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भक्ति रस काव्य व भजन

आज रंग बरसाने, बरसाने आयो नटवर नंद किशोर (रसिया) (aaj rang barsane barsane aayo natvar nandkishor rasiya Lyrics in Hindi)

33 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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राधा-कृष्ण का प्रेम रंग: नटवर नंद किशोर

यह भजन श्री कृष्ण के रसिक प्रेम का उत्सव मनाता है। इसे गाकर प्रेम और आनंद की अनुभूति करें।

आज रंग बरसाने, बरसाने आयो नटवर नंद किशोर(रसिया) आज रंग बरसाने बरसाने, आयो नटवर नंदकिशोर। नटवर नंद किशोर किशनीयां, रस-लम्पट रसभौर॥ ग्वाल बाल का लेकर टोला। रंग रंगों का भर कर झोला॥ हल्ला-गुल्ला कर कर सजनी, खूब मचायो शोर-आज... गोपिन छीन लियो पिचकारी। नर से आज बनायो नारी॥ मुंह छुपाता फिरे सांवरा, जैसे भागत चोर - आज... घुघट में कान्‍हां शरमावे। छोड़ो छोड़ो तरले पावे॥ “मधुप” हरि को आज नचायो, जैसे नाचत मोर-आज...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन नटवर नंद किशोर का स्वागत करता है और रंग, खुशी एवं उत्सव के क्षणों का वर्णन करता है। पहले पद में, 'आज रंग बरसाने' का उल्लेख करके, प्रेम और उल्लास का भाव व्यक्त किया गया है। नटवर नंद किशोर, जो अपने नटखट व्यवहार और रसीले लीलाओं के लिए प्रसिद्ध हैं, गोपियों के साथ खेल और आनंद का दृश्य प्रस्तुत करते हैं। नटवर का मतलब है नट (नृत्य करने वाला) और अति सुंदर किशोर को दर्शाता है। इस प्रकार गोंद में वह रंगों के माध्यम से उत्सव के सार का संचार कर रहे हैं। यह गीत उस आनंद को परिभाषित करता है जो प्रेम में समाहित होता है, जहाँ गोपियों के साथ दिव्य मनोरंजन होता है।

भावार्थ में, इस भजन के माध्यम से हमें श्री कृष्ण की लीलाओं की गहराईयों में ले जाया जाता है। कृष्ण का सांवला रूप और मस्तिष्क में छिपना जैसे खिड़की के पीछे एक चोर की तरह छिपना, हमारी अंतरात्मा की सहायता का संकेत है। यह दर्शाता है कि भगवान केवल बाहरी शोभा में नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं में समाहित होते हैं। गोपियों का साथ और रंगों का छिड़काव यह दर्शाता है कि सच्चा प्रेम न केवल सौंदर्य, बल्कि एक गहरा संबंध भी है। इस प्रकार से यह भजन भक्ति और प्रेम का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है।

इस भजन का आध्यात्मिक और दार्शनिक महत्व बहुत गहरा है। यह भक्ति मार्ग का प्रतीक है, जो मनुष्य को श्री कृष्ण के प्रति प्रेम और श्रद्धा के साथ जोड़ता है। भक्ति मार्ग में भावनाएँ और प्रेम सबसे महत्वपूर्ण हैं। इसमें रंगों का त्यौहार न केवल भौतिकता को उजागर करता है, बल्कि आत्मा को परमात्मा में समाहित करने का उपाय भी है। यह बताता है कि प्रेम और भक्ति जब एकत्रित होते हैं, तब व्यक्ति की आत्मा को ऐसे रंग मिलते हैं जो उसे अनंत आनंद की ओर ले जाते हैं। यह न केवल भक्ति का मार्ग है, बल्कि आत्मिक सफाई और समर्पण का प्रतीक भी है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय पौराणिक कथाओं में श्री कृष्ण के प्रति प्रेम का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। भागवत पुराण में कृष्ण की लीलाओं का वर्णन मिलता है, जिसमें उनका गोपियों के साथ रंग खेलना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इस गीत में वर्णित त्यौहार कन्हैया के साथ भाग्यशाली लीलाओं का अनुभव कराने का एक माध्यम है। यह भक्ति, प्रेम और रंगों का महोत्सव दिखाता है, जो विभिन्न पुराणों में कृष्ण की लीलाओं का सार प्रस्तुत करता है। पूरानी कथाएँ बताती हैं कि मथुरा और वृंदावन में रंगोत्सव का समय केवल भौतिक रंगों की बात नहीं है, बल्कि यह आत्मा की स्वच्छता और प्रेम का माध्यम भी है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, आंतरिक सुख और आत्मिक उन्नति होती है। यह भक्तों को भगवान की निकटता का एहसास कराता है और आत्मबल को बढ़ाता है। नियमित रूप से इसे गाने से भय और चिंता कम होती है, और भक्ति भाव में गहराई आती है। भक्तों को इनमें आनंद की अनुभूति होती है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन सुबह या संध्या के समय करना सर्वोत्तम होता है, जब वातावरण शांत और शुद्ध होता है। भक्ति भाव से पूर्ण होकर, एक स्वच्छ स्थान पर बैठें और एक दीपक जलाएं। मन को एकाग्र करें और कृष्ण के प्रति प्रेम की भावना से भरे हों। भावना और पद के साथ भजन का गान करें, ताकि उसकी मधुरता और आनंद का अनुभव हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का महत्व क्या है?

यह भजन श्री कृष्ण की लीलाओं और उनके प्रति भक्तों की प्रेम भावना को प्रकट करता है। रंग बरसाने का मतलब प्रेम का उत्सव है, जो भक्तों को आनंद की ओर ले जाता है।

भजन का सही समय कब है?

इस भजन का गायन सुबह या शाम के समय करना उत्तम है। यह समय शांति और भक्ति के लिए अनुकूल होता है।

क्या इस भजन का जाप मानसिक शांति लाने में मदद करता है?

हाँ, इस भजन का जाप मानसिक शांति और आंतरिक संतोष लाने में सहायक है। यह भक्तों को कृष्ण की निकटता का अनुभव कराता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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