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भक्ति रस काव्य व भजन

कई जन्मों से बुला रही हु कोई तो रिश्ता जरूर होगा (kaee janmon se bula rahee hoon koee to rishta jaroor hoga lyrics in hindi) - लिरिक्स

102 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कृष्ण की अनंत प्रेम कथा: कई जन्मों का संबंध

इस भजन से श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण का भास होता है, जो भक्तों को परमात्मा की ओर आकर्षित करता है।

कई जन्मों से बुला रही हु कोई तो रिश्ता जरूर होगा॥नज़रो से नज़ारे मिला ना पायी मेरी नज़र का कसूर होगा॥तुम्ही तो मेरे मात पिता हो॥तुम्ही तो मेरे बंदु सखा हो॥कितने ही नाते तुम संग जोड़े,कोई नाता तो जरुर होगा,कई जन्मों से बुला रही हु........कभी भुलाते हो वृदावन मे॥कभी भुलाते हो मधुवन मे॥अपने तो मै रोज भुलातेमेरे घर भी आना जरुर होगाकई जन्मों से बुला रही हु......तुम्हे तो मेरे आत्मा हो॥तुम्ही तो मेरे परमात्मा हो॥तुझी में रह कर तुझी से पर्दापर्दा हटना जरुर होगाकई जन्मों से बुला रही हु......अखो में बस गई तस्वीर तेरी॥दिल मेरा हो गया जागीर तेरी॥दासी की बिनती तुम्हारे आगेदर्श दिखना जरूर होगा

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त ने कई जन्मों से अपने प्रियतम श्री कृष्ण को पुकारा है, यह दर्शाते हुए कि उनका एक गहरा और नितांत प्रेम संबंध है। "कई जन्मों से बुला रही हूँ, कोई तो रिश्ता जरूर होगा" इस पंक्ति में यह इंगित किया गया है कि आत्मा और परमात्मा के बीच अनंत संबंध होता है, जो समय की सीमाओं को पार कर जाता है। इसके माध्यम से भक्त अपने भीतर की गहराई से यह स्पष्ट करता है कि भक्ति में कोई भेदभाव नहीं है, बल्कि यह एक दिव्य शक्ति है जो भक्त को उसके सच्चे स्वरूप की ओर ले जाती है। जैसे-जैसे भजन आगे बढ़ता है, भक्त कृष्ण को अपना मात-पिता, बंधु और सखा मानता है, जिससे यह प्रगाढ़ता और भी गहरी हो जाती है।

भजन का एक महत्वपूर्ण भाव यह है कि कृष्ण हमेशा भक्तों के मन में बसे रहते हैं। उदाहरण के लिए, "अखों में बस गई तस्वीर तेरी" के माध्यम से दर्शाया गया है कि भक्त का मन और आत्मा श्री कृष्ण में पूर्ण रूप से लीन है। यह दिखाता है कि केवल नज़र से नहीं, बल्कि पूरी आत्मा से वह भगवान की ओर आकृष्ट है। इसके बाद आती है 'दासी की बिनती', जो बताती है कि भक्त केवल आत्मसमर्पण के लिए तैयार है और अपने हृदय में प्रेम के आगार में श्री कृष्ण से आशीर्वाद प्राप्त करना चाहता है। यह समर्पण की भावना भक्त की दिव्यता को दर्शाता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का गूढ़ अर्थ छिपा है। भक्त का प्रेम, समर्पण और आत्मा की पवित्रता को दर्शाता है। कामना, उपासना और भक्तिभाव में अंतरविरोध न हो, इसी की प्रेरणा इसे दिये गये शब्दों में पाई जाती है। 'तुम्ही तो मेरे परमात्मा हो' इस पंक्ति में बताते हैं कि भगवान कृष्ण केवल एक देवता नहीं, बल्कि आत्मा के परम स्वरूप हैं। भक्ति मार्ग में आत्मा की तृप्ति का अर्थ केवल भक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक गूढ़ और दिव्य संबंध की ओर इशारा करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का पारंपरिक संदर्भ भारत की गहन भक्ति परंपरा से जुड़ा हुआ है। भक्ति साहित्यों में, जैसे कि भागवत पुराण और गीता, कृष्ण की भक्ति का महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। भागवत में कृष्ण के जीवन के अनेक पहलुओं का वर्णन है, जिसमें भक्तों की उनकी प्रेम भक्ति को दर्शाया गया है। इस तरह के भजन और भक्ति गीत आमतौर पर कृष्ण से संबंधित पर्वों और उत्सवों में गाए जाते हैं, और ये उन भक्तों के लिए कृपा का साधन बनते हैं जो श्री कृष्ण की असीम कृपा की कामना करते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, भक्ति भाव, आत्मिक संतोष और मानसिक तनाव से मुक्ति प्राप्त होती है। भक्तों के लिए यह एक पवित्र अनुभव है, जो उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेम का संचार करता है। नियमित रूप से भजन का जाप करने से व्यक्ति अपने भीतर की गहराइयों तक पहुँच सकता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय किया जाता है, जब मन शांत और ध्यान केंद्रित हो। पूजा स्थली पर एक दीया जलाना, फूलों एवं प्रसाद का भोग चढ़ाना, और अवश्य गुलाब या चमेली का पुष्प अर्पित करना लाभदायक होता है। सही स्थिति में बैठकर, पूरी एकाग्रता के साथ इस भजन का जाप करना चाहिए, ताकि भक्त भाव में लीन हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि भक्त और भगवान के बीच अनंत संबंध है, जो कई जन्मों से चलता आ रहा है। इसे गाते हुए भक्त अपने समर्पण और प्रेम का साक्षात्कार करता है।

क्यों यह भजन कृष्ण की भक्ति में महत्वपूर्ण है?

यह भजन कृष्ण के प्रति गहन प्रेम और श्रद्धा को व्यक्त करता है, जो भक्त के हृदय में कृष्ण के प्रति अनुपम भाव प्रकट करता है और कृष्ण का ध्यान केंद्रित करता है।

भजन का जाप करने से क्या लाभ होता है?

भजन का नियमित जाप मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक विकास में सहायक होता है। यह भक्ति के रास्ते पर चलने का एक सशक्त माध्यम बनता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 18 Aug 2026

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