🙏 मोहन की जो याद आई – आँसू बहाने दो
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(Mohan Ki Jo Yaad Aayi – Krishna Bhajan with Hindi Lyrics & Meaning)
🎵 भजन परिचय – जब याद आती है मोहन की
जब कान्हा की याद सच्चे दिल से आती है, तो आँखें अपने आप भर आती हैं। यह भजन “मोहन की जो याद आई, अश्कों को बहाने दो” उसी व्याकुलता, समर्पण और विरह की अभिव्यक्ति है। भक्त कहता है – हे प्रभु, तुम्हारी याद ने मुझे झकझोर दिया है, अब मुझे रोने दो, उन राहों को सजाने दो जिनसे तुम आओगे। यह गीत श्री कृष्ण (मोहन/श्याम) के प्रति अनन्य प्रेम और आत्मसमर्पण का प्रतीक है।
हर पंक्ति में भक्त की विनम्रता, बेसब्री और विश्वास झलकता है – चाहे दरबान सज़ा दें, चाहे मोहन रूठे रहें, बस एक बार उनकी नज़रें मिल जाएँ, बस एक बार उन्हें अपनी व्यथा सुनाने दो।
📜 मोहन की जो याद आई – पूरे लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
मोहन की जो याद आई, अश़्कों को बहाने दो
जिन राहों से आना है, राहों को सजानें दो
मोहन की जो याद आई...
॥ अंतरा १ ॥
जो चाहे सज़ा देना, ऐ श्याम के दरबानों
चौखट पे ज़रा इनकी, मुझे सर तो झुकानें दो
जिन राहों से आना है, राहों को सजानें दो
मोहन की जो याद आई...
॥ अंतरा २ ॥
सुनतीं हूं मेरे मोहन, नज़रों से पिलाते हैं
नज़रों से ज़रा इनकी, नज़रें तो मिलाने दो
जिन राहों से आना है, राहों को सजानें दो
मोहन की जो याद आई...
॥ अंतरा ३ ॥
रूठना और तड़पाना, ये बांकीं अदा उनकी
वो रूठे रहें चाहें, मुझको तो मनानें दो
जिन राहों से आना है, राहों को सजानें दो
मोहन की जो याद आई...
॥ अंतरा ४ ॥
दुनिया में अगर मेरी, यहां कोई नहीं सुनता
जो सब की सुनता है, उनको तो सुनानें दो
जिन राहों से आना है, राहों को सजानें दो
मोहन की जो याद आई...
श्याम मेरे श्याम, श्याम मेरे श्याम
मेरे श्याम मेरे श्याम, मेरे श्याम मेरे श्याम
📖 भजन का अर्थ – हर पंक्ति की व्याख्या
- 🌸 “मोहन की जो याद आई, अश्कों को बहाने दो” – जब मुझे मेरे प्रिय मोहन (कृष्ण) की याद आती है, तो मुझे रोने दो, आँसू बहाने दो। यह विरह की सच्ची पीड़ा है।
- 🌸 “जिन राहों से आना है, राहों को सजानें दो” – जिन रास्तों से तुम आने वाले हो, उन राहों को मुझे सजाने दो। मैं तुम्हारे आगमन के लिए सब कुछ तैयार करना चाहता हूँ।
- 🌸 “जो चाहे सज़ा देना, ऐ श्याम के दरबानों / चौखट पे ज़रा इनकी, मुझे सर तो झुकानें दो” – हे श्याम के द्वारपालों, तुम मुझे कोई भी सज़ा दो, लेकिन मुझे उनकी चौखट पर सिर झुकाने दो। भक्त के लिए प्रभु का द्वार ही सब कुछ है।
- 🌸 “सुनतीं हूं मेरे मोहन, नज़रों से पिलाते हैं” – मैंने सुना है कि मेरे मोहन (प्रभु) केवल नज़रों से ही प्रेम पिला देते हैं। बस एक बार उनकी नज़रों से नज़रें मिलाने दो।
- 🌸 “रूठना और तड़पाना, ये बांकीं अदा उनकी” – उनका रूठना और तड़पाना भी उनकी एक सुंदर चाल है। चाहे वो रूठे ही रहें, मुझे उन्हें मनाने दो – मुझे उसी में आनंद है।
