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भक्ति रस काव्य व भजन

पार्वती बोली शंकर से (Paarvatee bolee shankar se lyrics in hindi) - Bhaktilok

123 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 पार्वती बोली शंकर से (Paarvatee bolee shankar se lyrics in hindi)


पार्वती बोली शंकर से

पार्वती बोली शंकर से

सुनिये भोलेनाथ जी

रहना है हर एक जन्म में

मुझे तुम्हारे साथ जी

वचन दीजिये न छोड़ोगे

कब हमारा हाथ जी....


ओ भोलेनाथ जी

ओ शम्भू नाथ जी

ओ भोलेनाथ जी

ओ शंकरनाथ जी।


जैसे मस्तक पर चंदा है

गंगा बसी जटाओ में

वैसा रखना है अभिनाशी

मुझे प्रेम की छाँव में...


कोई नही तुमसा तीनो

लोको में दसो दिशाओ में

महलो से ज्यादा सुख हिया

कैलाश की खुली हवा में....


रहना है हर एक जन्म में

मुझे तुम्हारे साथ जी

वचन दीजिये न छोड़ोगे

कब हमारा हाथ जी....


ओ भोलेनाथ जी

ओ शम्भू नाथ जी

ओ भोलेनाथ जी

ओ शंकरनाथ जी।


देव हो तुम देवो के भोले

अमर हो अंतर यामी हो

भाग्यवान है हम त्रिपुरारी

आप हमारे स्वामी हो...


पुष्प विमानों से प्यारी

हमको नंदी की सवारी जी

युगों युगों से पार्वती

भोले तुमपे बलिहारी....


जब लाओ तुम ही लाना

जब लाओ तुम ही लाना

द्वारे मेरे बारात जी...


ओ भोलेनाथ जी

ओ भोलेनाथ जी

ओ शम्भू नाथ जी

ओ भोलेनाथ जी

ओ शंकरनाथ जी।


प्राण मेरे बस्ते है तुममे

तुम बिन मेरी नही गति

अन्नि कुण्ड में होके भस्म

तुम हुई थी मेरी लिए सती....


शिव बिन जैसे शक्ति अधूरी

शक्ति बिन शिव आधे है

जनमो तक ना टूटेगे ये

जनम जनम के नाते है....


तुम ही मेरे संध्या हो गोरी

तुम ही मेरी प्रभात जी

वचन है मेरा ना छोड़ूगा

कभी तुम्हारा हाथ जी

सदा रहे है सदा रहेगे

गोरी शंकर साथ जी....


है गोरा पार्वती

है गोरा पार्वती

जी भोलेनाथ जी

जी भोले नाथ जी


ओ भोलेनाथ जी

ओ शम्भू नाथ जी

ओ भोलेनाथ जी

ओ शंकरनाथ जी


ओ मेरा भोला है

मेरे साथ साथ

मैं झूम झूम के नाचु


मैं झूम झूम के नाचु

अरे घूम घूम के नाचू


मेरा भोला हो मेरा भोला

मेरा भोला है

मेरे साथ साथ

मैं झूम झूम के नाचु


ओ भोलेनाथ जी

ओ शम्भू नाथ जी।पार्वती बोली शंकर से



पार्वती बोली शंकर से

पार्वती बोली शंकर से

सुनिये भोलेनाथ जी

रहना है हर एक जन्म में

मुझे तुम्हारे साथ जी

वचन दीजिये न छोड़ोगे

कब हमारा हाथ जी....


ओ भोलेनाथ जी

ओ शम्भू नाथ जी

ओ भोलेनाथ जी

ओ शंकरनाथ जी।


जैसे मस्तक पर चंदा है

गंगा बसी जटाओ में

वैसा रखना है अभिनाशी

मुझे प्रेम की छाँव में...


कोई नही तुमसा तीनो

लोको में दसो दिशाओ में

महलो से ज्यादा सुख हिया

कैलाश की खुली हवा में....


रहना है हर एक जन्म में

मुझे तुम्हारे साथ जी

वचन दीजिये न छोड़ोगे

कब हमारा हाथ जी....


ओ भोलेनाथ जी

ओ शम्भू नाथ जी

ओ भोलेनाथ जी

ओ शंकरनाथ जी।


देव हो तुम देवो के भोले

अमर हो अंतर यामी हो

भाग्यवान है हम त्रिपुरारी

आप हमारे स्वामी हो...


पुष्प विमानों से प्यारी

हमको नंदी की सवारी जी

युगों युगों से पार्वती

भोले तुमपे बलिहारी....


जब लाओ तुम ही लाना

जब लाओ तुम ही लाना

द्वारे मेरे बारात जी...


ओ भोलेनाथ जी

ओ भोलेनाथ जी

ओ शम्भू नाथ जी

ओ भोलेनाथ जी

ओ शंकरनाथ जी।


प्राण मेरे बस्ते है तुममे

तुम बिन मेरी नही गति

अन्नि कुण्ड में होके भस्म

तुम हुई थी मेरी लिए सती....


शिव बिन जैसे शक्ति अधूरी

शक्ति बिन शिव आधे है

जनमो तक ना टूटेगे ये

जनम जनम के नाते है....


तुम ही मेरे संध्या हो गोरी

तुम ही मेरी प्रभात जी

वचन है मेरा ना छोड़ूगा

कभी तुम्हारा हाथ जी

सदा रहे है सदा रहेगे

गोरी शंकर साथ जी....


है गोरा पार्वती

है गोरा पार्वती

जी भोलेनाथ जी

जी भोले नाथ जी


ओ भोलेनाथ जी

ओ शम्भू नाथ जी

ओ भोलेनाथ जी

ओ शंकरनाथ जी


ओ मेरा भोला है

मेरे साथ साथ

मैं झूम झूम के नाचु


मैं झूम झूम के नाचु

अरे घूम घूम के नाचू


मेरा भोला हो मेरा भोला

मेरा भोला है

मेरे साथ साथ

मैं झूम झूम के नाचु


ओ भोलेनाथ जी

ओ शम्भू नाथ जी।




भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "पार्वती बोली शंकर से (Paarvatee bolee shankar se lyrics in hindi) - Bhaktilok" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।

शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता है, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?

शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?

सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?

हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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