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भक्ति रस काव्य व भजन

शंकर भोलानाथ है हमारा तुम्हारा हमारा तुम्हारा लिरिक्स || shankar bholaanaath hai hamaara tumhara hamaara tumhara lyrics in hindi || Bhaktilok

79 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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महाकाल की कृपा से साक्षात्कार की भावना

यह भजन बाबा भोलानाथ की आराधना का अद्भुत माध्यम है, जो भक्तों के हृदय में श्रद्धा और भक्ति का संचार करता है।

शंकर भोलानाथ है हमारा तुम्हारा हमारा तुम्हारा,महाकाल की नगरी मे पाउ जनम दोबारा,इस नगरी के कंकर पथर हम बन जाए,भक्त हमारे उपर चड़कर मंदिर जाए,भक्तजनो के पाव पड़े तो हो उद्धार हमारा,बाबा भोलानाथ है हमारा तुम्हारा,जब भी ये तन त्यागु त्यागु क्षिप्रा तट पर ,इतना करना स्वामी ओर मरु मर्घत पर ,मेरी भसमी चड़े आप पर पाउ प्यार तुम्हारा,शंकर भोलानाथ है हमारा तुम्हारा,जय भोला भंडारी जय गौरा त्रिपुरारी,रखियो लाज हमारी सब जाग के हितकारी,मन की इक्च्चा पूरण होतो होवे वारा न्यारा,बाबा भोलानाथ है हमारा तुम्हारा,शंकर भोला नाथ है हमारा तुम्हारा हमारा तुम्हारा,महाकाल की नगरी मे पाउ जनम दोबारा

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय भगवान शिव, जिन्हें शंकर और भोला नाथ के नाम से भी जाना जाता है, के प्रति भक्ति और श्रद्धा दर्शाने का है। पहले ही पंक्ति में भोलानाथ को हमारे और आपके रूप में पेश किया जाता है, जिसमें यह दिखाया गया है कि शिव हमारे व्यक्तिगत जीवन में एक दुसरे से जुड़े हुए हैं। महाकाल की नगरी, उज्जैन, का जिक्र इस बात का प्रतीक है कि यहां शिव की विशेष कृपा सदैव बनी रहती है। भक्त यह प्रार्थना करते हैं कि इस नगरी के पत्थर और कंकर भी भक्तों के लिए रूपांतरित हो जाएं ताकि भक्त उनके चरणों में समर्पित हो सकें। इस तरह का भावार्थ भक्त के समर्पण और श्रद्धा का स्वरूप है, जिसमें शिव की उपासना की जा रही है।

भावनात्मक दृष्टिकोण से, यह भजन भक्तों को उनके आध्यात्मिक उद्देश्य तक पहुंचने के लिए प्रेरित करता है। जब भक्त कहते हैं 'जब भी ये तन त्यागु', वे मृत्यु के बाद फिर से जन्म लेने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, जिससे वे शिव की कृपा पा सकें। यह दर्शाता है कि भक्त किसी भी स्थिति में शिव के प्रति अडिग निष्ठा रखते हैं, चाहे वह जीवन हो या मृत्यु। इसके साथ ही, भक्त की भस्म (रुद्राक्ष का उपहार) चढ़ाने की इच्छा प्रकट करती है कि वे अपनी भक्ति के माध्यम से भगवान के निकट जाना चाहते हैं। उनका यह साधना केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि दूसरों की भलाई के लिए भी है, जैसे इस भजन में 'मन की इक्च्चा पूरण हो' का उलेख है।

इस भजन में भक्ति मार्ग (Bhakti marg) की गहराई को विशेष रूप से समझाया गया है। भक्त शिव को एक सच्चे मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं, जो दुःख और कठिनाइयों से उबारते हैं। शिव का नाम बोलते समय, भक्त स्वयं को शिव के साथ जोड़ते हैं, जो समर्पण, प्रेम, और सच्चे अद्वितीय अनुभव की आवश्यकता दर्शाता है। 'जय भोला भंडारी' का उच्चारण करता हुआ भक्त संदेश भेजता है कि शिव की कृपा से ही सच्चा उद्धार प्राप्त हो सकता है। इस भक्ति का मार्ग अनंत और असीम है, जो मोक्ष के लिए आवश्यक माध्यम है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन महाकाल और भगवान शिव की महिमा को व्यक्तिगत रूप से बताने का एक माध्यम है। शिव पुराण तथा अन्य ग्रंथों में शिव को सृष्टि का संहारक, पालनहार, और शरीर के रुप में उद्धारक माना गया है। इसे गंगाधर शिव का गुण मानते हुए, भक्त उनकी कृपा के लिए सदा समर्पण करते हैं। साथ ही, यह भजन भक्तों को प्रभु के प्रति निष्ठा का संदेश देता है, जो पौराणिक कथाओं में विशेष स्थान रखता है। भक्तजन शिव की उपासना करते हुए यही मानते हैं कि भगवान शिव की कृपा से सभी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का नियमित जाप मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति, और नकारात्मकता से मुक्ति की दिशा में सहायक होता है। मानसिक तनाव और चिंता को दूर करने में यह भजन विशेष रूप से प्रभावी है। शिव की कृपा से भक्त अपने कष्टों को दूर करने और जीवन में सहजता लाने के लिए प्रेरित होते हैं। आत्मा की शुद्धि और भक्ति में वृद्धि इसके माध्यम से होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का उच्चारण सुबह या शाम के समय करना सबसे उत्तम रहता है। पूजा के पहले शिवलिंग पर एक दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं। मन में पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ इस भजन का पाठ करें। सही मुद्रा में बैठना और ध्यान केंद्रित करना भी आवश्यक है। भक्तों को इस समय के दौरान, अपने मन के विचारों को शिव में समर्पित करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का सर्वोत्तम समय कब है?

इस भजन का सच्चे मन से जाप सुबह सूर्योदय से पहले या शाम को करना चाहिए। यह समय ध्यान और भक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

क्या यह भजन किसी विशेष पूजा के समय गाया जा सकता है?

हाँ, यह भजन महादेव की आराधना के समय, जैसे शिवरात्रि या किसी विशेष पूजा में गाने से शिव की कृपा को प्राप्त करने में सहायक होता है।

इस भजन का अर्थ क्या है?

यह भजन भोलेनाथ की महिमा को वर्णित करता है। भक्त अपने हृदय से भगवान शिव की कृपा और संरक्षण की कामना करते हैं, जो सभी मुश्किलों को समाप्त करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 21 Aug 2026

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