मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
तु राजा की राज दुलारी में सर्फ लगोटे आला सु (too raaja kee raaj dulaaree mein sarf lagote ala su lyrics in hindi)
तु राजा की राज दुलारी में सर्फ लगोटे आला सु,
भांग रगड के पिआ करू में कुण्डी सौटै आला सु,
में अवधुत दर्शीनी बाबा राग देख के डर जागी,
सौ सौ नाग रहे गल में तु नाग देख के डर जागी,
में राख घोल के पिआ करू मेरा भाग देख के डर जागी,
धरती उपर सोया करु मेरी सहत देख के डर जागी,
एक कमण्डल एक कटोरा में फुटे लोटे आला सु,
भांग रगड के..........
तेरे सौ सौ दासी दास रहे मेरे एक भी दासी दास नही,
महला आला सुख चहिए अडे संतरज चौपड तास नही,
तु बागा की कोयल से अडे बर्फ पडे हरि घास नही ,
साल दुसाले मांगेगी मेरे कम्बल तक भी पास नही,
तु साहुकार गुजारे आली मे बिल्कुल टोटे आला सु,
भाग रगड के .....
तु पालकियां में सैर करे में पैदल सवारी करया करु,
तु महलो मे रहने वाली में बिन घरबारी रहया करु,
प्रर्वत उपर लगा समाधी मे अटल अटारी रहया करू,
तैने बडिया भोजन मिले खान ने में पेट पुजारी रहया करू,
तैने बदडा चाहिए जुल्मों वाल मे लम्बे चौटे आला सु,
भाग रगड के.......
मे कहरा सु पार्वती तैने बह्या करवाना ठीक नहीं,
मेरे संग मे बच्चों आला खेल खिलाना ठीक नहीं,
में भांग रगड के पिआ करू मैने तैल पिलाना ठीक नहीं,
मेरी जटा मे गंग बहे मैने मोड बधाना ठीक नहीं,
माघेराम बोझ मरजागी मे जबर भरोटे आला सु,
भ़ाग रगड के पिआ करु में कुंडी सौटे आला सु,
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "तु राजा की राज दुलारी में सर्फ लगोटे आला सु (too raaja kee raaj dulaaree mein sarf lagote ala su lyrics in hindi) - लिरिक्स" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें