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भक्ति रस काव्य व भजन

सलाम उन शहीदो को जो खो गये लिरिक्स || Salaam un shaheedo ko jo kho gaya lyrics in hindi || Bhaktilok

57 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शहीदों की वीरता का काव्य: सैल्यूट

यह भजन शहीदों के साहस और बलिदान को समर्पित है, जो राष्ट्र के लिए अनमोल हैं।

सलाम उन शहीदो को जो खो गये,वतन को जगा कर जो खुद सो गये,वो थे लाडले अपनी मायो के पाले,मगर हो गये गोलियों के हवाले,आज़ादी के बदले जवानी लूटादि,वतन के लिया जान की बाजी लगा दी,हमारे थे अब देश के हो गये,वतन को जगा कर जो खुद सो गये,हिन्दू सिख मुसिलमान थे सलाम उनको जिनकी वो संतान थे,सलाम जो बात ये कह गये के बेटा गया है वतन तो रहे,जुड़ा हो के हम से वो खो गये,वतन को जगा कर जो खुद सो गये !!

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में शहीदों को सलाम करने की भावना व्यक्त की गई है। पहले चरण में 'सलाम उन शहीदो को जो खो गये' की पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि हम उन अमर अदम्य आत्माओं की याद करते हैं जिन्होंने अपना सर्वस्व वतन के लिए समर्पित कर दिया। 'वतन को जगा कर जो खुद सो गये' यह दर्शाता है कि ये शहीद अपने प्राणों की आहुति देकर देश को जागृति की ओर ले गए। इस तरह के बलिदान हमारे हृदयों में देशभक्ति और बलिदान की भावना को भरते हैं। यह स्पष्ट रूप से एक श्रद्धांजलि है, जो दर्शाती है कि वे केवल हमारे नहीं, बल्कि सम्पूर्ण देश के हैं। शहीदों का बलिदान केवल उनका व्यक्तिगत नहीं, बल्कि देश की उन्नति और स्वतंत्रता के लिए है।

दूसरे चरण में 'हिन्दू सिख मुसिलमान थे सलाम उनको जिनकी वो संतान थे' का उल्लेख किया गया है, जो धर्म की सीमाओं को पार कर एकता की भावना को उजागर करता है। यह दर्शाता है कि उन शहीदों ने न केवल अपनी पहचान बल्कि देश को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया है। 'जुड़ा हो के हम से वो खो गये' यह पंक्ति हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है, यह हमें याद दिलाती है कि शहीदों का बलिदान हमें और मजबूती प्रदान करता है। उनका उपदेश और वीरता हमें प्रेरित करते हैं कि हम भी उनके जैसे अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। यह गाना हमें अपने देश के प्रति श्रृद्धा और प्रेम से भर देता है।

इस भजन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह भावनात्मक और आध्यात्मिक दोनों तरह से गहराई में जाता है। इसमें न केवल त्याग की भावना है, बल्कि यह जीवन की अस्थिरता और कुर्बानी की महानता का भी प्रतीक है। शहीदों का बलिदान हमें विवेक और आत्मसमर्पण की प्रेरणा देता है। इसकी पुष्टि 'आज़ादी के बदले जवानी लूटादि' से होती है, जो यह दर्शाता है कि उन्होंने अपनी युवावस्था को अपनी मातृभूमि पर अर्पित कर दिया। यह भजन हमारे जीवन में भक्ति मार्ग का जीवंत उदाहरण भी पेश करता है, जिसमें हमें अपने पहचान और धर्मिक सीमाओं को पार कर एकता में रहना सिखाया जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन शहीदों के बलिदान की महत्ता को रेखांकित करता है। भारतीय इतिहास में शहीदों की गाथाएँ, विशेष रूप से स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, अत्यंत प्रेरणादायक हैं। महाभारत में भी, हमें ऐसे अनेक पात्र मिलते हैं जिन्होंने अपने धर्म और कर्तव्य की रक्षा के लिए अपार बलिदान दिए। इससे प्रेरित होकर गौरवमयी जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। इस भजन में संपूर्णता के साथ शहीदों की स्तुति करना हमें उनके प्रति श्रद्धा भाव से भर देता है और हमें एकजुटता का पाठ पढ़ाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, भावनात्मक स्थिरता और देशभक्ति की भावना मजबूत होती है। यह आत्मा को ऊर्जावान बनाता है और समाज में एकता और सहिष्णुता की भावना को जगाने में मदद करता है। इसे गाने से शहीदों के प्रति श्रद्धा प्रकट होती है और अनुकरणीय व्यवहार की प्रेरणा भी मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम को करना शुभ होता है। सुबह के समय, स्वच्छता के साथ एक दीपक जलाने और पुष्प चढ़ाने से भक्ति भाव में वृद्धि होती है। सही मुद्रा में बैठकर, मन को शांत कर और समर्पण के भाव से इसे गाने पर मानसिक शांति प्राप्त होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य शहीदों के बलिदान और साहस की सराहना करना है, जो उन्होंने अपने देश की स्वतंता के लिए किया।

क्या यह भजन केवल जनरलों के लिए है?

नहीं, यह भजन सभी जातियों और धर्मों के शहीदों के बलिदान को स्वीकार करता है, यह सभी के प्रति एकता और सम्मान का संकेत है।

इस भजन को कब गाना चाहिए?

इस भजन को सुबह या शाम के समय गाना चाहिए, ताकि यह दिन की शुरुआत या अंत में प्रेरणा और ऊर्जा प्रदान करे।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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