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Amalaki Ekadashi

अमलकी एकादशी व्रत कथा: ब्रह्मांड पुराण की प्रसिद्ध कहानी (Amalaki Ekadashi Vrat Katha: Brahmanda Purana Story)

181 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🌿 अमलकी एकादशी व्रत कथा

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

ब्रह्मांड पुराण की प्रसिद्ध कहानी

आंवले के वृक्ष की महिमा और मोक्षदायिनी एकादशी

🌱 अमलकी एकादशी का महत्व

अमलकी एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आती है। इसे आंवला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ आंवले (आमलकी) के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है।

ब्रह्मांड पुराण के अनुसार, यह व्रत करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन आंवले के वृक्ष का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

📅 2026 में अमलकी एकादशी: फाल्गुन शुक्ल एकादशी, 28 फरवरी 2026, शनिवार (चन्द्रोदय समय: शाम 05:42 बजे तक व्रत)

📖 अमलकी एकादशी व्रत कथा (Brahmanda Purana Katha)

प्राचीन काल में चम्पावती नामक एक नगरी थी, जहां धर्मशील राजा राज्य करते थे। एक बार प्रजा में अकाल पड़ा और चारों ओर हाहाकार मच गया। राजा चिंतित होकर ऋषियों के पास गए और समाधान पूछा।

तब एक महर्षि ने कहा - "हे राजन! फाल्गुन शुक्ल एकादशी का व्रत करें और आंवले के वृक्ष की पूजा करें। इससे सभी कष्ट दूर होंगे और प्रजा सुखी होगी।"

राजा ने विधिपूर्वक व्रत किया और आंवले के वृक्ष की पूजा की। व्रत के प्रभाव से अकाल समाप्त हुआ और राज्य में सुख-समृद्धि आ गई।

🌟 राजा और व्याध की कथा

ब्रह्मांड पुराण में वर्णित एक अन्य कथा के अनुसार, एक बार एक राजा वन में शिकार करने गए। वहां उन्होंने एक व्याध (शिकारी) को देखा, जो अमलकी एकादशी का व्रत कर रहा था और आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान विष्णु का ध्यान कर रहा था।

राजा ने व्याध से पूछा - "तुम एक नीच शिकारी होकर भी यह पवित्र व्रत कैसे कर सकते हो?"

व्याध ने उत्तर दिया - "हे राजन! यह व्रत जाति-पांति नहीं देखता। जो भी श्रद्धा और भक्ति से इसे करता है, वह मोक्ष का भागी बनता है। पिछले जन्म में मैं एक ब्राह्मण था, परंतु अपने कर्मों के कारण शिकारी बनना पड़ा। इस व्रत के प्रभाव से मुझे मुक्ति मिलेगी।"

व्याध की बातों से प्रभावित होकर राजा ने भी यह व्रत किया और अंत में मोक्ष को प्राप्त हुए।

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आंवले का वृक्ष
पूजा का प्रतीक

ब्रह्मांड पुराण में भगवान कृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं: "हे राजन! अमलकी एकादशी का व्रत करने से हजारों गौदान और अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल मिलता है। जो मनुष्य इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करता है, वह मेरे परम धाम को प्राप्त होता है।"

📝 अमलकी एकादशी व्रत विधि (Step-by-Step)

1

दशमी की तैयारी

दशमी के दिन सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। रात में सोने से पूर्व अगले दिन के व्रत का संकल्प लें।

2

प्रातः स्नान

एकादशी के दिन प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

3

संकल्प

हाथ में जल, फूल और चावल लेकर व्रत करने का संकल्प करें: "मैं अमलकी एकादशी का व्रत करूंगा, भगवान विष्णु की पूजा करूंगा और आंवले के वृक्ष की परिक्रमा करूंगा।"

4

भगवान विष्णु की पूजा

घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। गंगाजल से स्नान कराएं। पीले वस्त्र, फूल, तुलसी दल, नैवेद्य अर्पित करें।

5

आंवले के वृक्ष की पूजा

यदि संभव हो तो आंवले के वृक्ष के नीचे जाकर पूजा करें। वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं। वृक्ष को पीला वस्त्र, चुनरी अर्पित करें। वृक्ष की परिक्रमा करें और दीपक जलाएं।

🌿 आंवला पूजा मंत्र: "ॐ अमलक्यै नमः। ॐ विष्णवे नमः।" - इस मंत्र से आंवले के वृक्ष की पूजा करें।
6

व्रत कथा का पाठ

इस दिन अमलकी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। कथा सुनने और सुनाने से व्रत का फल दोगुना हो जाता है।

7

रात्रि जागरण

संभव हो तो रात में भजन-कीर्तन करें और जागरण करें। अगले दिन द्वादशी को पारण करें।

🌅 पारण विधि (व्रत खोलने का समय)

द्वादशी के दिन सूर्योदय के बाद, ब्राह्मणों को भोजन कराकर और दान-दक्षिणा देकर स्वयं भोजन करें। पारण के समय आंवले का सेवन अवश्य करें।

2026 में पारण समय: 01 मार्च, सुबह 06:48 से 09:06 बजे तक

✨ अमलकी एकादशी व्रत के लाभ

  • पापों का नाश: इस व्रत से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं।
  • मोक्ष की प्राप्ति: ब्रह्मांड पुराण के अनुसार, यह व्रत मोक्षदायी है।
  • स्वास्थ्य लाभ: आंवले के सेवन से आयुर्वेदिक लाभ मिलते हैं।
  • संतान सुख: निःसंतान दंपत्तियों को संतान प्राप्ति होती है।
  • धन-समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि आती है।
  • ग्रह दोष निवारण: कुंडली के सभी दोष दूर होते हैं।
  • पितृ तृप्ति: पितरों को शांति मिलती है।
  • विष्णु लोक की प्राप्ति: मृत्यु के बाद वैकुंठ धाम मिलता है।
🌿 आंवले का आयुर्वेदिक महत्व

आंवला (आमलकी) आयुर्वेद में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करता है। इस दिन आंवले का सेवन करने से शरीर निरोग रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। आंवले में विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में होता है।

🌳 आंवले के वृक्ष की पूजा क्यों?

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आंवला वृक्ष

  • देवताओं का निवास: पुराणों के अनुसार, आंवले के वृक्ष में सभी देवताओं का वास होता है।
  • लक्ष्मी का वास: इस वृक्ष में माता लक्ष्मी का वास माना जाता है।
  • विष्णु प्रिय: भगवान विष्णु को आंवला अत्यंत प्रिय है।
  • पितरों की तृप्ति: आंवले के वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाने से पितर तृप्त होते हैं।
  • पुण्य फल: आंवले के वृक्ष की एक परिक्रमा करने से भी अक्षय पुण्य मिलता है।

स्कन्द पुराण के अनुसार, आंवले के वृक्ष के नीचे पितरों को तर्पण करने से उन्हें मोक्ष मिलता है।

🎁 आंवला दान: क्या, किसे और कैसे दान करें?

दान की वस्तु किसे दान करें लाभ
आंवला (फल) ब्राह्मणों, गरीबों को स्वास्थ्य लाभ, पुण्य की प्राप्ति
आंवले का वृक्ष मंदिर या ब्राह्मण को अक्षय पुण्य, मोक्ष
आंवला मुरब्बा वृद्धजनों को आयु में वृद्धि
सोना/चांदी (आंवला आकार में) योग्य ब्राह्मण को सौभाग्य में वृद्धि
हरे वस्त्र एवं चूड़ियां सुहागिन स्त्रियों को अखंड सौभाग्य
💚 विशेष: अमलकी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष के नीचे दीपदान करना अत्यंत पुण्यदायी होता है।

📜 ब्रह्मांड पुराण में अमलकी एकादशी

ब्रह्मांड पुराण के उत्तरार्ध में अमलकी एकादशी के संदर्भ में भगवान ब्रह्मा और नारद जी के बीच संवाद आता है:

नारद जी ने पूछा: "हे पितामह! फाल्गुन शुक्ल एकादशी का क्या नाम है और इसकी क्या विधि है?"

ब्रह्मा जी ने कहा: "हे नारद! इस एकादशी का नाम अमलकी है। यह सभी पापों का नाश करने वाली है। जो मनुष्य विधिपूर्वक इसका व्रत करता है, वह सभी यज्ञों का फल प्राप्त कर लेता है। पूर्व जन्म में चाण्डाल था, वह भी इस व्रत के प्रभाव से मोक्ष को प्राप्त हुआ।"

इस प्रकार ब्रह्मांड पुराण में अमलकी एकादशी की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है।

📚 अन्य पुराणों में अमलकी एकादशी

पद्म पुराण

"अमलकी एकादशी में जो मनुष्य आंवले के वृक्ष की पूजा करता है, वह हजारों गोदान का फल प्राप्त करता है।"

स्कन्द पुराण

"आंवले के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। इसकी पूजा से तीनों लोकों की पूजा हो जाती है।"

भविष्योत्तर पुराण

"अमलकी एकादशी के दिन यदि कोई मनुष्य व्रत करके आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान विष्णु का ध्यान करता है, तो उसे अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।"

🛒 अमलकी एकादशी पूजा सामग्री

  • गंगाजल
  • पीले पुष्प (गेंदा, गुलदाउदी)
  • तुलसी दल
  • पीला वस्त्र (भगवान के लिए)
  • चुनरी या धोती (आंवला वृक्ष के लिए)
  • चंदन
  • रोली, कुमकुम
  • अक्षत (चावल)
  • धूप-दीप
  • कपूर
  • नैवेद्य (मीठा भोजन, फल)
  • आंवले के फल
  • पान के पत्ते, सुपारी
  • लौंग, इलायची
  • दक्षिणा (सिक्के)
  • कलश (यदि स्थापना करें)
💡 सुझाव: यदि आंवले का वृक्ष न मिले तो घर के गमले में लगे आंवले के पौधे की पूजा करें या आंवले के फलों को कलश में रखकर पूजा करें।

🥗 एकादशी व्रत में क्या खाएं?

✅ ग्रहण करें (फलाहार)
  • फल (केला, सेब, संतरा, पपीता)
  • आंवला (कच्चा या मुरब्बा)
  • साबूदाना खिचड़ी
  • कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की पूरी
  • मखाना, कुट्टू, सिंघाड़ा
  • दूध, दही, फलाहारी लड्डू
  • सेंधा नमक
  • आलू, शकरकंद, अरबी (फलाहारी व्यंजन)
❌ वर्जित (न खाएं)
  • अनाज (गेहूं, चावल, जौ, बाजरा)
  • दालें (अरहर, मूंग, चना, उड़द)
  • मांस-मदिरा, मछली, अंडा
  • प्याज-लहसुन
  • तामसिक भोजन
  • बैंगन, गोभी, मूली
  • शहद (कुछ मतों में वर्जित)

👧👦 बच्चों के लिए सरल कथा

बहुत पुरानी बात है। एक नगर में भयंकर अकाल पड़ा। सब लोग भूखे-प्यासे मर रहे थे। राजा बहुत दुखी हुए। वे ऋषियों के पास गए। ऋषियों ने कहा - "राजन! अमलकी एकादशी का व्रत करो और आंवले के पेड़ की पूजा करो।"

राजा ने वैसा ही किया। व्रत के प्रभाव से बारिश हुई और खेतों में फसल उग आई। सब सुखी हो गए।

एक दूसरी कहानी में, एक शिकारी ने यह व्रत किया और मोक्ष पा लिया। इसलिए यह व्रत सबके लिए है - चाहे कोई अमीर हो या गरीब, बड़ा हो या छोटा।

इसलिए बच्चों, अमलकी एकादशी का व्रत जरूर करना चाहिए।

❓ अमलकी एकादशी से जुड़े सवाल-जवाब

प्रश्न 1: क्या अमलकी एकादशी का व्रत सभी कर सकते हैं?

उत्तर: हां, स्त्री-पुरुष, बच्चे-बूढ़े सभी यह व्रत कर सकते हैं। बीमार या वृद्ध जन फलाहार कर सकते हैं।

प्रश्न 2: क्या इस दिन आंवला खाना जरूरी है?

उत्तर: यदि संभव हो तो आंवला जरूर खाएं। यह स्वास्थ्य के लिए अच्छा है और धार्मिक दृष्टि से भी लाभकारी है।

प्रश्न 3: अगर आंवले का पेड़ न मिले तो क्या करें?

उत्तर: आंवले के फलों की पूजा करें। उन्हें एक पात्र में रखकर चूर्णी या वस्त्र चढ़ाएं और पूजा करें।

प्रश्न 4: क्या इस दिन जल पी सकते हैं?

उत्तर: निर्जल व्रत करना है तो जल न पिएं। फलाहारी व्रत में जल और फल ले सकते हैं।

प्रश्न 5: अमलकी एकादशी की कथा कब सुननी चाहिए?

उत्तर: एकादशी के दिन प्रातः या संध्या के समय पूजा के बाद कथा सुनें।

प्रश्न 6: क्या इस दिन दान का विशेष महत्व है?

उत्तर: हां, आंवला, वस्त्र, अन्न और धन का दान अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

प्रश्न 7: अमलकी एकादशी और आंवला नवमी में क्या अंतर है?

उत्तर: आंवला नवमी कार्तिक मास में आती है, जबकि अमलकी एकादशी फाल्गुन में। दोनों में आंवले की पूजा होती है, लेकिन अमलकी एकादशी का व्रत अधिक फलदायी है।

📝 निष्कर्ष: अमलकी एकादशी का संदेश

अमलकी एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ने और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने का अवसर है। आंवले का वृक्ष हमें सिखाता है कि कैसे दूसरों के काम आना चाहिए - इसके फल, पत्ते, छाल, जड़ सब किसी न किसी काम आते हैं।

ब्रह्मांड पुराण की यह कथा हमें बताती है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से किया गया कोई भी कर्म व्यर्थ नहीं जाता। चाहे राजा हो या रंक, शिकारी हो या साधु - सबको इस व्रत का फल मिलता है।

इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल एकादशी, 28 फरवरी 2026 को इस व्रत को करें और भगवान विष्णु तथा आंवले के वृक्ष की पूजा करें। साथ ही जरूरतमंदों को आंवला और वस्त्र दान करें।

🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।। सर्वे भवन्तु सुखिनः ।।

🌿 अमलकी एकादशी व्रत कथा
ब्रह्मांड पुराण की प्रसिद्ध कहानी
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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 15 Aug 2026

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