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भक्ति रस काव्य व भजन

मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है लिरिक्स || Meree aapakee kirpa se sab kaam ho raha hai lyrics in hindi || Bhaktilok

109 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कृष्ण कृपा: जीवन का अद्भुत साक्षात्कार

इस भजन के माध्यम से श्री कृष्ण की कृपा का अनुभव करें और जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति करें।

मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा है।करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है॥पतवार के बिना ही, मेरी नाव चल रही है।हैरान है ज़माना, मंजिल भी मिल रही है।करता नहीं मैं कुछ भी, सब काम हो रहा है॥तुम साथ हो जो मेरे, किस चीज की कमी है।किसी और चीज की, अब दरकार ही नहीं है।तेरे साथ से गुलाम, अब गुलफाम हो रहा है॥मैं तो नहीं हूँ काबिल, तेरा पार कैसे पाऊं।टूटी हुयी वाणी से, गुणगान कैसे गाऊं।तेरी प्रेरणा से ही, सब ये कमाल हो रहा हैं॥मुझे हर कदम कदम पर, तूने दिया सहारा।मेरी ज़िन्दगी बदल दी, तूने करके एक इशारा।एहसान पे तेरा ये, एहसान हो रहा है॥तूफ़ान आंधियों में, तूने ही मुझको थामा।तुम कृष्ण बन के आए, मैं जब बना सुदामा।तेरे करम से अब ये, सरेआम हो रहा है॥मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा है।करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है' का मुख्य संदेश भगवान श्री कृष्ण की कृपा और उनके प्रति अटूट श्रद्धा है। पहले पंक्ति में जो 'कन्हैया' का उल्लेख है, वह श्री कृष्ण का affectionate नाम है। यहाँ भक्ति की भावना से कहा गया है कि भक्ति के बिना जीवन के सभी कार्य श्री कृष्ण की कृपा से ही संपन्न हो रहे हैं। 'पतवार के बिना ही, मेरी नाव चल रही है' इस विचार को दर्शाता है कि जब सच्ची भक्ति होती है, तब भगवान स्वंय भक्त की नैया को पार लगाते हैं। इसी तरह, भजन की आगे की पंक्तियों में भक्त अपने सभी परेशानियों और असम्भावाओं के बावजूद उस निर्मल प्रेम का अनुभव कर रहा है जो उसे कृष्ण से प्राप्त होता है।

भजन के भावार्थ में यह स्पष्ट होता है कि भक्त की आत्म-ईच्छाएं और धार्मिक तर्क कंजूसी महसूस करते हैं, क्योंकि वह अपनी क्षमताओं को सीमित मानता है। 'मैं तो नहीं हूँ काबिल' में भक्त अपनी क्षमताओं की कमी को स्वीकार करता है, जबकि उसकी भावनाएँ प्रेरित होती हैं भक्ति से। यहीं पर कृष्ण की अनुकंपा उसे सुदामा की तरह पहचानती है। जो लोग भक्ति में पूर्ण समर्पण करते हैं, वे व्यक्तिगत संघर्षों और मानसिक तनावों से बचे रहते हैं। इस भक्ति गीत का उद्देश्य भक्त को समझाना है कि सच्चे प्रेम और सेवाभाव से जीवन में कठिनाइयाँ भी सरलता से पार हो जाती हैं।

भक्ति मार्ग (Bhakti Marg) के सिद्धांतों के अनुसार, भगवान में पूर्ण विश्वास के साथ जीवन जीने और उनकी कृपा की प्राप्ति एक भक्त के लिए आवश्यक है। यह भजन इस बात की पुष्टि करता है कि भगवान की कृपा से हम अनगिनत कठिनाइयों से पार पा सकते हैं। भगवान का साकार रूप, जैसे कि श्री कृष्ण, हमें सिखाता है कि भक्ति केवल एक भावना नहीं है, बल्कि यह एक गहरी आत्मिक अनुभूति का परिणाम है। 'सरेआम हो रहा है' संकेत करता है कि जब भक्ति में सच्चाई हो, तब भगवान भक्त की हर इच्छा को पूरा करते हैं, जिससे जीवन में आस्था बढ़ती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन विशेष रूप से कृष्ण भक्ति के संदर्भ में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। भारतीय पौराणिक कथाओं में भगवान कृष्ण का महत्व बार-बार उल्लेखित है, जैसे कि भगवद गीता में। श्री कृष्ण ने अपने अनुयायियों को सिखाया है कि भक्ति से जीवन में सभी प्रकार की कठिनाइयाँ दूर होती हैं। सुदामा की कथा में भी एक महत्वपूर्ण संदेश है कि साधारण लोग भी प्रम की शक्ति का अनुभव कर सकते हैं। इस भजन का गायक कृष्ण के प्रति अपनी भक्ति, समर्पण और कृपा की भावना को व्यक्त करता है, जो भक्तों को महान प्रेरणा देती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा, और स्वाभाविक प्रसन्नता का अनुभव होता है। नियमित इसकी साधना करने से भक्त के जीवन में सच्ची भक्ति की भावना जागृत होती है, जो उसे आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाती है। भजन को गाने से मन में श्री कृष्ण का ध्यान और प्रार्थना जुड़ती है जो आध्यात्मिक अंकुरण को बढ़ावा देती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन की साधना के लिए सुबह या शाम का समय सबसे उपयुक्त है। एक दीपक जलाना और फूलों का चढ़ावा अर्पित करना चाहिए। सच्चे मन से ध्यान लगाने के लिए सीधे दिशा की ओर बैठें, जिससे समर्पण की भावना को संतुलित किया जा सके। इस प्रक्रिया में संतोष और भक्ति का भाव रखते हुए भजन का उच्चारण करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का महत्व क्या है?

इस भजन में भगवान कृष्ण की कृपा और भक्ति के महत्व पर जोर दिया गया है। यह भक्तों को उनके आशीर्वाद से जीवन में कठिनाईयों का समाधान खोजने के लिए प्रेरित करता है।

भजन सुनने से क्या मानसिक लाभ होते हैं?

भजन सुनने से मानसिक तनाव कम होता है और मन को शांति मिलती है। यह सकारात्मक सोच और ऊर्जा का संचार करता है, जिससे व्यक्तित्व में निखार आता है।

भजन का सही तरीके से पाठ कैसे करते हैं?

इस भजन का पाठ सच्चे मन से, ध्यानपूर्वक और श्रद्धा के साथ करना चाहिए। दीप जलाकर और पुष्प अर्पित करने से भक्ति की ऊर्जा और भी बढ़ जाती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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