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भक्ति रस काव्य व भजन

भोले बाबा ने एसा बजाया डमरू सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया लिरिक्स (bhole baaba ne aisa bajaaya damaroo saara kailaash parvat magan ho gaya lyrics in hindi) - Bhaktilok

78 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भोले बाबा का डमरू: शिव की समृद्धि का प्रतीक

भोले बाबा के डमरू की मधुर ध्वनि से संपूर्ण ब्रह्मांड में आनंद की लहर फैलती है।

भोले बाबा ने एसा बजाया डमरू सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया सुन डमरू की आवाज़ ब्रह्मा चले जहाँ ब्रह्मा चले वहाँ विषाणु चले वहाँ लक्ष्मी का मन भी मगन हो गया भोले बाबा ने एसा बजाया डमरू.... सुन डमरू की आवाज़ गंगा चले जहाँ गंगा चले वहाँ जमुना चले वहाँ सरयू का मन भी मगन भोले बाबा ने एसा बजाया डमरू.... सुन डमरू की आवाज़ सूरज चले जहाँ सूरज चले वहाँ चंदा चले वहाँ तारो का मन भी मगन हो गया भोले बाबा ने एसा बजाया डमरू.... सुन डमरू की आवाज़ गणपत चले जहाँ गणपति चले वहाँ कार्तिक चले तब अंबे का मन भी मगन हो गया भोले बाबा ने एसा बजाया डमरू.... भोले बाबा ने एसा बजाया डमरू सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय भगवान शिव की शक्ति और उनके डमरू की ध्वनि है। इस गीत में शिव की उपासना में डमरू की भूमिका को दर्शाया गया है, जिसे सुनकर सारे कैलाश पर्वत और उसके आस-पास का वातावरण आनंदित हो गया है। जैसे-जैसे डमरू की आवाज़ उठती है, ब्रह्मा, विष्णु, लक्ष्मी, गंगा, और अन्य देवी-देवता भी उसकी धुन पर नृत्य करते हैं। यह दर्शाता है कि शिव की कृपा से सभी देवताओं का मन भी आनंदित हो जाता है। गीत में कुछ प्रमुख पंक्तियाँ हैं, जैसे 'भोलें बाबा ने एसा बजाया डमरू', जो हमें यह याद दिलाती हैं कि शिव केवल एक देवता नहीं हैं, बल्कि वे सभी जीवों के लिए प्रेम और आनंद का स्रोत हैं। यह न केवल भक्ति का प्रदर्शन करता है, बल्कि सृष्टि की सृष्टि और उसका समन्वय भी दर्शाता है।

भजन की दूसरी चरण में हम देखते हैं कि डमरू की लहरों के साथ गंगा, यमुना, और सरयू जैसी पवित्र नदियाँ भी प्रवाहित होती हैं। यह बात संकेत करती है कि शिव की उपस्थिति में सभी नदियाँ और जल स्रोत उर्जान्वित होते हैं। जब डमरू की ध्वनि होती है, तब सूरज और चाँद भी उसमें शामिल होते हैं, जो यह दर्शाते हैं कि शिव की आराधना के समय सारा ब्रह्मांड एकरूप हो जाता है। यहाँ तक कि गणपति और कार्तिक जैसे देवता भी इस आनंद का अनुभव करते हैं, जो यह दर्शाता है कि शिव का भव्य और सर्वव्यापी महत्व सभी पर आधिक है। भक्ति मार्ग पर चलने वाले लोग इस भजन के माध्यम से शिव की अनुकंपा प्राप्त करते हैं और शिव की ध्वनि से उत्साह का अनुभव करते हैं।

इस भजन में एक गहरी तात्त्विकता भी निहित है। शिव को अंततः 'ब्रह्मा' के एक अंश के रूप में देखा जाता है जो रचनात्मकता का प्रतीक है। उनकी डमरू केवल एक साधन नहीं है, बल्कि सृष्टि के चारों ओर की अनुगूंज है। इसके द्वारा शिव सृष्टि के हर तत्व को जोड़ते हैं और उन्हें फिर से जीवंत करते हैं। यह भक्ति का मार्ग दर्शाता है जो व्यक्ति को अपने भीतर की अदृश्य शक्ति को पहचानने और सृष्टि के साथ एकात्मता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। शिव का यह भजन इस बात की याद दिलाता है कि भक्ति केवल वाणी का प्रयोग नहीं है, बल्कि यह एक गहरी साधना है जो मन, वचन और क्रिया के साधनों से जुड़ी होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन को सुनने और गाने का धार्मिक महत्व बहुत व्यापक है। यह भक्ति गीत शिव की महिमा और उनके द्वारा बनाये गए ब्रह्मांड के प्रति श्रद्धा प्रकट करता है। इसे सुनने से भक्तों को ध्यान की स्थिति में लाने की शक्ति होती है, जो उन्हें पुराणों में दी गई शिव की अनुकंपा और ज्ञान से जोड़ता है। महाभारत और पुराणों में शिव की स्थायी तत्व एवं भक्ति के दृष्टिकोण को समझाते हुए, यह भजन हमें सिखाता है कि हम श्रद्धा और समर्पण के साथ शिव की आराधना करें। यह भजन न केवल आत्मा का उत्थान करता है, बल्कि भक्तों में शांति और समर्पण की भावना को भी जागृत करता है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का जाप करने से भक्तों को मानसिक शांति, आध्यात्मिक विकास और सकारात्मकता प्राप्त होती है। यह मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होता है और भक्तों के भीतर ऊर्जा का संचार करता है। नियमित रूप से इस भजन का श्रवण या जाप करने से आप शिव की कृपा को अनुभव कर सकते हैं, जिससे जीवन में सुख और समृद्धि आती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भोले बाबा के इस भजन का जाप सुबह और शाम को करना सर्वोत्तम होता है। पूजा करते समय एक दीया जलाएं और भगवान शिव का चित्र या मूर्ति के सामने बैठें। साधना करते समय मन को एकाग्र रखें और शिव की महिमा का ध्यान करें। एक सरल मंत्र का उच्चारण करते हुए भजन गाना आपको और गहरे ध्यान में ले जाएगा।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन का कोई विशेष समय है?

इस भजन का जाप सुबह या शाम को करने से इसका विशेष प्रभाव पड़ता है। यह समय शिव की आराधना के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

क्या यह भजन हर कोई गा सकता है?

हाँ, यह भजन किसी भी भक्त द्वारा गाया जा सकता है। यह सरल और मधुर है, जो सभी को शिव की भक्ति में शामिल होने की प्रेरणा देता है।

क्या इस भजन का व्यक्तिगत अनुभव मायने रखता है?

जी हाँ, इस भजन का व्यक्तिगत अनुभव भक्तों के आध्यात्मिक विकास को बहुत प्रभावित करता है। गाने से आनंद और ऊर्जा का संचार होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

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