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भक्ति रस काव्य व भजन

देवा लम्बोदर गिरजा नन्दना लिरिक्स || deva lambodar giraja nandana lyrics in hindi || Bhaktilok

80 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गणेश स्तुति: लम्बोदर का गान

गणपति की भक्ति में लिप्त, यह भजन मनोकामनाओं की पूर्णता और सुख-दुख के नाश का आश्वासन देता है।

देवा लम्बोदर गिरजा नन्दना,देवा पूर्ण करो मनोकामना, देवा सिद्ध करो सब कामना,देवा लम्बोदर गिरजा नन्दना,तू दुःख हरतातू सुख करताविद्या दायी गजाननःदेवा लम्बोदर गिरजा नन्दनापाँव पैझनिया रुनझुन बाजेरुनझुन बाजे छम छम बाजेनृत्य करत हे गजाननःदेवा लम्बोदर.....सबसे पहले पूजा तुम्हारी,हर बुधवार देवा पूजा तुम्हारी,मोदक भोग लगाओ न,देवा लम्बोदर...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का प्राथमिक संदेश भगवान गणेश की भक्ति और उनके प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। 'देवा लम्बोदर' गीत के आरंभ में लम्बोदर, अर्थात् बड़े पेट वाले, के रूप में गणेश की विशेषताएँ वर्णित की गई हैं। गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है, जो सभी बाधाओं और दुखों को दूर करते हैं। इस गीत में भक्त समर्पणपूर्वक प्रार्थना करते हैं कि 'देवा पूर्ण करो मनोकामना' अर्थात् सभी इच्छाओं को पूर्ण करें। यहां भाव यह है कि गणेश केवल भौतिक इच्छाओं की पूर्ति नहीं करते, बल्कि अध्यात्मिक विकास के मार्ग में भी सहायता करते हैं।

भजन में 'तू दुःख हर' अभिवचन इस बात के प्रमाण के रूप में है कि भक्त गणेश को धारण करते हुए अपने सभी दुखों को सुख में परिवर्तित करने की कामना करते हैं। इसके साथ 'विद्या दायी गजानन' का उल्लेख इस ओर संकेत करता है कि गणेश ज्ञान और शिक्षा के भी देवता हैं। भक्त इस भक्ति में ताल, बंजीर और आनंद का अनुभव करते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भगवान गणेश का नाम लेते ही मन में ऊर्जा और उमंग का संचार होता है। सभी लोग मिलकर नृत्य करते हैं और यह आनंद गणेश के प्रति उनकी भक्ति को प्रकट करता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का सार भी समाहित है। भक्त गणेश की पूजा को अत्यधिक महत्वपूर्ण मानते हैं और हर बुधवार उन्हें विशेष रूप से पूजा करने का आग्रह करते हैं। मोदक का भोग लगाना भी संस्कार का एक हिस्सा है, जो कि भगवान को प्रिय है। यहाँ इस बात पर जोर दिया गया है कि नियमित पूजा और भक्ति से मनुष्य अपने जीवन को संवार सकता है और समस्त विघ्नों को दूर कर सकता है। यह भक्ति व्यक्ति की आत्मा को शुद्ध करने एवं जीवन में सकारात्मकता लाने का कार्य करती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गणेश को सभी कार्यों का प्रारंभ करने वाला और संकटों का नाशक माना जाता है। हिन्दू धर्म में गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। पुराणों में वर्णित है कि जब भगवान शिव और माता पार्वती ने गणेश को जन्म दिया, तो उन्हें सबसे पहले पूजा का अधिकार मिला। इस भजन में गणेश की विशेषता, जैसे कि 'लम्बोदर' और 'गिरजा नन्दना' के शब्द उनके शारीरिक और आध्यात्मिक पहलुओं की गहराई को स्पष्ट करते हैं। यह भजन मौखिक परंपरा के अंतर्गत भक्तों के बीच गूंजता है और विद्यार्थियों, कार्यक्षेत्र में टकराव, या जीवन के विभिन्न पहलुओं में संतुलन लाने हेतु मार्गदर्शन करता है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। इसके अलावा, भक्तों को कठिनाइयों से मुक्त होने का अनुभव होता है। नियमित रूप से इस भजन का गायन करने से जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है, जैसे शांति, समृद्धि, और खुशहाली। यह भक्ति भक्तों के लिए एक ऊर्जा स्रोत है, जो उन्हें अध्यात्मिक और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना उत्तम होता है। भक्तों को इस दौरान एक शांत स्थान पर बैठना चाहिए, जहाँ ध्यान और मनन किया जा सके। पूजा करते समय एक दीया जलाना, सुगंधित अगरबत्ती जलाना और भगवान गणेश को मोदक अर्पित करना चाहिए। यह गहनता और समर्पण के साथ किया जाना चाहिए, जिससे भक्त गणेश की कृपा को अनुभव कर सकें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या देवा लम्बोदर गिरजा नन्दना का पाठ केवल बुधवार को करना चाहिए?

हालांकि इस भजन का विशेष महत्व बुधवार को है, लेकिन इस भजन का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है। विशेष रूप से गणेश चतुर्थी जैसे आयोजनों पर इसका पाठ विशेष लाभकारी रहता है।

क्या इस भजन के साथ कोई विशेष पूजा विधि है?

इस भजन का पाठ करते समय भक्तों को ईश्वर की तस्वीर के समक्ष बैठकर दीया जलाना और मोदक भोग अर्पित करना चाहिए, जिससे ध्यान और भक्ति का भाव बढ़ता है।

गणेश की पूजा में अन्य क्या अवश्य किया जाना चाहिए?

गणेश की पूजा में विशेष रूप से लड्डू और मोदक का भोग लगाना चाहिए। इसके अलावा, गणेश का गुणगान करते हुए मंत्रों का उच्चारण करना और मानसिक एकाग्रता बनाए रखना आवश्यक है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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