- 🌸 “दुनिया में अगर मेरी, यहां कोई नहीं सुनता / जो सब की सुनता है, उनको तो सुनानें दो” – अगर इस दुनिया में मेरी कोई नहीं सुनता, तो मुझे उस परमात्मा को अपनी पीड़ा सुनाने दो, जो सबकी सुनता है।
- 🌸 “श्याम मेरे श्याम...” – बार‑बार श्याम नाम लेना ही भक्त का सहारा है।
📖 इस भजन के पीछे की कहानी (Story behind the Bhajan)
यह भजन किसी एक रचनाकार का न होकर हर उस प्रेमी भक्त की मानसिक व्यथा है जो कृष्ण के विरह में तड़पता है। ऐसी मान्यता है कि वृंदावन की एक गोपिका, जो श्री कृष्ण के मथुरा चले जाने के बाद उनके वियोग में पागल‑सी हो गई थी, अक्सर यमुना के तट पर बैठकर इसी भाव में रोया करती थी – “जिन राहों से आना है, राहों को सजाने दो”। वह हर शाम रास्ते सजाती, दीप जलाती, यह सोचकर कि श्याम आज लौटेंगे।
उसकी यह आस कभी पूरी नहीं हुई, लेकिन उसके प्रेम ने यह अमर पंक्तियाँ जन्म दीं। आज भी कोई भक्त जब अपने मोहन से बिछड़ जाता है, तो यही गीत गुनगुनाता है – “मोहन की जो याद आई, अश्कों को बहाने दो”।
✨ आध्यात्मिक संदेश – विरह में भी मिलता है सच्चा मिलन
यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर से सच्चा प्रेम कभी व्यर्थ नहीं जाता। “मोहन की जो याद आई” – जब याद सच्ची होती है, तो आँसू अपने आप बहने लगते हैं। ये आँसू दुख के नहीं, प्रेम के होते हैं। भक्त चाहता है कि प्रभु के द्वार पर सिर झुकाने का सौभाग्य मिले, चाहे कोई सज़ा ही क्यों न मिले।
बड़ा संदेश: जब संसार में कोई सुनने वाला न हो, तब भी एक श्याम है जो सबकी सुनता है। बस उससे अपनी बात कह दो – वही सबसे बड़ा साथी है। रूठना‑मनाना, नज़रें मिलाना, यह सब उस दिव्य लीला का हिस्सा है। इसलिए निराश मत होइए, बस अपनी राहें सजाते रहिए – प्रभु अवश्य आएंगे।
🙏 श्याम मेरे श्याम – नाम लेते ही बन जाते हैं काम 🙏
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: इस भजन का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर: इस भजन का मुख्य भाव है – श्री कृष्ण (मोहन/श्याम) के प्रति सच्चा विरह प्रेम। भक्त बस इतना चाहता है कि उसे प्रभु के द्वार पर सिर झुकाने, उनकी राहें सजाने और उनसे अपनी व्यथा कहने का अवसर मिले।
प्रश्न 2: क्या यह भजन किसी फिल्म या एल्बम का हिस्सा है?
उत्तर: यह एक पारंपरिक शैली में रचित भक्ति गीत है, जो मुख्यतः भजन संध्या, कीर्तन और व्यक्तिगत साधना में गाया जाता है। इसके कई संस्करण यूट्यूब पर भी उपलब्ध हैं।
प्रश्न 3: “श्याम मेरे श्याम” का बार‑बार जप क्यों किया गया है?
उत्तर: “श्याम” श्री कृष्ण का एक अत्यंत प्रिय नाम है। इसका बार‑बार जप भक्त के पूर्ण समर्पण और आश्रय भाव को दर्शाता है – जैसे कोई बच्चा अपनी माँ को पुकारता है, वैसे ही भक्त अपने श्याम को।
प्रश्न 4: इस भजन को गाने का सबसे अच्छा समय क्या है?
उत्तर: यह भजन विशेष रूप से शाम के समय (संध्या आरती के बाद), या फिर जब मन में कृष्ण के विरह की भावना हो, गाया जाता है। वृंदावन की पवित्र भूमि पर तो यह और भी भावपूर्ण लगता है।
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