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भक्ति रस काव्य व भजन

लोगो के सहारे बड़े होंगे लिरिक्स (Logo Ke Sahare Bade Honge Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan - Bhaktilok

61 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम कृपा का आधार: भक्ति की पुकार

इस भजन में श्याम जी की कृपा के महत्व को भक्ति भाव से व्यक्त किया गया है। इसे गाकर मन को शांति एवं सुकून मिलती है।

लोगो के सहारे बड़े होंगे, मेरा तो सहारा श्याम तू है ॥ असमान में तारे बड़े होंगे मेरा तो सहारा श्याम तू है, जिस दिन से बाबा तेरा सहारा मिला है, उस दिन से बाबा बड़ा चैन मिला है, दुनिया में नजरे बड़े होंगे, मेरा तो नजारा श्याम तू है, लोगो के सहारे बड़े होंगे........साथ तेरा मिल गया जो मेरी खुश नसीबी है, तू है संग तो अमरी तुज बिन गरीबी है, दुनिया में हीरे बड़े होंगे मेरा तो नगीना तू है, लोगो के सहारे बड़े होंगे........खुश हु के बाबा तू मेरे आस पास है, कन्हिया का खाटू वाले तू ही तो खास है, लोगो के समय ख़राब होगे मेरा तो समय ही श्याम तू है, लोगो के सहारे बड़े होंगे........

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के माध्यम से भक्त अपने हृदय के गहरे अंतर्मन से भगवान श्याम के प्रति अपनी भक्ति को व्यक्त करता है। यह भजन मुख्यतः सिद्धांत 'सहारा' पर आधारित है। भक्त कहता है कि उसका सबसे बड़ा सहारा भगवान श्याम हैं। "लोगो के सहारे बड़े होंगे, मेरा तो सहारा श्याम तू है"। इस पंक्ति में भक्त यह स्वीकार करता है कि संसार में भले ही कई लोग हैं जो मदद करेंगे, लेकिन असली सहारा केवल श्याम जी हैं। भगवान श्याम, जो अपने भक्तों के दुःख का संज्ञान लेते हैं, एक अद्वितीय एवं स्थायी सहारे के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं। जब भक्त कहता है, "जिस दिन से बाबा तेरा सहारा मिला है, उस दिन से बाबा बड़ा चैन मिला है", तो यह बताते हैं कि जब भक्त ने भक्ति मार्ग अपनाया, तब उनकी मनोस्थिति में सकारात्मक परिवर्तन आया।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन भक्त की असीम श्रद्धा और प्रेम को व्यक्त करता है। भक्त गुरू और भगवान के प्रति आभार प्रकट कर रहा है। "साथ तेरा मिल गया जो मेरी खुश नसीबी है" इस पंक्ति से भक्त यह दिखाना चाहता है कि भगवान के साथ प्राथमिकता और भाग्य का आपसी संबंध है। जब भगवान की कृपा होती है, तो अन्य सभी चीजें निस्संदेह कृपा के स्वरूप में बदल जाती हैं। इस भजन में भक्त यह भी दर्शाता है कि जब भक्त अपने इष्ट देवता, श्याम जी के साथ होते हैं, तो किसी भी प्रकार की गरीबी या दुख का अनुभव नहीं होता। "तू है संग तो अमरी तुज बिन गरीबी है" भगवान के निकटता के अनुभव से भक्त सुख और समृद्धि की अनुभूति करता है।

इस भजन में धार्मिक एवं दार्शनिक आधारभूत सिद्धांत ध्यान में रखकर भक्त श्रद्धा, विश्वास और प्रेम की ओर संकेत करता है। भक्ति मार्ग की वास्तविकता यह है कि हम हैं एक साधक, और भगवान हमारे सहायक है। जब भक्त कहता है, "खुश हु के बाबा तू मेरे आस पास है", तो यह अपने चारों ओर शांति और प्रेम की ऊर्जा का अनुभव कर रहे होते हैं। यह भजन उच्च आत्मा और सामूहिक अनुभव की ओर व्यक्ति को प्रेरित करता है। भक्त की भावना यह दर्शाती है कि भगवान का नाम लेते ही, हर ओर खुशी और सच्चा सुख विद्यमान है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान श्याम, जिनकी पूजा विशेष रूप से कन्हैया और खाटू श्याम के रूप में की जाती है, भक्तों का गहरा विश्वास और श्रद्धा का प्रतीक हैं। भारतीय पौराणिक कथाओं में, भक्तिन के प्रति भगवान श्याम की असीम प्रेम कहानी और अनुकंपा प्रचलित है। यह भजन उन्हें सच्चे सहारे के रूप में दर्शाता है, जैसे कि कैसे कृष्ण ने गोकुलवासियों को कंस के आतंक से मुक्त किया। इस भक्ति गीत के माध्यम से, भक्त को अपने इष्टदेवता का सानिध्य और शांति का अनुभव होता है, यही इस भजन की सबसे बड़ी महत्वपूर्णता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति, संतुलन और आंतरिक सुकून प्रदान करता है। इससे भक्त को विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति बढ़ती है और जीवन में एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है। यह भजन भक्तों को मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने में मदद करता है, जिससे उसे अपने जीवन में खुशी और समृद्धि का अनुभव होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का उपासना सुबह के समय, सूर्योदय से पहले या भगवान श्याम की पूजा के विशेष दिनों पर किया जा सकता है। भक्त को चाहिए कि वह पूजा स्थल को स्वच्छ करे और वहाँ एक दीपक प्रज्वलित करे। उसका मन एकाग्र रहे और अपने इष्टदेवता की आराधना करते हुए भजन का गान करे। ध्यान एवं साधना के दौरान भक्त को प्रसन्नता की भावना के साथ भजन में डूब जाना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्यों इस भजन को गाना महत्वपूर्ण है?

इस भजन को गाना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह श्याम जी की कृपा का अधिदेश है, जो भक्तों को मानसिक शांति और कष्टों से मुक्ति प्रदान करता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष समय है?

इस भजन का विशेष समय सुबह का प्रहर, या श्याम जी के लिए निर्धारित पूजा या व्रत के अवसर पर गाना सर्वोत्तम होता है।

इस भजन से क्या लाभ होता है?

इस भजन से भावात्मक संतुलन और मानसिक शांति प्राप्त होती है, जिससे भक्त अपने जीवन में सकारात्मकता का अनुभव कर पाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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