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भक्ति रस काव्य व भजन

मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे नाम मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल काली लिरिक्स || Man chal vrndaavan dhaam, ratenge raadhe raadhe naam milenge kunj bihaaree, odh ke kaambalee kaalee lyrics in hindi || Bhaktilok

59 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे नाम मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल काली  लिरिक्स || Man chal vrndaavan dhaam, ratenge raadhe raadhe naam milenge kunj bihaaree, odh ke kaambalee kaalee lyrics in hindi ||



मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे नाम

मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल काली ।


प्रात होत हम श्री यमूनाजी जाएँगे,

करके पान हम जीवन सफल बनाएँगे ।

होवे सब तो पूरण काम, रटेंगे राधे राधे नाम ॥१॥


श्री गोवर्धन रूप के दर्शन पाएँगे,

परिक्रमा के जीवन सफल बनाएँगे ।

करे मानसी गंगा स्नान, रटेंगे राधे राधे नाम ॥२॥


श्री बरसाने धाम की महिमा न्यारी है,

महलोकी की सरकार श्री राधा रानी है ।

डफ़ ढोल की दे दे ताल, रटेंगे राधे राधे नाम ॥३॥


दूर दूर से नर और नारी यहा आते है,

दर्शन करके जीवन सफल बनाते है ।

मिले जीवन मे विश्राम, रटेंगे राधे राधे नाम ॥४॥ 

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे नाम मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल काली लिरिक्स || Man chal vrndaavan dhaam, ratenge raadhe raadhe naam milenge kunj bihaaree, odh ke kaambalee kaalee lyrics in hindi || Bhaktilok" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।

भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?

यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।

देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?

माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।

क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?

हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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