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भक्ति रस काव्य व भजन

आ जाओ माँ दिल घबराए देर ना हो कहीं देर ना हो जाए लिरिक्स || Aa jao maan dil ghabarae der na ho kaheen der na ho jae lyrics in hindi || Bhaktilok

72 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ की कृपा की आह्वान: आ जाओ माँ दिल घबराए

इस भजन में माँ दुर्गा की कृपा का आह्वान किया गया है, दिल की घबराहट को दूर करने का प्रयास किया गया है।

आ जाओ माँ दिल घबराए देर ना हो कहीं देर ना हो जाए मेरी मैया ने लगाई है बिंदिया उनसे टीका संभाला न जाए लाल लाल हरे हरे नग जड़वाये आ जाओ माँ दिल घबराये....आ जाओ माँ दिल घबराए देर ना हो...मेरी मैया ने पहने है कुंडल उनसे नथिया संभाली न जाए लाल लाल हरे हरे नग जड़वाये आ जाओ माँ दिल घबराये....आ जाओ माँ दिल घबराए देर ना हो...मेरी मैया ने पहनी है चूड़ी उनसे कंगना संभाला ना जाए लाल लाल हरे हरे नग जड़वाये आ जाओ माँ दिल घबराये....आ जाओ माँ दिल घबराए देर ना हो...मेरी मैया ने पहनी है पायल उनसे बिछुआ संभाला ना जाए लाल लाल हरे हरे नग जाये आ जाओ माँ दिल घबराये आ जाओ माँ दिल घबराए देर ना हो...मेरी मैया ने पहना है लहंगा उनसे चुनरी संभाली ना जाए लाल लाल हरा हरा गोटा लगाए आ जाओ माँ दिल घबराये आ जाओ माँ दिल घबराए देर ना हो...आ जाओ माँ दिल घबराए देर ना हो कहीं देर ना हो जाए

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का प्रमुख विषय देवी माता का आवाहन करना है, जो भक्ति में डूबे हृदय की घबराहट को शांत करती हैं। पहले अंतर में कहा गया है 'आ जाओ माँ दिल घबराए', जो माँ के प्रति एक करुण पुकार है। माँ की उपस्थिति के लिए भक्त की उत्कंठा और प्रेम का यह भाव दर्शाता है। भजन में माँ की अलंकारिक सजावटों का वर्णन किया गया है, जैसे 'बिंदिया', 'कुंडल' और 'चूड़ी', जो देवी के सौंदर्य और दिव्यता का प्रतीक हैं। हर एक वस्तु को देखने से प्रतीत होता है कि भक्त माँ को अपने समस्त शुभता और कल्याण का केंद्र मानता है।

इस भजन में भक्त की भावनाएँ गहराई से व्यक्त की गई हैं, जहाँ पर उनके दिल में देवी माँ की अनुपस्थिति की चिंता और उनकी उपस्थिति की आवश्यकता व्यक्त की गई है। इस 'दिल घबराए' भावना का इंगित करता है कि जब जीवन में समस्याएँ और कठिनाइयाँ आती हैं, तब माँ का आवाहन कितना आवश्यक हो जाता है। भक्त की यह प्रार्थना केवल एक अनुरोध नहीं है, बल्कि उनकी भक्ति का एक प्रमाण है। जब वह कहते हैं 'कहीं देर न हो जाए', तो यह दर्शाता है कि भक्त की आस्था आगे के रास्तों की आपत्ति से भरी हुई है और वे चाहते हैं कि माँ का आपका आश्रय हर परिस्थिति में तुरंत मिले।

इस भजन में भक्ति मार्ग का बहुत गहरा संदेश दिया गया है। भक्त की उस निरंतर प्रार्थना में देवी माँ के प्रति अनन्य प्रेम और श्रद्धा का घोष है। भारतीय संस्कृति में देवी माँ को सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्त करने वाली शक्ति माना गया है, और इस भजन के माध्यम से भक्तों का उद्देश्य उस शक्तिस्वरूपा माँ को यथाशीघ्र अपने जीवन में लाना है। भक्ति का मार्ग केवल बाहरी प्रदूषण से मुक्ति नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धता और आत्म विकास की ओर एक कदम बढ़ाने का नाम है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन देवी माँ की महिमा और उनके प्रति भक्ति का प्रतीक है। भारतीय पौराणिक कथाओं में माता दुर्गा या काली को शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। पवित्र ग्रंथ जैसे देवी भागवत और मार्कंडेय पुराण में माँ की शक्ति का बखान किया गया है। जब भक्त माँ का आवाहन करते हैं, तो वे शक्ति, साहस और संरक्षण की कामना करते हैं। देवी माँ का आशीर्वाद उनके लिए हर स्थिति में सहारा बनता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ स्नायुतंत्र को शांत करता है और मन को स्थिरता प्रदान करता है। मानसिक तनाव और चिंता को दूर करने में यह भजन सहायक होता है। अध्यात्मिक दृष्टि से, यह भक्तों को एकाग्रता और ध्यान की ओर प्रेरित करता है, जिससे वे अपने जीवन में सकारात्मकता और सौम्यता अनुभव करते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन को प्रात:काल सूर्योदय से पहले या संध्या समय अर्पित करना सर्वश्रेष्ठ है। पूजा स्थान पर एक दिया जलाना, फूल और मिठाई का चढ़ावा अर्पित करना चाहिए। ध्यान रखें कि मानसिकता पवित्र हो, और भक्ति भाव से गेय गाएँ। एक शांत स्थान पर बैठकर, मन में प्रेम और श्रध्दा के साथ भजन का गान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या यह भजन केवल माता दुर्गा के लिए है?

यह भजन माँ दुर्गा की महिमा को दर्शाता है, लेकिन इसे सभी मातृशक्तियों के प्रति श्रद्धांजलि के रूप में भी गाया जा सकता है।

इस भजन का क्या महत्व है?

यह भजन मानसिक शांति, आस्था और उन बलिदानों की बात करता है जो भक्त अपनी माँ के प्रति करते हैं, जिससे उन्हें जीवन में सकारात्मकता मिलती है।

क्या इस भजन का पाठ प्रतिदिन करना चाहिए?

जी हाँ, इस भजन का दैनिक पाठ करने से मानसिक शांति, स्वास्थ, और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यह भक्ति मार्ग में गहराई लाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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