्री कृष्ण को बुलाई,नंद ने कचहरी में - 2फैसला सुनाई,कृष्ण को बांध दिए उखल में - 2मजबूरी हो गयी,यशोदा मां.....उस दिन से सारी सखियां,रोए कदंब के नीचे,आजा मोहन मुरारी - 2आंसु से तन को सीचे,रोको कलम को प्यासा - 2कुछ गलती होगयी।यशोदा मां.....

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में यशोदा मां की उस व्यथा का चित्रण किया गया है जब श्री कृष्ण ने माखन चोरी किया। कृष्ण को बचपन से ही माखन, दूध और छेना चुराने की आदत थी। यही अद्भुत लीलाएँ उनके बचपन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। जब यशोदा मां को यह जानकारी होती है कि उनका प्रिय पुत्र माखन चुरा रहा है, तो वह अपने मां के प्रेम और चिंताओं को व्यक्त करती हैं। 'गोरस जमा के मटकी छुपा के झट से मैं सोगई' कहकर यह दर्शाया गया है कि यशोदा मां ने अपने मन में चिंता और प्रेम का अत्यंत गहरा बोध महसूस किया। इस प्रक्रिया में, वह अपने पुत्र के लिए रपट लिखने की तैयारी करती हैं, यह दिखाते हुए कि भक्ति और मातृ प्रेम के बीच एक गहरा संबंध है।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन केवल माखन चोरी की घटना का दर्शाता नहीं है, बल्कि यह यशोदा मां की मातृत्व की भावना और श्री कृष्ण के प्रति उनकी निस्वार्थ भक्ति को भी प्रदर्शित करता है। जब उन्होंने कृष्ण को उखल में बांध दिया, तो इसका भावार्थ है कि माता अपने बच्चे को कभी-कभी सुधार के लिए सजा देती हैं। परंतु यह भजन एक मुस्कान के साथ कार्य करती है; क्योंकि मां के दिल में अपने बच्चे के लिए ऐसी भावनाएँ होती हैं जो सजा के इंतज़ार में होती हैं। यशोदा मां की चिंता एवं आंसुओं के पीछे छिपा प्रेम भक्ति का सार प्रदान करता है, जो इस भजन का प्राण है।

भक्ति मार्ग के संदर्भ में, इस भजन में भारतीय समाज में मातृ शक्ति और प्रेम का अद्वितीय चित्रण होता है। यशोदा मां का प्रेम बिना शर्त के है, जो केवल पुत्र के प्रति नहीं, बल्कि सभी जीवों के प्रति विमल प्रेम का प्रतीक है। यशोदा मां की भूमिका एक साधक की समान है, जो अपने इष्ट का ध्यान रखते हैं और भक्त की प्रगति में बाधाएँ देखने पर चिंतित होते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त को अपने इष्ट, भगवान श्री कृष्ण के प्रति समर्पित होने एवं अपने व्यक्तिगत लीलाओं का अनुभव करने की प्रेरणा मिलती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यशोदा माता की कथाएँ प्राचीन ग्रंथों में प्रचुरता से मिलती हैं। स्वयं भगवान श्री कृष्ण के जीवन में यशोदा मां का स्थान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। भागवत पुराण और अन्य हिन्दू धार्मिक ग्रंथों में यशोदा का निवास गोकुल में है, जहाँ उन्होंने भगवान कृष्ण का पालन-पोषण किया। यशोदा की माखन चोरी वाली लीलाएँ हमें सिखाती हैं कि भक्ति और प्रेम का मार्ग हमेशा सरल होता है। यह भजन उस शुद्धता को पुनर्जीवित करता है जो मातृ प्रेम में होती है, और हमें याद दिलाता है कि अद्वितीय प्रेम में हर कर्म विशेष होता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का ध्यान और गान करने से मानसिक शांति, आंतरिक संतोष और भावनात्मक सादगी को प्राप्त किया जा सकता है। भक्ति में डूबने से आत्मा को शांति मिलती है और विकसित होती है। यह भजन तनाव दूर करने का एक अद्भुत साधन हो सकता है, जिससे मन में सकारात्मकता और उजाले का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

यशोदा मां की भक्ति में सुबह या संध्या का समय सबसे अच्छा होता है। माता की आराधना के समय एक दीया लगाना, ताजा फूलों का अर्पण करना और एक सरल सी पूजा करना उचित होता है। उचित मानसिकता से, शुद्ध भावनाओं के साथ इस भजन का गान करना समर्पण को बढ़ाता है। साधक को ध्यानपूर्वक और साधारणता से गाना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यशोदा मां का इस गीत में क्या महत्व है?

यशोदा मां का महत्व इस गीत में उनके असीम मातृत्व और भगवान कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति को स्वरूपित करता है। उनके प्रेम और चिंता के भाव सभी भक्तों के लिए प्रेरणादायक हैं।

कृष्ण की माखन चोरी की लीलाओं का क्या अर्थ है?

कृष्ण की माखन चोरी की लीलाएँ यह दर्शाती हैं कि वो सरलता, नटखटपन और प्रेम के प्रतीक हैं। यह हमें सिखाती है कि जीवन में आनंद और स्नेह का स्थान कितना महत्वपूर्ण है।

क्या यह गीत विशेष अवसरों पर गाना चाहिए?

यह भजन विशेष अवसरों पर जैसे जन्माष्टमी या किसी त्योहार में भक्ति के साथ गाया जा सकता है, जिससे भक्तों में उत्साह और भक्ति का संचार हो सके।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!