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भक्ति रस काव्य व भजन

श्री महालक्ष्म्यष्टकम्न नमस्तेस्तू महामाये श्रीपिठे सूरपुजिते (shree mahaalakshmyashtakam namastestu mahaamaaye shreepithe surapujite lyrics in hindi) - लिरिक्स

69 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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महालक्ष्मी का अष्टक: समृद्धि और कल्याण की स्तुति

यह अष्टक श्री महालक्ष्मी की भक्ति में समर्पित है, जो धन्य और सुखों का दाता हैं।

श्री महालक्ष्म्यष्टकम्न नमस्तेस्तू महामाये श्रीपिठे सूरपुजिते (shree mahaalakshmyashtakam namastestu mahaamaaye shreepithe surapujite lyrics in hindi)अथ श्री इंद्रकृत श्री महालक्ष्मी अष्टक॥ श्री महालक्ष्म्यष्टकम् ॥श्री गणेशाय नमःनमस्तेस्तू महामाये श्रीपिठे सूरपुजिते ।शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ १ ॥नमस्ते गरूडारूढे कोलासूर भयंकरी ।सर्व पाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ २ ॥सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्ट भयंकरी ।सर्व दुःख हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥३ ॥सिद्धीबुद्धूीप्रदे देवी भुक्तिमुक्ति प्रदायिनी ।मंत्रमूर्ते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ४ ॥आद्यंतरहिते देवी आद्यशक्ती महेश्वरी ।योगजे योगसंभूते महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ५ ॥स्थूल सूक्ष्म महारौद्रे महाशक्ती महोदरे ।महापाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ६ ॥पद्मासनस्थिते देवी परब्रम्हस्वरूपिणी ।परमेशि जगन्मातर्र महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ७ ॥श्वेतांबरधरे देवी नानालंकार भूषिते ।जगत्स्थिते जगन्मार्त महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ८ ॥महालक्ष्म्यष्टकस्तोत्रं यः पठेत् भक्तिमान्नरः ।सर्वसिद्धीमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥ ९ ॥एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनं ।द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्य समन्वितः ॥१०॥त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रूविनाशनं ।महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ॥११॥॥इतिंद्रकृत श्रीमहालक्ष्म्यष्टकस्तवः संपूर्णः ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस अष्टक में श्री महालक्ष्मी की महिमा का वर्णन किया गया है, जो समृद्धि, खुशियाँ और शांति का प्रतीक हैं। पहले श्लोक में कहा गया है कि देवी महालक्ष्मी के सामने नमस्कार करते हैं, जो साक्षात् देवी हैं, जिनके हाथों में शंख, चक्र और गदा है। इस श्लोक के माध्यम से भक्त देवी के दिव्य स्वरूप को स्मरण करते हुए उनकी कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं। श्लोकों में देवी के विभिन्न गुणों का वर्णन करते हुए, उन्हें सर्वज्ञ, सर्ववर, तथा सर्वदुष्ट भयंकरी कहा गया है। यह दर्शाता है कि वे सभी अज्ञान और दुखों से मुक्ति दिलाने में सक्षम हैं।

महालक्ष्मी का जो गुण है, वह केवल भौतिक धन या संपत्ति नहीं, बल्कि सभी प्रकार की सुख-सुविधाओं का दाता है। चार श्लोकों में सूचीबद्ध विभिन्न विशेषताएँ जैसे 'सिद्धी', 'बुद्धि', 'भूमि' और 'मुक्ति' का बोध कराती हैं कि देवी केवल भौतिक समृद्धि ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विकास का भी स्रोत हैं। भक्ति भाव से जो लोग इस अष्टक का पाठ करते हैं, उन्हें जीवन में सफलता, शांति और संतोष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही, माता महालक्ष्मी की कृपा से प्रत्येक व्यक्ति की सभी कठिनाइयाँ दूर होती हैं।

इस भजन में भक्ति मार्ग का भी उल्लेख है, जिसमें भक्त Mata Lakshmi की शरण में जाकर ईश्वर में विश्वास के साथ अपने दुखों और कठिनाइयों का समाधान पाते हैं। अष्टक का पाठ करते समय भक्त को ध्यान की ऐसी विधियाँ अपनानी चाहिए, जो उन्हें मानसिक थकान और तनाव से मुक्ति दिलाएं। ध्यान के माध्यम से भक्त माता की कृपा प्राप्त करता है और उनके भक्ति मार्ग की ओर अग्रसर होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

महालक्ष्मी की कृपा का महत्व हिंदू धर्म में अत्यधिक है, विशेषकर देवी भागवत और रामायण में। महालक्ष्मी का नाम 'श्री' से भी लिया जाता है, जिसका अर्थ है सम्पूर्णता और समृद्धि। यह अष्टक भगवती महालक्ष्मी की विशेष कृपा को दर्शाता है। पुराणों में वर्णित है कि माता लक्ष्मी जहां होती हैं, वहां धन, सुख और समृद्धि का वास होता है। यह अष्टक न केवल भौतिक समृद्धि की कामना करता है, बल्कि आध्यात्मिक विकास की प्रेरणा भी देता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। महालक्ष्मी अष्टकम का पठन करने से मानसिक शांति, समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। यह भजन विशेष रूप से धन की कामना करने वाले भक्तों के लिए शक्तिशाली है। नियमित रूप से इस स्तोत्र का जप करने से भक्त अपनी परेशानियों और कठिनाइयों से मुक्ति पाते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस अष्टक का पाठ ideally सुबह के समय किया जाना चाहिए, जब मन शांत हो। पूजा के दौरान एक दीया जलाना, माता महालक्ष्मी को फल, मिठाई और फूलों का भोग अर्पित करना चाहिए। पाठ करते समय मन को एकाग्र करके श्रद्धा और भक्ति के साथ ध्यान लगाना आवश्यक है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या श्री महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ केवल धन के लिए किया जा सकता है?

नहीं, यह अष्टक केवल धन की प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि मानसिक शांति, सुख, और समृद्धि के लिए भी है।

कितनी बार इस अष्टक का पाठ करना चाहिए?

भक्तों को विशेष अवसरों पर एक बार या नित्य पढ़ने की सलाह दी जाती है। एक बार उपासना से ही सभी जरूरतों की पूर्ति होती है।

क्या इस अष्टक के पाठ से शत्रुओं से सुरक्षा मिल सकती है?

जी हाँ, महालक्ष्मी अष्टकम का त्रिकाल में पाठ करने से भक्त शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है और सुरक्षा का अनुभव करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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