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भक्ति रस काव्य व भजन

उच्चेआ पहाड़ा वाली माँ, हो... जदों तेरा बुलावा आवे लिरिक्स || Uche pahaada vaalee maan, ho...jadon tera bulaava aave lyrics in hindi || Bhaktilok

40 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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उच्चेआ पहाड़ा वाली माँ की भक्ति स्तुति

भक्ति भाव से उच्चेआ पहाड़ा वाली माँ का जाप करें और जीवन में सुख-शांति पाएँ।

उच्चेआ पहाड़ा वाली माँ, हो... जदों तेरा बुलावा आवे,दिल दे तार हिलावे, मैनु बड़ा चंगा लगदा, मैनु बड़ा चंगा लगदाचंगा लगदा मेरी माँ के सानु बड़ा चंगा लगदाचंगा लगदा मेरी माँ के सानु बड़ा चंगा लगदाउच्चेआ पहाड़ा वाली माँ, हो... जदों बच्च्ड़े चदन चड़ाइयाँ,करदे नेक कमाईयां, मैनु बड़ा चंगा लगदा, मैनु बड़ा चंगा लगदाचंगा लगदा मेरी माँ के सानु बड़ा चंगा लगदाचंगा लगदा मेरी माँ के सानु बड़ा चंगा लगदाउच्चेआ पहाड़ा वाली माँ, हो... जदों ठंडिआ चलन हवावांकालिआं छान घटावां, मैनु बड़ा चंगा लगदा, मैनु बड़ा चंगा लगदाउच्चेआ पहाड़ा वाली माँ, हो... जदों भेटां गान दुलारे,अम्मिये बोलें तेरे जयकारे, मैनु बड़ा चंगा लगदा, मैनु बड़ा चंगा लगदातेरे दर ते लगदे मेले, तेरे दर ते लगदे मेलेकंजक बन्न के तू खेले, मैनु बड़ा चंगा लगदातेरे दर ते वजदे नगाड़े, अम्मिये दर ते वजदे नगाड़ेनच्दे चन्न ते तारे, मैनु बड़ा लगदा मेरी माँउच्चेआ पहाड़ा वाली माँ, हो... तेरा दर है जग तो निरालादेखे भागा वाला, मैनु बड़ा चंगा लगदा, मैनु बड़ा चंगा लगदाउच्चेआ पहाड़ा वाली माँ, तेरे चरना च कल्याणीवग्गे गंगा दा पानी, मैनु बड़ा चंगा लगदा, मैनु बड़ा चंगा लगदाउच्चेआ पहाड़ा वाली माँ, हो.. तेरा नाम है अतुल प्यारासब दा तरन हारा, मैनु बड़ा चंगा लगदा, मैनु बड़ा चंगा लगदाउच्चेआ पहाड़ा वालिये मैया, जदों तेरा बुलावा आवे,

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में 'उच्चेआ पहाड़ा वाली माँ' का विशेष संदर्भ है, जो देवी रूप में बसी हुई है। यह माँ पहाड़ों की ऊंचाई, शक्ति और संरक्षण का प्रतीक है। भजन की आरंभिक पंक्तियाँ, 'जदों तेरा बुलावा आवे', भक्तों की उस अवस्था को दर्शाती हैं, जब उन्हें माँ द्वारा भीतर से बुलावा सुनाई देता है। यह आह्लादित भावनाएँ जैसे दिल के तारों का हिलना, सच्ची भक्ति का संकेत देती हैं। 'मैनु बड़ा चंगा लगदा' का अर्थ है कि माँ की उपासना से जो सुख और आनंद प्राप्त होता है, वह अनुपम है। यह भजन ऐसा भाव उत्पन्न करता है कि जब भक्त नेक कार्य करने की प्रेरणा पाता है, तब माँ की कृपा से जीवन के सभी कार्य सहजता से संपन्न होते हैं।

