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भक्ति रस काव्य व भजन

श्यामा आन बसों वृन्दावन में मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में लिरिक्स (shyaama aan basso vrindaavan mein meree umar beet gayee gokul mein lyrics in hindi) - bhaktilok

76 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम सुंदर की वृंदावन लीला का भजन

यह भजन भक्तिपूर्वक श्री कृष्ण की लीलाओं का बखान करता है। प्रेम और भक्ति में डूबकर गाएं।

श्यामा आन बसों वृन्दावन में, मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में ।श्यामा रस्ते में बाग बना जाना, फुल बीनुगी तेरी माला के लिए ।तेरी बाट निहारूं कुंजन में, मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में ॥श्यामा रस्ते में कुआ खुदवा जाना, मैं तो नीर भरुंगी तेरे लिए ।मैं तुझे नहालाउंगी मल मल के, मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में ॥श्यामा मुरली मधुर सुना जाना, मोहे आके दरश दिखा जाना ।तेरी सूरत बसी है अंखियन में, मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में ॥श्यामा वृन्दावन में आ जाना, आकर के रास रचा जाना ।सूनी गोकुल की गलियन में, मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में ॥श्यामा माखन चुराने आ जाना, आकर के दही बिखरा जाना ।बस आप रहो मेरे मन में,

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की केंद्रीय थीम श्री कृष्ण की दुर्लभ लीलाओं और उनके अद्वितीय आकर्षण का वर्णन करती है। भजन में गायक श्याम यानी श्री कृष्ण को वृंदावन में बसने का आमंत्रण देते हैं और अपनी उम्र को गोकुल में बिताने की प्रार्थना करते हैं। यहाँ, 'रस्ते में बाग बना जाना' जैसी पंक्तियाँ दर्शाती हैं कि भक्ति का मार्ग सजगता और समर्पण से भरा होता है। गोकुल का संदर्भ हमें कृष्ण के बचपन की प्यारी लीलाओं की याद दिलाता है, जैसे कि माखन चुराना और गौओं के साथ खेलना। यह श्लोक भक्ति के उस स्तर को दर्शाता है, जहाँ भक्त धीरे-धीरे कृष्ण की संज्ञान में डूब जाता है, और उसकी हर लीला में अपना मन और आत्मा डाल देता है।

भावार्थ के रूप में, यह भजन अपने आपको कृष्ण की शरण में सौंपने का संकेत देता है। 'तेरी सूरत बसी है अंखियन में' इस पंक्ति में विचारशीलता है कि भक्त की आँखें केवल कृष्ण के दर्शन को समर्पित हैं। यहाँ भक्त कृष्ण के आलिंगन और प्रेम से भरी लीलाओं की जिक्र करता है। वह बस यही चाहता है कि कृष्ण उसके मन में सदा निवास करें। प्रेम और समर्पण की ये अभिव्यक्तियाँ भक्त के मन को शांति और आनंद प्रदान करती हैं, उसे संसार की चिंताओं से दूर ले जाती हैं। यह अनंत प्रेम की खोज का एक अद्भुत और आकर्षक चित्रण है।

इस भजन में भक्ति मार्ग के महत्व को स्पष्ट किया गया है। भक्त की संकल्प शक्ति और सच्चे प्रेम की तक़दीर उसे भगवान के सबसे निकट लाती है। 'मुरली मधुर सुना जाना' यह संकेत करता है कि कृष्ण की संगीत और लीला में अनंत आनंद और शांति है। यह तुम्हारे और कृष्ण के बीच में प्रेम का गहरा संबंध स्थापित करता है, जो केवल श्रद्धा और भक्ति के माध्यम से ही संभव है। इस प्रकार, यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति करने के लिए केवल कृष्ण के प्रति प्रेम होना आवश्यक है, और इस प्रेम के माध्य से हम जीवन की उच्चतम उपलब्धियों को प्राप्त कर सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का सांस्कृतिक और धार्मिक पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण स्थान है, जो विशेष रूप से भक्तिवेदांत परंपरा से संबंधित है। पुराणों का संदर्भ लेते हुए, भगवान श्री कृष्ण के जीवन के विविध लीलाओं का वर्णन किया जाता है, जो भागवत पुराण और गीता में विस्तृत रूप से बताई गई हैं। ऐसे में यह भजन भक्तों के लिए एक माध्यम बन जाता है, जिससे वे कृष्ण की लीलाओं में खो सकते हैं। कृष्ण शोभा और प्रेम के प्रतीक हैं, जिससे भक्त उनके गुणों का गुणगान करते हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन प्राप्त होता है। यह मन को स्थिर करता है और भक्त के हृदय में प्रेम और भक्ति का संचार करता है। शांति, खुशी और समर्पण की अनुभूति होती है, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से अध्यात्मिक उन्नति और कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सूर्योदय के समय या रात्रि के समय करें, जब वातावरण शांत हो। एक दिया जलाएं और कृष्ण को फूलों की माला अर्पित करें। समर्पण भाव से बैठकर भजन गाएं। मन को स्थिर रखने का प्रयास करें और केवल कृष्ण की लीला में ध्यान केंद्रित करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन में कृष्ण की कौन-कौन सी लीलाओं का उल्लेख है?

इस भजन में माखन चुराने, रास रचाने, और बागों में खेलने की लीलाओं का उल्लेख है। ये लीलाएँ कृष्ण के छोटेपन में उनकी अनुपम शरारतों को दर्शाती हैं।

इस भजन का अर्थ क्या है?

भजन का अर्थ है श्री कृष्ण को वृंदावन में बसाने की प्रार्थना। यह भक्त की गहरी भावना और श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम दर्शाता है।

क्या इस भजन का पाठ करने से कोई विशेष लाभ होता है?

जी हाँ, इस भजन का नियम से पाठ करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक प्रगति और भक्ति में वृधि होती है। भक्त को कृष्ण की कृपा का अनुभव होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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