मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
🙏 मोहन मुरली वाल्या दुपट्टा मेरा रंग दे
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
(Mohan Murli Waleya Dupatta Mera Rang De) – Krishna Bhajan 2026
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ धुन ॥
धुन- आजा पौणाहारिया करने दर्शन तेरे
मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा रंग दे ।
ओ सोहने कुण्डलं वाल्या, दुपट्टा मेरा रंग दे ॥
ओ दुपट्टा, मेरा रंग दे... श्याम रंग रंग दे ।
ओ श्याम, रंग रंग दे... इहिओ तैथों मंगदे ॥
मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा...
॥ अंतरा १ ॥
जिस रंग में तेरा, मुकुट रंगा है ।
मुकट रंगा है तेरे, माथे पे सजा है ॥
ओ दुपट्टा, मेरा रंग दे... श्याम रंग रंग दे ।
ओ श्याम, रंग रंग दे... इहिओ तैथों मंगदे ॥
मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा...
॥ अंतरा २ ॥
जिस रंग में, तेरी माला रंगी है ।
माला रंगी है तेरे, गल में सजी है ॥
ओ दुपट्टा, मेरा रंग दे... श्याम रंग रंग दे ।
ओ श्याम, रंग रंग दे... इहिओ तैथों मंगदे ॥
मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा...
॥ अंतरा ३ ॥
जिस रंग में तेरा, पीताम्बर सजा है ।
पीताम्बर सजा है तेरे, अंग मै सजा है ॥
ओ दुपट्टा, मेरा रंग दे... श्याम रंग रंग दे ।
ओ श्याम, रंग रंग दे... इहिओ तैथों मंगदे ॥
मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा...
॥ अंतरा ४ ॥
जिस रंग में तेरी, कंबली रंगी है ।
कंबली रंगी है तेरे, मोंढे ते सजी है ॥
ओ दुपट्टा, मेरा रंग दे... श्याम रंग रंग दे ।
ओ श्याम, रंग रंग दे... इहिओ तैथों मंगदे ॥
मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा...
॥ अंतरा ५ ॥
जिस रंग में तेरी, राधा रंगी है ।
राधा रंगी है तेरे, संग में सजी है ॥
ओ दुपट्टा, मेरा रंग दे... श्याम रंग रंग दे ।
ओ श्याम, रंग रंग दे... इहिओ तैथों मंगदे ॥
मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा...
॥ अंतरा ६ ॥
जिस रंग में तेरे, भक्त रंगे है ।
भक्त, रंगे है तेरे, दिल में बसे है ॥
ओ दुपट्टा, मेरा रंग दे... श्याम रंग रंग दे ।
ओ श्याम, रंग रंग दे... इहिओ तैथों मंगदे ॥
मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा...
मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा रंग दे ।
ओ सोहने कुण्डलं वाल्या, दुपट्टा मेरा रंग दे ॥
✍️ रचना : पारंपरिक (लोक भजन)
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह भजन एक गोपी या भक्त की मार्मिक प्रार्थना है जो कृष्ण से अपने दुपट्टे को उनके श्याम रंग में रंग देने की याचना करती है। "मोहन मुरली वाल्या" – मोहक मुरली बजाने वाले कृष्ण से विनती है कि मेरा दुपट्टा उसी रंग में रंग दो जिस रंग में तुम्हारा मुकुट, माला, पीताम्बर, कम्बली और यहाँ तक कि राधा भी रंगी हुई हैं।
हर अंतरे में भक्त उस दिव्य रंग (श्याम रंग) को पाने की लालसा व्यक्त करता है। यह रंग सिर्फ बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। "इहिओ तैथों मंगदे" – यही वरदान हम तुमसे माँगते हैं।
अंतिम अंतरे में भक्त कहता है कि जिस रंग में तुम्हारे भक्त रंगे हैं, उसी रंग में मुझे भी रंग दो। यह सिद्ध करता है कि सच्चा भक्त वही है जो प्रभु के रंग में पूरी तरह रंग जाता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
श्याम रंग का महत्व: कृष्ण का श्याम रंग प्रेम, करुणा और दिव्यता का प्रतीक है। भक्त उसी रंग में रंगना चाहता है – यानी कृष्णमय हो जाना चाहता है।
प्रत्येक अंतरे में नए अंगों का वर्णन: मुकुट, माला, पीताम्बर, कम्बली – कृष्ण के हर आभूषण और वस्त्र के माध्यम से भक्त उनके स्वरूप का ध्यान करता है और उसी दिव्यता को आत्मसात करना चाहता है।
राधा का उल्लेख: "जिस रंग में तेरी राधा रंगी है" – यह पंक्ति बताती है कि राधा भी उसी श्याम रंग में रंगी हुई हैं। यानी प्रेम की पराकाष्ठा – राधा और कृष्ण एक ही रंग में रंगे हैं।
भक्तों का स्थान: भक्त उसी रंग में रंगे हैं और कृष्ण के दिल में बसे हैं। यह भक्ति का सर्वोच्च स्थान है – प्रभु के हृदय में वास।
💖 प्रेम का श्याम रंग
🎯 संदेश
सच्ची भक्ति का अर्थ है प्रभु के रंग में रंग जाना। जब हम कृष्ण के प्रेम में रंग जाते हैं, तो हमारा अहंकार, हमारी पृथकता समाप्त हो जाती है और हम उनके स्वरूप में विलीन हो जाते हैं।
✨ आस्था का प्रतीक
यह भजन सिखाता है कि प्रभु से याचना करनी चाहिए – उनके गुणों, उनके रंग, उनके प्रेम को पाने की। दुपट्टा रंगने की प्रार्थना वस्त्र रंगने नहीं, बल्कि हृदय रंगने की प्रार्थना है।
🙏 श्याम रंग रंग दे ।। इहिओ तैथों मंगदे ।।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "मोहन मुरली वाल्या दुपट्टा मेरा रंग दे (Mohan Murli Waleya Dupatta Mera Rang De) – Krishna Bhajan 2026" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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