मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ
तू ही फकीर तू ही है राजा
तू ही है साईं तू ही है बाबा
साईनाथ, साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ
जिस जिस ने तेरा नाम लिया
तू हो लिया उसके साथ
इत् देखूं तो तू लागे कन्हैय्या
उत् देखूं तो दुर्गा मैय्या
नानक की मुस्कान है मुख पर
शान-ए-मोहम्मद भी है मुख पर
साईनाथ, साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ
राम नाम की है तू माला
गौतम वाला तुझ में उजाला
नीम तेरे की मीठी छाया
बदले हर चोले की काया
साईनाथ, साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ
तेरा दर है दया का सागर
सब मजहब भरते है गागर
पावन पारस तेरी आग
तेरा पत्थर कण कण राग
साईनाथ, साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ
तेरा मंदिर सब का मदीना
जो भी आये सीखे जीना
तू चाहे तो टल जाये घात
तू ही भोला तू ही नाथ
साईनाथ, साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
शिरडी के साईं बाबा को समर्पित यह भजन " साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ (sainath tere hazaron haath lyrics in hindi) - Bhaktilok" सबका मालिक एक होने के सिद्धांत को प्रतिपादित करता है। साईं बाबा का जीवन काल सादगी, प्रेम, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देता है। इस भजन की सरल पंक्तियां भक्त को सीधे बाबा के दिव्य आशीर्वाद और करुणा से जोड़ती हैं।
भजन का मुख्य भाव श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) का है। साईं बाबा अपने भक्तों को वचन देते हैं कि जो भी उनके द्वार पर आएगा, वह कभी खाली हाथ नहीं जाएगा। बाबा की उदी (भस्म) और उनके वचनों का स्मरण ही इस भजन का सार है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
साईं बाबा के भजनों के संकीर्तन से भक्तों के मन में धर्म-जाति के भेद से ऊपर उठकर प्राणी मात्र के प्रति प्रेम की भावना जागृत होती है। बाबा की पूजा में सादगी और शुद्ध अंतःकरण का विशेष महत्त्व है।
संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। साईं बाबा के भजन से पारिवारिक शांति प्राप्त होती है, मन के द्वेष और कलह दूर होते हैं और साधक में संतोष तथा धैर्य का विकास होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
साईं बाबा की आराधना के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से फलदायी है। साईं बाबा की मूर्ति या चित्र के सम्मुख दीप जलाकर, उदी का तिलक लगाएं और श्रद्धापूर्वक भजन गाएं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
शिरडी साईं बाबा की उपासना के दो मुख्य स्तंभ क्या हैं?
बाबा ने अपने भक्तों को 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) को जीवन का मूल आधार बनाने की शिक्षा दी थी।
साईं भजनों के संकीर्तन के लिए कौन सा दिन उत्तम है?
गुरुवार (गुरु दिवस) का दिन साईं बाबा के पूजन, व्रत और भजन संकीर्तन के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
साईं बाबा की 'उदी' का क्या महत्त्व है?
उदी बाबा की धूनी की पवित्र भस्म है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि उदी धारण करने से शारीरिक बीमारियां और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें