मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
🙏 इन सांसो का भरोसा क्या – पल भर में क्या हो जाएगा
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
(In Saanson Ka Bharosa Kya Lyrics In Hindi) – Vijay Soni Bhajan 2026 | Preet Bhajan
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
इन सांसो का भरोसा क्या,
पल भर में क्या हो जाएगा,
जब चिड़िया चुग जाएगी खेत,
फिर पाछे पछताएगा,
इन साँसो का भरोसा क्या,
पल भर में क्या हो जाएगा॥
॥ अंतरा १ ॥
कर सेवा दीन दुखियों की,
हरि भजन में अपने मन को लगा,
जो सोयी तेरी आतम है,
उठ जा तू उसको फिर से जगा,
गर अब भी किया ना तूने चेत,
हाथ मलता रह जाएगा,
इन साँसो का भरोसा क्या,
पल भर में क्या हो जाएगा॥
॥ अंतरा २ ॥
तू त्याग दे अभिमान को,
बस अपना ले गुरु ज्ञान को,
मन की आंखे तू खोल जरा,
अब दूर भगा अज्ञान को,
सत्कर्म के बीज से बो ले खेत,
अंत समय सुख पाएगा,
इन साँसो का भरोसा क्या,
पल भर में क्या हो जाएगा॥
इन सांसो का भरोसा क्या,
पल भर में क्या हो जाएगा,
जब चिड़िया चुग जाएगी खेत,
फिर पाछे पछताएगा,
इन साँसो का भरोसा क्या,
पल भर में क्या हो जाएगा॥
🎤 गायक :- विजय सोनी (Vijay Soni)
📞 संपर्क :- 9334120930
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह प्रेरक भजन "इन सांसो का भरोसा क्या" विजय सोनी की आवाज़ में जीवन की क्षणभंगुरता और अनिश्चितता को दर्शाता है। भजन का मूल संदेश है कि जीवन अनमोल है और हर पल का सदुपयोग करना चाहिए क्योंकि पता नहीं अगला पल हमारे पास हो या न हो।
"इन सांसो का भरोसा क्या, पल भर में क्या हो जाएगा" – यह पंक्ति जीवन की अनिश्चितता को बताती है। हम नहीं जानते कि अगले ही पल क्या हो जाए। इसलिए कल पर छोड़कर नहीं, आज ही अच्छे कर्म करने चाहिए।
"जब चिड़िया चुग जाएगी खेत, फिर पाछे पछताएगा" – यह एक सुंदर उदाहरण है। जैसे चिड़िया खेत को चुग जाती है और फिर पछताने से कुछ नहीं होता, वैसे ही समय बीत जाने के बाद पछताना बेकार है। समय रहते सावधान हो जाना चाहिए।
"कर सेवा दीन दुखियों की, हरि भजन में अपने मन को लगा" – भजन हमें निर्बल और दुखियों की सेवा करने और भगवान के भजन में मन लगाने की प्रेरणा देता है। जो आत्मा सोई हुई है, उसे जगाने का आह्वान करता है।
"तू त्याग दे अभिमान को, बस अपना ले गुरु ज्ञान को" – अभिमान त्यागने और गुरु के ज्ञान को अपनाने की सीख दी गई है। मन की आंखें खोलकर अज्ञान को दूर भगाने और सत्कर्म के बीज बोने का संदेश है ताकि अंत समय में सुख मिले।
🔍 इस प्रेरक भजन का विशेष महत्त्व
जीवन की क्षणभंगुरता: यह भजन हमें याद दिलाता है कि जीवन अनिश्चित है और सांसों का कोई भरोसा नहीं। यह बौद्ध और अद्वैत दर्शन के मूल सिद्धांत "अनित्य" (अस्थिरता) की याद दिलाता है।
"चिड़िया चुग जाएगी खेत" – एक प्रबोधक दृष्टांत: यह पंक्ति एक प्रचलित कहावत पर आधारित है। जैसे किसान अगर समय पर अपने खेत की रक्षा नहीं करता, चिड़िया सारा खेत चुग जाती है और फिर पछताने से कोई लाभ नहीं, वैसे ही जीवन में भी अगर समय रहते सत्कर्म नहीं करते, तो अंत में पछताना पड़ता है।
सेवा और भजन का महत्व: भजन में "कर सेवा दीन दुखियों की" और "हरि भजन में अपने मन को लगा" कहकर दो महत्वपूर्ण बातों पर जोर दिया गया है - मानव सेवा और ईश्वर भक्ति। ये दोनों ही जीवन को सार्थक बनाने के मार्ग हैं।
आत्मा का जागरण: "जो सोयी तेरी आतम है, उठ जा तू उसको फिर से जगा" – यह पंक्ति आत्म-जागरण का आह्वान है। यह हमें अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने और आत्मिक उन्नति के लिए प्रेरित करती है।
गुरु ज्ञान और अभिमान त्याग: गुरु के ज्ञान को अपनाने और अभिमान त्यागने की सीख दी गई है। अभिमान मोक्ष के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है।
विजय सोनी का गायन: गायक विजय सोनी ने अपनी सुरीली और भावपूर्ण आवाज़ में इस भजन को जीवंत किया है। उनके गायन में वह गहराई है जो श्रोता को आत्मचिंतन के लिए मजबूर करती है।
💖 जीवन का सार
🎯 संदेश
इस भजन का मूल संदेश यह है कि जीवन अनमोल और अनिश्चित है। इसलिए समय रहते सत्कर्म करें, दीन-दुखियों की सेवा करें, हरि भजन में मन लगाएं, अभिमान त्यागें और गुरु के ज्ञान को अपनाएं। अगर समय रहते नहीं चेते, तो पछताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा। यह भजन हर उस व्यक्ति के लिए एक जागृति का आह्वान है जो जीवन की भागदौड़ में खुद को खो चुका है।
✨ आत्मचिंतन का अवसर
इन सांसो का भरोसा क्या केवल एक भजन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का एक गहरा अवसर है। यह हमें रुककर सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपना जीवन कैसे जी रहे हैं। क्या हम सत्कर्म के बीज बो रहे हैं? क्या हम मानव सेवा और ईश्वर भक्ति में लगे हैं? या फिर हम अभिमान और अज्ञान में डूबे हुए हैं? यह भजन हमें सही मार्ग दिखाने वाला प्रकाश स्तंभ है।
🙏 समय रहते चेत जाओ, सत्कर्म के बीज बो जाओ || हरि भजन में मन लगाओ, जीवन सफल बनाओ 🙏
गायक: विजय सोनी | संपर्क: 9334120930
॥ जब चिड़िया चुग जाएगी खेत, फिर पाछे पछताएगा ॥
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "In Saanson Ka Bharosa Kya Lyrics (इन सांसो का भरोसा क्या पल भर में क्या हो जाएगा) – Vijay Soni Bhajan 2026 | Preet Bhajan" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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