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भक्ति रस काव्य व भजन

उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती लिरिक्स || Utho Jawan desh kee basundhara pukarti hai lyrics in hindi || Bhaktilok

101 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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देशभक्ति की भावना: उठो जवान माँ पुकारती

महान देशभक्ति के उद्धोष में, अपनी मातृभूमि की आराधना करें।

उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती,ये देश है पुकारता, पुकारती माँ भारती ।रगों में तेरे बह रहा है खून राम-श्याम का,जगदगुरु गोविन्द और राजपूती शान का ।तू चल पड़ा तो चल पड़ेगी साथ तेरे भारती,ये देश है पुकारता,पुकारती माँ भारती ॥है शत्रु दनदना रहा चहुँ दिशा में देश की,पता बता रही हमे किरण किरण दिनेश की ।वो चक्रवर्ती विश्वजयी मातृभूमी हारती,ये देश है पुकारता,पुकारती माँ भारती ॥उठा कदम,बढ़ा कदम,कदम-कदम बढ़ाये जा,कदम-कदम पे दुश्मनों के धड़ से सर उड़ाए जा ।उठेगा विश्व हाँथ जोड़ करने तेरी आरती ,ये देश है पुकारता,पुकारती माँ भारती ॥उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का केंद्रीय विचार मातृभूमि की महत्ता और उस पर अपना फर्ज अदा करने के लिए प्रेरणा है। 'उठो जवान' की उद्घोषणा हमें जागरूक करती है कि युवा पीढ़ी को अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए सजग रहना चाहिए। यहाँ 'माँ भारती' का उल्लेख केवल भौगोलिक देश नहीं, बल्कि एक व्यापकता में भारतीय संस्कृति, इतिहास, और हमारे पूर्वजों का अपार बलिदान व्यक्त करता है। 'तेरे खून में बह रहा राम-श्याम का' पंक्ति हमें यह याद दिलाती है कि हम सबके पास उन महान विभूतियों का रक्त है जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। यह भावनाएँ न केवल देशप्रेम का प्रतीक हैं, बल्कि हमारे अंदर की धार्मिकता और भावना की भी तो पुष्टि करती हैं।

भजन में 'उठा कदम, बढ़ा कदम' का प्रयोग युवाओं को साहस और प्रेरणा प्रदान करता है। यह व्यक्ति को न केवल आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है, बल्कि यहाँ शत्रुओं से मुकाबले करने का भी संदेश दिया गया है। यह भावना है कि जब हम अपने कर्तव्यों की ओर कदम बढ़ाते हैं, तो राष्ट्र भी हमारे साथ चलता है। 'कदम-कदम पे दुश्मनों के धड़ से सर उड़ाए जा' पंक्ति एक प्रकार की शौर्यता को जागृत करती है, जिसमें भक्त परिलक्षित होता है कि जब वह अपने देश की रक्षा करता है, तब उसकी सच्ची महानता प्रदर्शित होती है।

इस भजन में भारतीय संस्कृति की भक्ति मार्ग को साझा किया गया है, जिसमें केवल भक्ति की बात नहीं है, बल्कि कर्तव्य का भी उल्लेख है। यह भक्ति का मार्ग उस समय महत्वपूर्ण होता है जब हम अपने देश की सुरक्षा के लिए तत्पर होते हैं। यहाँ का संदेश यह है कि हम केवल भक्ति नहीं करें बल्कि कार्य भी करें, जो हमें अपने देश की मिट्टी से जोड़ता है। यह भक्ति और कर्म का समन्वय हमें सही मायनों में एक सच्चा भक्त बनाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भारतीय पौराणिक कथाओं और ऐतिहासिक घटनाओं में इस प्रेरणादायक भावना का गहरा महत्व है। महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथों में भी मातृभूमि के प्रति भक्ति और उस पर अपने कर्तव्यों का पानी का महत्व बताया गया है। यह भजन हमें उन संस्कारों की याद दिलाता है, जो हमारे पूर्वजों ने हमें सिखाए, और यह हमें जागरूक करता है कि भक्ति केवल पूजा में नहीं, बल्कि कार्य में भी होनी चाहिए। हमारा धर्म है कि हम अपने देश की रक्षा करें और इसकी समृद्ध संस्कृति को आगे बढ़ाएं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन को गाने के कई मानसिक, शारीरिक, और आध्यात्मिक लाभ हैं। यह मानसिक तनाव को कम करता है, आत्मविश्वास को बढ़ाता है, और हमारे मन में मातृभूमि के प्रति सच्चे प्रेम की भावना जगाता है। नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से व्यक्ति में ऊर्जावानता और एकजुटता का अनुभव होता है। यह भक्ति, साहस, और स्वाभिमान की भावना को प्रबल करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह-सुबह या संध्या समय करना सबसे उपयुक्त होता है। इस दौरान एक दीपक प्रज्वलित करें और मातृभूमि के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करें। बैठने की मुद्रा ऐसी होनी चाहिए जिसमें आप ध्यान केंद्रित कर सकें और मन में देशवासियों की रक्षा की भावना को जागरूक कर सकें। इस समय में किसी गहरी भावना से भरपूर मनोदशा में रहना अनिवार्य है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का अर्थ क्या है?

यह भजन मातृभूमि की पुकार और देश प्रेम का संदेश देता है। यह युवाओं को अपने कर्तव्यों की याद दिलाता है।

क्यों इस भजन को गाना चाहिए?

इस भजन का गाना हमें राष्ट्र प्रेम की भावना से भर देता है और आंतरिक शक्ति प्रदान करता है।

इस भजन के द्वारा क्या लाभ होते हैं?

यह भजन मानसिक तनाव को कम करता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और मातृभूमि के प्रति प्रेम प्रकट करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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