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भक्ति रस काव्य व भजन

कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे, निर्धन के घर भी आ जाना लिरिक्स (kabhee phursat ho to jagadambe, nirdhan ke ghar bhee aa jaana lyrics in hindi) - bhaktilok

37 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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जगदम्बा की कृपा: भक्ति का आह्वान

इस भजन के माध्यम से माँ जगदम्बा से निराशों को राहत देने की प्रार्थना की जाती है।

कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे, निर्धन के घर भी आ जाना जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना छत्र बना सका सोने का, ना चुनरी घर मेरे टारों जड़ी ना पेडे बर्फी मेवा है माँ, बस श्रद्धा है नैन बिछाए खड़े इस श्रद्धा की रख लो लाज हे माँ, इस विनती को ना ठुकरा जाना जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना जिस घर के दिए मे तेल नहीं, वहां जोत जगाओं कैसे मेरा खुद ही बिशोना डरती माँ, तेरी चोंकी लगाऊं मै कैसे जहाँ मै बैठा वही बैठ के माँ, बच्चों का दिल बहला जाना जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना तू भाग्य बनाने वाली है, माँ मै तकदीर का मारा हूँ हे दाती संभाल भिकारी को, आखिर तेरी आँख का तारा हूँ मै दोषी तू निर्दोष है माँ, मेरे दोषों को तूं भुला जाना

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन माँ जगदम्बा की करूणा और क्षमा की भावना को व्यक्त करता है। इसमें भक्‍त माँ से प्रार्थना कर रहा है कि जब भी उन्हें फुर्सत मिले, वे निर्धन के घर आयें। अभाव और विपरीत परिस्थितियों में भी भक्‍त अपनी श्रद्धा और विश्वास का केन्द्र बना रहता है। इस भजन में भक्‍त मां को याद करता है और कहता है कि जो भी उसकी झोंपड़ी में है, चाहे वह रूखा-सूखा भोजन हो, वह भी मां को समर्पित है। यहां एक गहरी भक्ति का प्रतीक है, जिसमें भक्‍त कहता है कि उसे माया या भौतिक वस्तुओं से कोई मतलब नहीं है, सिर्फ मां के प्रति उसकी आत्मीयता और श्रृद्धा महत्वपूर्ण है।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह भजन भक्‍ति का एक सर्वोत्तम उदाहरण है, जहां भक्‍त अपनी संपूर्णता से मां के सामने अपने दुःखों को रखा है। वह इस भजन के माध्यम से यह महसूस करता है कि भले ही उसके पास भौतिक सामान नहीं है, फिर भी श्रद्धा और प्रेम के चलते वह माँ के निकटता महसूस करता है। इस भावना में एक गहरी विनम्रता है, जहां भक्‍त अपनी परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए, मां से क्षमा और सहायता की कामना करता है। यह भक्ति भावनाओं को व्यक्त करने का एक संपूर्ण तरीका है, जो भावनाओं की गहराईयों में जाकर मां की कृपा की अपेक्षा करता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग के तत्व का गहरा दर्शन मिलता है, जिसमें भक्‍त मां की अनुकंपा और दया की याचना करता है। सामग्री की संतोषी नहीं, बल्कि आत्मिक आनंद की उपलब्धि के लिए यहां एक भावनात्मक यात्रा है। भक्‍ति का यह मार्ग हमेशा अपेक्षित नहीं है, परंतु भक्‍त को यह समझ में आता है कि सच्चे हृदय से मां को संदर्भित करने से वह अपने दुखों से मुक्त हो सकता है। भक्ति में निहित यह दर्शन यह सिखाता है कि जब भक्‍त सच्चे मन से मां का स्मरण करता है तो मां उसकी सभी आवश्यकताओं का ध्यान रखती हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय धार्मिक संस्कृति में गहरा है। भगवती दुर्गा की उपासना केवल शक्ति की पूजा नहीं बल्कि करुणा और दया की देवी के रूप में उनके स्वरूप को भी दर्शाती है। दुर्गा सप्तशती से लेकर अन्य पुराणों में माँ दुर्गा की महिमा का वर्णन किया गया है। इस भजन में भक्‍त ने माँ को सम्पूर्ण संसार की माता मानते हुए उनके दर पर अपने दिल की बातें रखी हैं। यह भजन उन सभी को प्रेरित करता है जो असहाय और निर्धन हैं, कि माँ की भक्ति से वे भी संकटों से उबर सकते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित जाप करने से मानसिक स्थिरता, आंतरिक सुख और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। भक्तों के जीवन में यह भजन कर्मों का फल नहीं होने पर भी आंतरिक शांति प्रदान करता है। माँ की भक्ति से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता और सच्ची कृपा का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन की साधना सुबह या शाम के समय सर्वोत्तम होती है। श्रद्धा के साथ एक दीप जलाकर और मिठाई या फल का भोग लगाकर इस भजन का पाठ करना चाहिए। मन को एकाग्र करने के लिए साफ स्थान पर बैठकर, भगवान का ध्यान करते हुए इस भजन को गुनगुनाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस देवी को समर्पित है?

यह भजन माँ जगदम्बा को समर्पित है, जो शक्ति और दया की प्रतीक मानी जाती हैं।

क्या इस भजन का पाठ करने से कोई विशेष लाभ होता है?

इस भजन का नियमित पाठ करने से भक्‍त के जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता बढ़ती है।

भजन का सही समय क्या है?

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना सबसे बेहतर होता है, ताकि मन की शांति प्राप्त हो सके।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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