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Hanuman Chalisa

श्री हनुमान चालीसा – Hanuman Chalisa Hindi Lyrics | संकट कटै मिटे सब पीरा

595 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

🕉️ श्री हनुमान चालीसा

(Hanuman Chalisa) – संकट कटै मिटे सब पीरा

रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास

📝 हनुमान चालीसा परिचय

📖 रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास
🎯 देवता: हनुमान जी
📿 चौपाइयाँ: 40

📜 श्री हनुमान चालीसा (हिन्दी में)

॥ दोहा ॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

॥ चौपाई ॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।।

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

॥ दोहा ॥

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

🕉️ गोस्वामी तुलसीदास कृत

🙏 हनुमान चालीसा का महत्व और संदेश

हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित अत्यंत प्रसिद्ध और शक्तिशाली स्तोत्र है। इसमें 40 चौपाइयाँ हैं, इसलिए इसे चालीसा कहा जाता है। यह भगवान हनुमान की स्तुति, उनके गुणों, शक्तियों और उनके द्वारा किए गए कार्यों का वर्णन करता है।

प्रमुख भाव:

  • प्रार्थना (दोहा): भक्त गुरु के चरणों में मन को शुद्ध करके श्रीराम के यश का वर्णन करने का संकल्प लेता है और हनुमान जी से बल, बुद्धि, विद्या और कष्टों के निवारण की प्रार्थना करता है।
  • हनुमान जी का स्वरूप: उन्हें ज्ञान और गुणों का सागर, तीनों लोकों में प्रसिद्ध, राम के दूत, अपार बल के धाम, अंजनी के पुत्र और पवन पुत्र के रूप में वर्णित किया गया है।
  • उनके गुण और कार्य: वे सोने के वर्ण वाले, सुंदर वस्त्र धारण करने वाले, कुंडल धारण किए, घुंघराले बालों वाले, हाथों में वज्र और ध्वजा धारण किए, कंधे पर जनेऊ सजाए, शंकर के अवतार और केसरी के नंदन हैं।
  • लीलाएँ: उन्होंने सीता जी को सूक्ष्म रूप में दर्शन दिए, विकराल रूप धारण कर लंका जलाई, भीम रूप धारण कर असुरों का संहार किया, संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जीवित किया, सुग्रीव और विभीषण की सहायता की, और सूर्य को मधुर फल समझकर निगल लिया था।
  • आशीर्वाद: उनकी शरण में आने वाले को सब सुख मिलते हैं। वे राम जी के द्वार के रखवाले हैं, बिना उनकी आज्ञा के कोई प्रवेश नहीं पा सकता। उनके नाम से भूत-प्रेत नहीं आते, रोग नष्ट होते हैं और सब पीड़ा मिटती है। संकट में हनुमान जी भक्त को छुड़ाते हैं।
  • महिमा: हनुमान जी अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता हैं। उनके भजन से राम जी की प्राप्ति होती है और जन्म-जन्म के दुख दूर होते हैं।
  • फल: जो कोई सौ बार हनुमान चालीसा का पाठ करता है, वह बंधनों से मुक्त होकर परम सुख को प्राप्त करता है।

विशेष: अंतिम दोहे में प्रार्थना है कि पवन पुत्र हनुमान जो संकटों को हरने वाले और मंगलमूर्ति हैं, वे राम, लक्ष्मण और सीता सहित हमारे हृदय में निवास करें।

🕉️ हनुमान जी के प्रमुख नाम

  • हनुमान: जिनके हनु (जबड़ा) टूटा हुआ था (बाल्यकाल में)
  • पवनपुत्र: पवन देव के पुत्र
  • अंजनेय: अंजनी के पुत्र
  • महाबीर: महान वीर
  • बजरंगबली: वज्र के समान शरीर वाले बलशाली
  • कपीश्वर: वानरों के राजा
  • रामदूत: श्रीराम के दूत
  • संकटमोचन: संकटों को दूर करने वाले
  • मारुतिनंदन: मारुत (पवन) के पुत्र
  • केसरीनंदन: केसरी के पुत्र

🔍 हनुमान चालीसा का विशेष महत्त्व

⚡ शक्ति और सुरक्षा

हनुमान चालीसा का पाठ करने से भक्त को अपार शक्ति और सुरक्षा प्राप्त होती है। यह भूत-प्रेत, नकारात्मक ऊर्जा और शत्रुओं से रक्षा करता है।

🩺 रोग निवारण

"नासै रोग हरै सब पीरा" – इस चालीसा के नियमित पाठ से रोगों का नाश होता है और सभी प्रकार की पीड़ा दूर होती है।

🎯 संदेश : संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा। हनुमान चालीसा का पाठ करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं, सभी पीड़ाएँ मिटती हैं। हनुमान जी भक्तों के सच्चे रखवाले हैं, उनकी शरण में जाने वाले को किसी से भय नहीं रहता।

॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ॥
॥ जय कपीस तिहुं लोक उजागर ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "श्री हनुमान चालीसा – Hanuman Chalisa Hindi Lyrics | संकट कटै मिटे सब पीरा" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

श्रेणियां: Hanuman Chalisa hanuman Gatha

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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