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Krishna Bhajan

मनमोहन तुम मुरली बजाना भूल गये लिरिक्स (Mathura Me Jakar Manmohan Tum Murli Bajana Bhool Gaye Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan - Bhaktilok

78 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कृष्ण की लीलाओं में विलीन: मुरली की पुकार

इस भजन के माध्यम से श्री कृष्ण की मधुर लीला और भावनाओं का अनुभव करें।

मनमोहन तुम मुरली बजाना भूल गये लिरिक्स (Mathura Me Jakar Manmohan Tum Murli Bajana Bhool Gaye Lyrics in Hindi) - मथुरा में जाकर मनमोहन तुम मुरली बजाना भूल गये मुरली का बाजना भूल गये गाऊऔ का चराना भूल गये क्या याद नही मोहन तुमको गोकुल में माटी का खाना सखियों के घर में जाकर के ग्वालो संग माखन चुराना माखन है आज भी मटकी में तुम गोकुल आना भूल गये मथुरा में जाकर........ क्या याद नहीं मोहन तुमको मैय्या का लाड़ लडाना वो नित प्रति सवेरे उठकर के, माखन मिश्री का ख़िलाना वो मैय्या आस लगाये बैठी है तुम भोग लगाना भूल गये मथुरा में जाकर........ क्या याद नही मोहन तुमको पनघट पर सखियों का आना बस एक ही झलक दिखा करके वो कदम्ब के पीछे छिप जाना सखियाँ तो आज भी आती है तुम पनघट आना भूल गये मथुरा में जाकर........ क्या याद नहीं मोहन तुमको राधा संग रास रचाना वो मधुबन में भानु दुलारी को बंसी की तान सुनाना वो वो तो नयन बिछाये बैठी है तुम मधुबन आना भूल गये मथुरा में जाकर........

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं और उनकी मधुरता को समर्पित है। पहले पद में, भक्त भगवान से पूछते हैं कि उन्होंने मथुरा जाकर मुरली बजाने का संकल्प क्यों भुला दिया। यह प्रश्न एक भावनात्मक सम्बन्ध को उजागर करता है, जहाँ भक्त श्री कृष्ण की मस्ती और मुरली के संगीत की याद दिलाते हैं। दूसरी पंक्ति में, 'गाऊऔ का चराना भूल गये' से यह संकेत मिलता है कि कृष्ण अपने बचपन की खेल और आनंद भरी रस्में भूल गए हैं, जैसे गोकुल में माखन चुराना और सखियों के संग खेलना। यह भाव नि:संदेह भक्तों के ह्रदय में श्री कृष्ण के प्रति तीव्र इच्छा और प्रेम का परिचायक है।

भावार्थ के दृष्टिकोण से, यह भजन भक्तों की सूक्ष्म भावनाओं और श्री कृष्ण के प्रति लगाव को दर्शाता है। जब वे कहते हैं, 'क्या याद नहीं मोहन तुमको', तो वास्तव में यह एक द्वंद्व को उपस्थित करता है, जहाँ भक्त और भगवान के बीच एक गहरा प्रेम बंधन है। श्री कृष्ण की बाल-Leela, जैसे माखन खाने का आनंद और सखियों के साथ खेलना, भक्तों के हृदय में उनकी यादों को ताजा करता है। साधक साक्षी बनकर कृष्ण की लीलाओं में शामिल होना चाहता है, और भगवान से प्रार्थना करता है कि वे उन मधुर क्षणों को पुनः अनुभव कर सकें। यह भजन एक प्रकार का आग्रह है, जिसमें भक्त भगवान को उनके अपने अतीत की याद दिलाते हैं।

इस भजन में भक्ति मार्ग के गूढ़ ज्ञान की भी गहराई है। भक्त भगवान से अपनी आसक्ति व्यक्त कर रहे हैं, वहीं भगवान के प्रति प्यार और समर्पण की भावना भी स्पष्ट की जा रही है। यह दर्शाता है कि भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिल से जुड़े हुए एक गहरा संवाद है। भक्त आपके साथ अपने प्रेम और श्रद्धा के संबंध को जगाते हैं, और श्री कृष्ण को उनकी लीलाओं की याद दिलाते हैं। यह भजन भक्ति के मार्ग में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो साधक को साधना के प्रति प्रेरित करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान श्री कृष्ण की लीलाएँ भारतीय संस्कृति और धर्म के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। पौराणिक कथा में, कृष्ण का गोकुल जाना, मथुरा में मुरली बजाना और राधा संग रास रचाना उनकी दिव्यता का प्रतीक हैं। हरियाली, प्रेम और आनंद की भूमि गोकुल में उनकी लीलाओं को सुनकर भक्तों को शांति और आनंद मिलता है। पुराणों में कृष्ण की बाल लीलाएँ तथा उनकी मुरली की मधुर धुनें भक्ति की अद्भुत मिसाल पेश करती हैं। यह भजन उस संवेदनशीलता और आत्मीयता को दर्शाता है, जो भक्त और भगवान के बीच की है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से भक्त को मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक शांति मिलती है। यह न केवल हृदय को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्ति की भावना को भी जाग्रत करता है। नियमित भजन का जाप भक्त को ध्यान में स्थिरता और तनाव से मुक्ति प्रदान करता है। यह मन को शांति और संतोष की ओर अग्रसर करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

मनमोहन तुम मुरली बजाना भूल गये भजन का पाठ सुबह के समय सबसे अच्छा है, जब सुबह की ताजगी और सर्द हवा होती है। भक्त को एक साफ स्थान पर बैठकर, ढाल सजीवता के साथ, दीया जलाकर और मधुर फल या मिठाई का भोग अर्पित करके इस भजन का जाप करना चाहिए। मानसिक स्थिति को शांति में लाना और ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं की याद दिलाना है। भक्त उन्हें उनके बचपन की मस्ती और खेलों की याद दिलाते हैं।

क्या यह भजन राधा-कृष्ण की लीला का वर्णन करता है?

हाँ, इस भजन में राधा और कृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन किया गया है, जिसमें राधा संग रास रचाना और मुरली बजाना शामिल है।

इस भजन का जाप करने से क्या लाभ होता है?

इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति और भक्ति का अनुभव होता है, जो साधक को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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