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भक्ति रस काव्य व भजन

देवा लम्बोदर गिरजा नन्दना, देवा पूर्ण करो मनोकामना, देवा सिद्ध करो सब कामना लिरिक्स || Deva lambodar giraja nandana, deva poorn karo man, deva siddh karo sabakee kaamana geet lyrics in hindi || Bhaktilok

73 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गणेश की आराधना: मनोकामना पूर्ति का साधन

इस भजन के माध्यम से गणेश जी से प्रार्थना कर सभी मनोकामनाओं की पूर्णता की आशा करें।

देवा लम्बोदर गिरजा नन्दना, देवा पूर्ण करो मनोकामना, देवा सिद्ध करो सब कामना, देवा लम्बोदर गिरजा नन्दना, तू दुःख हरता तू सुख करता विद्या दायी गजाननः, देवा लम्बोदर गिरजा नन्दना, पाँव पै झनिया रुनझुन बाजे, रुनझुन बाजे छम छम बजे, नृत्य करत हे गजाननः, देवा लम्बोदर... सबसे पहले पूजा तुम्हारी, हर बुधवार देवा पूजा तुम्हारी, मोदक भोग लगाओ न, देवा लम्बोदर...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में गणेश जी, जिन्हें लम्बोदर कहा जाता है, की स्तुति की गई है। 'लम्बोदर' का अर्थ है जिस deity का पेट बड़ा हो और जो सभी दुखों का नाशक है। 'गिरजा नंदना' का अर्थ भगवान गणेश हैं, जो पार्वती जी के पुत्र हैं। भजन में यह कहा गया है कि देवा हमें हमारी मनोकामनाओं की पूर्ति करने में सहायता करें। यहाँ यह दर्शाया गया है कि भगवान गणेश संपन्नता, सुख, और शुभता के दाता हैं। गणेश जी की आराधना करते समय भक्त उन्हें 'सिद्ध करो सब कामना' का आग्रह करते हुए यह व्यक्त करते हैं कि वे सभी इच्छाओं को साकार करें। यह भजन न केवल गणेश जी की प्रार्थना है, बल्कि भक्तों की भावना और उनकी अपेक्षाओं को भी व्यक्त करता है, जिससे भक्त की आस्था और विश्वास और भी प्रगाढ़ होता है।

भजन में भावनाएँ गहन हैं; यह भक्त की गणेश जी में अपार श्रद्धा को प्रकट करता है। जब भक्त कहते हैं 'तू दुःख हरता, तू सुख करता', तो इसका अर्थ यह है कि भगवान गणेश के पास हमारे कष्टों के निवारण की शक्ति है। भक्त गणेश जी को विद्या का दाता मानते हैं और उनकी कृपा से ज्ञान और बुद्धिमत्ता की प्राप्ति की कामना करते हैं। भजन का यह अंश दर्शाता है कि देवता के आशीर्वाद से ही जीवन में सुख और समृद्धि संभव है। यहाँ गजानन के रूप में भक्त उन्हें केवल एक देवता नहीं, बल्कि आशा, विश्वास और सुख की प्रतीक मानते हैं। इस प्रकार, यह भजन केवल एक प्रार्थना नहीं है, बल्कि एक समर्पण का प्रतीक है जो भक्त पसंद करते हैं।

गणेश जी की आराधना का यह भजन भक्ति मार्ग की महत्वपूर्णता को दर्शाता है। भक्त जब इस भजन का पाठ करते हैं, तो वे अपने हृदय में ईश्वर के प्रति भक्ति और श्रद्धा का भाव रखते हैं। यहाँ, भक्त केवल भोग की बात नहीं करते, बल्कि वे उसके पीछे छिपे आध्यात्मिक मूल्यों की ओर भी ध्यान देते हैं। गणेश जी की कृपा प्राप्त करना और उनके प्रति भक्ति प्रकट करना एक सच्चा भक्त होने का संकेत है। यह भजन भक्तों को यह सिखाता है कि भक्ति न केवल अपनी इच्छाओं की पूर्ति हेतु होती है, बल्कि यह आत्मा को शुद्ध करने का भी एक माध्यम है। ईश्वर में भक्ति रखते हुए, व्यक्ति बस अपने अंतर्मन की एकीकरण की ओर अग्रसर होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है। गणेश जी की पूजा हर बुधवार और गणेश चतुर्थी जैसे अवसरों पर की जाती है। भगवान गणेश को समस्त विघ्नों का नाशक माना जाता है, और उनकी पूजा से कामनाएँ पूर्ण होती हैं। गणेश पुराण में उनके गुणों और शक्ति का उल्लेख किया गया है, जिससे ज्ञात होता है कि वे न केवल सुख-संपत्ति के दाता हैं, बल्कि समस्त बुराइयों को दूर करने वाले भी हैं। उनकी आराधना करने से जीवन में सकारात्मकता और सुख की अनुभूति होती है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, सकारात्मकता, और शक्ति की प्राप्ति होती है। यह अपने भक्तों को आत्मविश्वास और तनावमुक्ति में मदद करता है। जब कोई गणेश जी के इस भजन का श्रवण या जाप करता है, तो उसका मानसिक और आध्यात्मिक विकास संभव होता है। इससे भक्त के जीवन में खुशियाँ और सफलताएँ आती हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन की साधना का समय सुबह या संध्या का है, जब वातावरण शांत हो। भजन के दौरान एक दीया जलाना और मोदक जैसे नैवेद्य का भोग अर्पित करना चाहिए। भक्त को ध्यान पूर्वक बैठकर, मन को शांत रखते हुए भजन का पाठ करना चाहिए। ऐसे में आस्था और ध्यान को केंद्रित करते हुए भक्ति करना आवश्यक है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गणेश जी की पूजा में क्या विशेष मंत्र होते हैं?

गणेश जी की पूजा में 'ॐ गण गणपतये नमः' विशेष रूप से प्रचलित मंत्र है, जो भारतीय मान्यता में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे जाप करने से मन की शांति और एकाग्रता प्राप्त होती है।

कौन से भोग गणेश जी को अर्पित करने चाहिए?

गणेश जी को मोदक, लड्डू, और ताजे फल का भोग अर्पित किया जाता है। यह भारतीय संस्कृति में एक परंपरा है, जो गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों के दौरान मुख्य रूप से होती है।

क्यों गणेश चतुर्थी पर विशेष पूजा की जाती है?

गणेश चतुर्थी पर गणेश जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन विशेष पूजा और आराधना करने से भक्तों की समस्त कामनाएँ पूर्ण होती हैं और विघ्नों का नाश होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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