मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
🙏 आँख खुले तो सबसे पहले – दर्शन मैया तेरा हो
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
(Aankh Khule To Sabse Pehle Darshan Maiya Tera Ho Lyrics In Hindi) – Manoj Tiwari Mridul Maa Bhajan 2026
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
मन में तेरा प्यार है माँ,
तू दुनिया संसार है माँ।
तेरी ही ममता के छाँव में,
मेरा रोज सवेरा हो।
आँख खुले तो सबसे पहले,
दर्शन मैया तेरा हो॥
॥ अंतरा १ ॥
जब भी रोया, दर्द में डूबा,
तेरा आँचल थाम लिया।
तेरी उंगली पकड़ के मैया,
सीख जीवन का सार लिया।
जब-जब दर्द सताए मुझे,
तेरी दुआ ही बचाए मुझे।
गोदी तेरी पावन सबसे, जैसे स्वर्ग का डेरा हो,
आँख खुले तो सबसे पहले, दर्शन मैया तेरा हो॥
॥ अंतरा २ ॥
तेरी शक्ति से चलता हूँ,
तुमसे जीवन-धार है माँ।
चोट सह के भी उठ जाता,
कैसे कहूँ आभार है माँ।
अपनी नज़र से हटाना मत,
दिल से कभी बिसराना मत।
अभिमन्यु-सा लड़ जाऊँगा, चाहे कैसा घेरा हो,
आँख खुले तो सबसे पहले, दर्शन मैया तेरा हो,
आँख खुले तो सबसे पहले, दर्शन मैया तेरा हो,
आँख खुले तो सबसे पहले, दर्शन मैया तेरा हो॥
✍️ गीतकार एवं गायक :- मनोज तिवारी मृदुल (Manoj Tiwari Mridul)
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह अत्यंत भावपूर्ण भजन "आँख खुले तो सबसे पहले दर्शन मैया तेरा हो" मनोज तिवारी मृदुल द्वारा रचित और स्वरबद्ध है। यह गीत मातृभक्ति के उस अटूट प्रेम को व्यक्त करता है जहाँ भक्त के दिन की शुरुआत माँ के दर्शन से होती है।
"मन में तेरा प्यार है माँ, तू दुनिया संसार है माँ" – भक्त के लिए माँ ही सारा संसार है। उसके मन में केवल माँ का प्यार बसा है।
"तेरी ही ममता के छाँव में, मेरा रोज सवेरा हो" – भक्त का हर सवेरा माँ की ममता की छाया में ही सार्थक होता है।
"आँख खुले तो सबसे पहले, दर्शन मैया तेरा हो" – यह मुखड़ा भक्त की सबसे बड़ी लालसा है – कि दिन की शुरुआत माँ के दर्शन से हो।
"जब भी रोया, दर्द में डूबा, तेरा आँचल थाम लिया" – दुख के क्षणों में माँ का आँचल ही एकमात्र सहारा बनता है। माँ की उंगली पकड़कर भक्त ने जीवन का सार सीख लिया।
"गोदी तेरी पावन सबसे, जैसे स्वर्ग का डेरा हो" – माँ की गोद सबसे पवित्र है, मानो स्वर्ग का ही निवास हो।
"तेरी शक्ति से चलता हूँ, तुमसे जीवन-धार है माँ" – भक्त मानता है कि उसका अस्तित्व और शक्ति दोनों ही माँ से हैं।
"अभिमन्यु-सा लड़ जाऊँगा, चाहे कैसा घेरा हो" – अंत में भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि वह अभिमन्यु की तरह जीवन के सभी संघर्षों में डटकर लड़ेगा, बस माँ उसे अपनी नज़र से हटाए नहीं, दिल से भूलाए नहीं।
🔍 इस माँ भजन का विशेष महत्व
माँ का आँचल और गोद: यह भजन माँ के आँचल और गोद को स्वर्ग जैसा पवित्र बताता है। यह उस सुरक्षा और प्रेम का प्रतीक है जो माँ ही दे सकती है।
अभिमन्यु की उपमा: अभिमन्यु महाभारत के वीर योद्धा थे जिन्होंने अकेले ही चक्रव्यूह में घुसकर वीरगति पाई। भक्त कहता है कि चाहे कोई भी विपत्ति आए, वह डटकर सामना करेगा, बशर्ते माँ की कृपा बनी रहे।
रोज़ सवेरा माँ की ममता में: यह पंक्ति दैनिक जीवन में माँ की उपस्थिति और कृतज्ञता को रेखांकित करती है।
मनोज तिवारी मृदुल की रचना: मनोज तिवारी मृदुल भोजपुरी और हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध गायक-अभिनेता हैं। उनकी इस रचना में मातृभक्ति का सहज और हृदयस्पर्शी रूप देखने को मिलता है।
💖 माँ की गोद का सुख
🎯 संदेश
इस भजन का मूल संदेश यह है कि माँ ही जीवन का आधार और सहारा है। उसकी ममता के आँचल में ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। दिन की शुरुआत माँ के दर्शन से करने से सारा दिन सुखमय बीतता है।
✨ कृतज्ञता का भाव
आँख खुले तो सबसे पहले दर्शन मैया तेरा हो केवल एक भजन नहीं, बल्कि माँ के प्रति अनंत कृतज्ञता का प्रतीक है। यह हर उस बच्चे के मन की आवाज़ है जो माँ की गोद में सुरक्षित महसूस करता है, माँ की उंगली थामकर जीवन चलना सीखता है, और हर पल उसकी दुआओं का आभारी है।
🙏 जय माँ जगदम्बे || सभी माताओं को शत्-शत् नमन 🙏
गायक एवं गीतकार: मनोज तिवारी मृदुल | Singer & Lyricist: Manoj Tiwari Mridul
॥ जय माँ, जय अम्बे ॥
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "Aankh Khule To Sabse Pehle Darshan Maiya Tera Ho Lyrics (आँख खुले तो सबसे पहले दर्शन मैया तेरा हो) – Manoj Tiwari Mridul Maa Bhajan 2026" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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