आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२१ PM | सूर्यास्त: ०५:४७ AM
भक्ति रस काव्य व भजन

सुनने के पुकार माँ दौड़ चली तू आई रण मे काली माँ काली (sunane ke pukaaro maan daudee chalee too aai ran mein kaalee maa kaali lyrics in hindi) - Bhaktilok

65 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

काली देवी का रण पर मंगलकारी आगमन

इस भजन में माँ काली की शक्ति और रक्षात्मक रूप का गुणगान किया गया है, जिससे भक्तों को उत्साह मिलता है।

सुनने के पुकार माँ दौड़ चली तू आई रण मे काली माँ काली चंड मुंड को मार गिराया मुंडे माल का हार बनाया आई आंधी काली आई रण मे काली माँ काली...2 रक्त बीज का सिर है उड़ाया रूप भयंकर आज दिखाया आई बन विकराली आई रण मे काली माँ काली...2 लकी चरण में शीश झुकावे प्रतिदिन मैया ध्यान लगावे आई मां मेरी काली ये काली आई रण मे काली माँ काली...2

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में माँ काली के दिव्य स्वरूप को प्रस्तुत किया गया है, जो अपने भक्तों की पुकार सुनकर रणभूमि में दौड़ती हुई आती हैं। 'सुनने के पुकार' इस पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि माँ काली अपने भक्तों की सहायता के लिए सदैव तत्पर हैं। रण में उनकी उपस्थिति, 'चंड मुंड को मार गिराया' जैसे अंश दर्शाते हैं कि माँ काली न केवल कल्याणकारी हैं, बल्कि वे अन्याय और असत्य का नाश भी करती हैं। भक्ति में उनकी उपासना से भक्तों को शक्ति और साहस मिलता है। माँ काली का रूप विकराली और भयावह है, जिससे शत्रु डरते हैं, और भक्त उनके चरणों में शीश झुकाते हैं। ये सभी भावनाएँ भजन के माध्यम से गहराई तक पहुंचती हैं।

इस भजन की भावार्थ में एक गहन आध्यात्मिक संदर्भ छिपा हुआ है। 'लकी चरण में शीश झुकावे' का अर्थ है कि भक्त अपनी हार्दिक श्रद्धा से माँ काली के चरणों में समर्पण करते हैं। यह भक्त का अपने आराध्य के प्रति निष्ठा और भक्ति को दर्शाता है। देवी के प्रति समर्पण केवल बाह्य नहीं, बल्कि आंतरिक भावनाओं की गहराई से भी जुड़ा है। माँ काली का 'आंधी काली' रूप भक्तों को प्रेरित करता है कि वे कठिनाइयों का सामना करें और अपनी आस्था बनाए रखें। इस भजन में एक शक्ति और साहस का संचार होता है, जो भक्तों को विपरीत परिस्थितियों में आत्म विश्वास प्रदान करता है।

काली देवी भक्ति मार्ग का एक उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इस भजन में उनकी आक्रामकता और रक्षात्मकता दोनों का समावेश है। 'रक्त बीज का सिर है उड़ाया' दर्शाता है कि माँ काली दुष्ट शक्तियों का संहार करती हैं। यह दर्शाता है कि देवी भक्ति सिर्फ भक्ति नहीं, बल्कि जीवन के अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का एक मार्ग है। भक्त जब देवी का स्मरण करते हैं, तो उन्हें संजीवनी शक्ति, रक्षा और शांति की प्राप्ति होती है। इस भजन में माँ काली के प्रति श्रद्धा और भक्ति का सर्वोच्च मार्ग दिखाया गया है, जो सभी भक्तों के लिए प्रेरणादायक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

काली देवी की उपासना का इतिहास अत्यंत पुराना है, जो महाभारत और देवी भागवत में वर्णित है। भक्तों ने विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान और यज्ञ से उनका पूजन किया है। काली माँ का स्वरूप अनेक प्रकार की शक्तियों का प्रतीक है। उनकी आराधना के लिए विशेष रूप से अंश के चंद्रमा से संबद्ध रात्रि को पूजा करते हैं। उन्हें दुर्गा तथा तारा के रूप में भी पूजा जाता है। शास्त्रों में यह उल्लेख है कि जब भी धरती पर दुष्ट शक्तियों का अत्याचार बढ़ती है, तो माँ काली स्वयं प्रकट होकर उनका नाश करती हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का नियमित जाप करने से भक्तों को मानसिक रूप से शक्ति, साहस और पराक्रम की प्राप्ति होती है। विशेषकर जब जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं, तो इस भजन का जाप करने से नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। ध्यान और ध्यान के समय इसे गाने से मन को शांति और स्थिरता मिलती है। माँ काली की कृपा से भक्तों को स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख-शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप तड़के या रात्रि के समय करना शुभ होता है। पूजा स्थल पर दीया जलाकर मां काली के चित्र या मूर्ति के सामने बैठना चाहिए। मानसिक रूप से तैयारी करते हुए, भक्त को एकाग्रता से माता का स्मरण करते हुए भजन का जाप करना चाहिए। उचित आसन में बैठकर शांत चित्त से ध्यान लगाना आवश्यक है जिससे आंतरिक शांति और देवी की कृपा मिल सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या माँ काली की उपासना का विशेष समय है?

माँ काली की उपासना के लिए रात्रि का समय विशेष रूप से पसंद किया जाता है। विशेषकर नवरात्रि में उनके पूजन का महत्व अधिक बढ़ जाता है।

इस भजन का अर्थ क्या है?

इस भजन में माँ काली की शक्ति, रक्षा और उनके महाकाल रूप का चिंतन किया गया है। यह भक्तों को साहस और बल प्रदान करता है।

क्या इस भजन का जाप करने से कोई विशेष लाभ होता है?

हां, इस भजन का जाप करने से मानसिक तनाव कम होता है, और भक्त को आत्मिक शक्ति और सामर्थ्य की प्राप्ति होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!