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भक्ति रस काव्य व भजन

Tu Raj Ghara Ki Rani Hai Meera Lyrics (Meera Bhajan) – तू तो राज घरा की रानी ऐ मीरा

181 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🙏 तू तो राज घरा की रानी ऐ मीरा

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(Tu Raj Ghara Ki Rani Hai Meera) – Meera Bhajan 2026

गायक : बल्ली बादशाह

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: बल्ली बादशाह
🏷️ श्रेणी: मीरा भजन / भक्ति भजन
📍 भाव: भक्ति, समर्पण, वैराग्य

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

तू तो राज घरा की,
रानी ऐ मीरा,
ऊँची सै जात।।

॥ अंतरा १ ॥

गुरुमंत्र कोई खेल नहीं सै,
तेरा मेरा मेल नहीं सै,
तू तो दिखे सै,
घनी सयानी मीरा,
भक्ति में ध्यान,
तु तो राज घरां की,
रानी ऐ मीरा,
ऊँची सै जात।।

॥ अंतरा २ ॥

धन-माया के भरे खजाने,
और बता तन्ने क्या की चाहना,
मेरी टपके छान पुरानी ऐ मीरा,
चिंता दिन रात,
तु तो राज घरां की,
रानी ऐ मीरा,
ऊँची सै जात।।

॥ अंतरा ३ ॥

पति मिला तन्ने कृष्ण कन्हैया,
आपे पार लगादे नैया,
तन्ने कुकर पानी पयादु ऐ मीरा,
चमड़े के हाथ,
तु तो राज घरां की,
रानी ऐ मीरा,
ऊँची सै जात।।

॥ अंतरा ४ ॥

गुरु वचन पै पक्की डटले,
सत्य नाम जा घर में रटले,
तन्ने छानी खाख जगत की ऐ मीरा,
चिंता दिन रात,
तु तो राज घरां की,
रानी ऐ मीरा,
ऊँची सै जात।।

॥ अंतरा ५ ॥

रविदास की बनके चेल्ली,
अपनी जान बिगन में घेरी,
तन्ने मुश्किल होगी निबानी ऐ मीरा,
गुरुओं की बात,
तु तो राज घरां की,
रानी ऐ मीरा,
ऊँची सै जात।।

तू तो राज घरा की,
रानी ऐ मीरा,
ऊँची सै जात।।

🎤 गायक :- बल्ली बादशाह

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन मीरा की अनन्य भक्ति और उनके त्यागमय जीवन पर आधारित है। "तू तो राज घरा की रानी ऐ मीरा, ऊँची सै जात" – मीरा राजस्थान के राज घराने की बहू थीं, फिर भी उनकी पहचान एक साध्वी भक्त के रूप में ऊँची है। उन्होंने सांसारिक सुख-सुविधाओं का त्याग कर केवल कृष्ण-भक्ति को अपना लिया।

भजन में बताया गया है कि मीरा ने गुरु (रविदास) का मंत्र लिया और उसे पूरी निष्ठा से अपनाया। "गुरुमंत्र कोई खेल नहीं सै" – गुरु का मंत्र कोई खिलवाड़ नहीं है, इसे पूरी श्रद्धा से धारण करना पड़ता है। मीरा ने ऐसा ही किया और भक्ति में लीन हो गईं।

उनके लिए धन-माया बेकार थी, उन्हें तो बस श्री कृष्ण की चाह थी। "पति मिला तन्ने कृष्ण कन्हैया" – उन्हें सच्चा पति कृष्ण मिल गए, जिन्होंने उनकी नैया पार लगा दी। मीरा ने गुरु रविदास के वचनों पर पक्का विश्वास रखा और जगत की सभी तुच्छ वस्तुओं को त्याग दिया।

अंत में कहा गया है कि रविदास की चेली बनकर उन्होंने अपने प्राणों की भी परवाह नहीं की और गुरु के बताए मार्ग पर चलना मुश्किल होने पर भी उसे निभाया। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति के लिए सांसारिक मोह-माया का त्याग करना पड़ता है और गुरु के वचनों पर अटल रहना पड़ता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

मीरा की ऊँची जात: इस भजन में "ऊँची जात" से तात्पर्य मीरा की आध्यात्मिक ऊँचाई से है। वे राजस्थान की राजकुमारी थीं, पर उनकी असली पहचान उनकी भक्ति से बनी। भक्ति में कोई ऊँच-नीच नहीं होता, लेकिन मीरा का समर्पण उन्हें सबसे ऊपर उठा देता है।

गुरु रविदास का योगदान: मीरा ने संत रविदास से दीक्षा ली थी। भजन में इस बात को रेखांकित किया गया है कि गुरु के वचनों पर डटे रहना ही सच्ची भक्ति है।

त्याग और समर्पण: मीरा ने राज-पाट, धन-दौलत, यहाँ तक कि अपने परिवार का भी त्याग कर दिया, केवल कृष्ण-प्रेम के लिए। यह भजन उसी त्याग और समर्पण की गाथा है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

सांसारिक ऊँचाईयाँ क्षणिक हैं, सच्ची ऊँचाई तो भक्ति और गुरु के प्रति समर्पण में है। मीरा की तरह निष्काम प्रेम ही परम पद दिला सकता है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन उन सभी भक्तों को प्रेरणा देता है जो संसार के मोह में उलझे हैं। मीरा की तरह एक बार कृष्ण को पा लेने पर सब कुछ तुच्छ लगने लगता है।

🙏 ॐ श्री कृष्णार्पणमस्तु ।। जय मीरां ।। जय गुरु रविदास ।।

॥ इति मीरा भजनम् ॥
॥ मीरा का प्रेम, कृष्ण का नाम, गुरु का वचन – तीनों अनमोल ।।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 14 Aug 2026

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