भजन की भावनाएँ गहनता में जाकर भक्तों को यह समझाती हैं कि जीवन में विभिन्न समय पर जब भी कठिनाइयाँ आती हैं, तो माँ की शरण में जाने से ही हर संकट का समाधान होता है। 'ठंडिआ चलन हवावां' इन्हीं प्राकृतिक तत्वों का संदर्भ देता है, यह दर्शाता है कि जब भी ठंडी हवाएँ चलती हैं, तब माँ की शरण में पहुँचना सुकून देता है। विषम परिस्थितियों में जब भक्त गेहेरे में जाते हैं, तब माँ की ममता और संरक्षण की भावना उन्हें स्थिरता और साहस प्रदान करती है। इस प्रकार के भजन ने भक्त के हृदय में माँ के प्रति प्रेम और समर्पण को और भी प्रगाढ़ किया है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का एक गहरा दर्शन प्रस्तुत किया गया है। भक्त जब 'तेरा नाम है अतुल प्यार' कहा जाता है, तब यह श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है कि माँ का नाम ही भक्त की सबसे बड़ी संपत्ति है। 'सब दा तरन हारा' की पंक्ति स्पष्ट करती है कि माँ सभी को बचाने वाली हैं, उनके चरणों में अगर भक्त ने आत्मसमर्पण किया तो वे सभी दुखों से मुक्त हो सकते हैं। भक्ति मार्ग पर चलने के लिए यह आवश्यक है कि भक्त अपनी समर्पण की भावना को मजबूत बनाए और निरंतर माँ की महिमा का जाप करे। यही असली भक्ति है, जो भक्त को आत्मज्ञान और उच्चतम सुख की ओर ले जाती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उपासना की यह विधि देवी भागवती, पार्वती या दुर्गा जैसे शक्तिशाली रूपों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करती है। महाभारत और पुराणों में माँ की महिमा का विशेष वर्णन किया गया है, जहाँ संतान की रक्षा और भक्ति की अवहेलना ना होने के वादे की चर्चा होती है। इसके अतिरिक्त, 'गंगा दा पानी' का संदर्भ जल तत्व की पवित्रता और देवी मां के स्थान को दर्शाता है। 'तेरे दर ते लगदे मेले' की पंक्तियाँ यह दिखाती हैं कि माँ की आराधना मात्र व्यक्ति को नहीं, अपितु समाज और समुदाय को भी एकजुट करती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। उच्चेआ पहाड़ा वाली माँ का यह भजन मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर पर अनेक लाभ प्रदान करता है। सबसे पहले, निरंतर इस भजन का जप करने से मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त होता है। ये भक्तों को ऊर्जा प्रदान करता है और नकारात्मकता को दूर करता है। भक्ति के स्वर से आत्मा की शुद्धि होती है और यह समाज में प्रेम और सहिष्णुता की भावना भी जागृत करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप उचित समय सुबह सूर्योदय के बाद या संध्या समय किया जा सकता है। ध्यान करें कि आप एक स्वच्छ और शांत स्थान पर बैठें। इसके साथ ही, एक दीया जलाकर माँ की तस्वीर के समक्ष कुमकुम, फूल या फल अर्पित करें। मन और हृदय पास हो तो इस भजन का पाठ करें। यही सही साधना का तरीका है, जो भक्त को अधिक से अधिक लाभ पहुँचेगा।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

उच्चेआ पहाड़ा वाली माँ का अर्थ क्या है?

उच्चेआ पहाड़ा वाली माँ का अर्थ है वह माता जो पहाड़ों की ऊँचाई और शक्तियों का प्रतीक है, जो भक्तों की रक्षा करती हैं।

इस भजन का पाठ किस समय करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह के समय सूर्योदय से पहले या संध्या समय करना अत्यंत शुभ है, क्योंकि ये समय भक्त के मन को शांत और ध्यान केंद्रित करता है।

क्या इस भजन से कोई विशेष लाभ है?

हाँ, इस भजन के पाठ से मानसिक शांति, आत्मबल, और सकारात्मकता में वृद्धि होती है, जो जीवन की कठिनाइयों को दूर करने में सहायक सिद्ध होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 18 Aug 2026

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