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Chaitra Navratri

चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना कैसे करें? घर पर कलश स्थापना की पूरी विधि (Chaitra Navratri Ghatasthapana Vidhi at Home)

149 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🏵️ चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

घर पर कलश स्थापना की पूरी विधि (Step-by-Step Vidhi)

माँ दुर्गा का आवाहन : शक्ति की प्रथम किरण

🌟 चैत्र नवरात्रि का महत्व एवं घटस्थापना

चैत्र नवरात्रि हिन्दू नव वर्ष (विक्रम संवत) के प्रारंभ का प्रतीक है। यह नौ दिन माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। इन नौ दिनों की सबसे पहली और आधारभूत क्रिया है घटस्थापना या कलश स्थापना

घटस्थापना के बिना नवरात्रि की पूजा अधूरी मानी जाती है। यह विधि माँ के आगमन का प्रतीकात्मक निमंत्रण है। शास्त्रों के अनुसार, सही विधि और शुभ मुहूर्त में किया गया कलश स्थापना सम्पूणार्ण वर्ष के लिए सुख-समृद्धि और शक्ति का द्वार खोलता है।

इस लेख में हम आपको चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना की सम्पूर्ण विधि – आवश्यक सामग्री, मुहूर्त, मंत्र और सावधानियाँ – विस्तार से बता रहे हैं, ताकि आप घर पर ही विधिपूर्वक कलश स्थापना कर सकें।

⏱️ घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त (2026)

चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना का विशेष महत्व है। इसे प्रतिपदा तिथि पर किया जाता है। सर्वोत्तम समय प्रातःकाल का माना गया है, विशेषकर अभिजीत मुहूर्त या सूर्योदय के प्रथम तीन घंटे

📅 2026 चैत्र नवरात्रि तिथियाँ

  • प्रतिपदा (घटस्थापना): 29 मार्च 2026, रविवार
  • प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 28 मार्च, रात 08:23 बजे
  • प्रतिपदा तिथि समाप्त: 29 मार्च, रात 10:15 बजे

⏰ शुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11:58 से 12:48 तक (50 मिनट)
  • प्रातः काल: सूर्योदय से पूर्व 06:20 से 07:30 तक
  • स्थिर लग्न: वृषभ लग्न – प्रातः 07:30 से 09:22 तक

नोट: यदि प्रतिपदा सूर्योदय से पूर्व हो तो घटस्थापना द्वितीया तिथि में न करें।

🧺 घटस्थापना के लिए आवश्यक सामग्री

  • मिट्टी का बर्तन (घट/कलश) – तांबा/पीतल/मिट्टी का पात्र
  • स्वच्छ मिट्टी (गंगा-माटी या सामान्य लाल मिट्टी)
  • जौ के बीज (सप्तधान्य – जौ, गेहूँ, चना, मूंग, उड़द, तिल, कंगनी)
  • गंगाजल और साधारण जल
  • सुपारी, लौंग, दूर्वा, पान के पत्ते
  • लाल वस्त्र (कलश ढकने के लिए)
  • मौली (कलावा), रोली, चंदन, अक्षत
  • पुष्प (लाल गुलाब, गेंदा, अपराजिता)
  • फल (नारियल, केला, सेब, अनार)
  • नैवेद्य (मिठाई, पंचामृत, मखाना)
  • धूप, दीप, कपूर
  • घट पर चढ़ाने के लिए नारियल (कलश का मुख)
विशेष: कलश स्थापना हेतु लाल या पीले रंग के वस्त्र शुभ माने गए हैं। मिट्टी के बर्तन में ही जौ बोये जाते हैं – यह "नवरात्रि के जौ" कहलाते हैं।

📜 घटस्थापना की विस्तृत विधि (Step-by-Step)

1

स्थान शुद्धि एवं वेदी तैयार करें

पूर्व या उत्तर दिशा में चबूतरा (चौकी) बनाएं। गंगाजल से शुद्धीकरण करें। लाल कपड़ा बिछाएं।

2

जौ बोने की तैयारी

मिट्टी के पात्र में लाल मिट्टी डालें, उसमें जौ तथा अन्य धान्य मिलाएं। हल्का जल छिड़कें।

3

कलश सजाएं

तांबे/मिट्टी के कलश पर मौली बांधें। उसमें गंगाजल, सुपारी, दूर्वा, लौंग, पान का पत्ता डालें। कलश पर चंदन, रोली, अक्षत लगाएं।

4

नारियल स्थापना

नारियल पर मौली लपेटें, उसे कलश के मुख पर रखें (जल में डूबा हुआ न हो)।

5

पंचोपचार पूजन

गणेश पूजन, स्वस्तिवाचन, फिर कलश का ध्यान, धूप-दीप, फूल चढ़ाएं। निम्न मंत्र बोलें:

“ॐ भूर्भुवः स्वः, तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। ॐ देवी दुर्गायै नमः, कलशं संस्थापयामि।”

6

प्रतिज्ञा (संकल्प)

नौ दिनों तक नियमपूर्वक पूजा करने का संकल्प करें। जौ को प्रतिदिन थोड़ा जल दें।

⚠️ ध्यान दें: घटस्थापना के बाद नौ दिनों तक कलश को स्थिर रखें; उसे स्पर्श करते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।

🌿 कलश स्थापना का वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक रहस्य

🔬 वैज्ञानिक दृष्टि

जौ बोने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जौ के अंकुरण से निकलने वाले फाइटोकेमिकल्स वायुमंडल को शुद्ध करते हैं। तांबे के कलश में जल रखने से जल शुद्ध एवं आयुर्वेदिक गुणों से युक्त होता है।

🕉️ आध्यात्मिक दृष्टि

कलश ब्रह्मांड का प्रतीक है – उसका जल आदि शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। नारियू तीन देवों (ब्रह्मा-विष्णु-महेश) का प्रतीक है। मौली रक्षा कवच है। इस प्रकार घटस्थापना से सम्पूर्ण देवमंडल का आवाहन होता है।

📖 पौराणिक कथा: माँ दुर्गा का आगमन

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, जब महिषासुर ने देवताओं को पराजित कर दिया, तब ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने अपनी शक्तियों का पुंज एकत्र कर माँ दुर्गा को प्रकट किया। उनके आगमन पर सभी देवताओं ने कलश स्थापित कर उनका अभिषेक किया। तभी से नवरात्रि में घटस्थापना का विधान चला आ रहा है।

✅ नवरात्रि के दौरान क्या करें – क्या न करें

करें (Do’s)न करें (Don’ts)
प्रतिदिन सुबह-शाम कलश की पूजा करें।कलश को एक स्थान से हटाएं नहीं।
जौ को नियमित जल दें।नवरात्रि में मांस-मदिरा का सेवन वर्जित।
व्रत रखें या फलाहार करें।बिना स्नान किए पूजा न करें।
माँ दुर्गा के नौ रूपों का ध्यान करें।तामसिक भोजन (प्याज-लहसुन) से बचें।
पूजा के बाद आरती करें।असत्य न बोलें, क्रोध न करें।

❓ FAQ – घटस्थापना संबंधी प्रश्न

प्रश्न 1: क्या घटस्थापना के बिना नवरात्रि व्रत कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ, यदि स्थापना करना संभव न हो तो केवल मानसिक पूजा या दुर्गा चालीसा का पाठ करें। लेकिन घटस्थापना से पूर्ण फल मिलता है।
प्रश्न 2: क्या एक ही कलश में कई परिवार पूजा कर सकते हैं?
उत्तर: प्रत्येक गृहस्थ को अपना अलग कलश स्थापित करना चाहिए। सामूहिक पूजा में एक ही कलश रखा जा सकता है।
प्रश्न 3: क्या स्त्रियाँ घटस्थापना कर सकती हैं?
उत्तर: हाँ, कोई भी श्रद्धालु पुरुष या स्त्री विधिपूर्वक कलश स्थापना कर सकता है। हाँ, रजस्वला स्त्री को स्पर्श न करने की परंपरा है।
प्रश्न 4: कलश स्थापना के बाद नारियल कब निकालें?
उत्तर: नवरात्रि के समापन (अष्टमी/नवमी) पर कलश विसर्जन के समय नारियल निकाला जाता है।
प्रश्न 5: क्या बिना मुहूर्त के भी स्थापना कर सकते हैं?
उत्तर: प्रतिपदा के दिन सूर्योदय के समय सामान्यतः स्थापना की जा सकती है, मुहूर्त न मिले तो सूर्योदय का समय लें।

🙏 घटस्थापना का संदेश

चैत्र नवरात्रि की घटस्थापना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि हमारे अंदर छिपी शक्ति (दुर्गा) को जागृत करने का प्रतीक है। यह नौ दिन आत्म-साधना, संकल्प और भक्ति के हैं। सही विधि से किया गया कलश स्थापना जीवन में सकारात्मकता, स्वास्थ्य और समृद्धि का संचार करता है।

इस नवरात्रि हम सब माँ भगवती से यही प्रार्थना करें कि वे हमें सद्बुद्धि, शक्ति और भक्ति प्रदान करें।

ॐ श्री दुर्गायै नमः। सर्वे भवन्तु सुखिनः।।

🏵️ चैत्र नवरात्रि घटस्थापना
विधि-विधान से करें माँ का आवाहन
श्रेणियां: Chaitra Navratri

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 18 Aug 2026

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